दुनिया

ताइवान ने HIMARS रॉकेट सिस्टम का सफल किया परीक्षण, चीन के बढ़ते खतरे के बीच सामरिक क्षमता में बड़ा इजाफा

ताइवान ने सोमवार को अमेरिकी सप्लाई वाले अत्याधुनिक HIMARS (High Mobility Artillery Rocket System) रॉकेट सिस्टम का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण देश की सामरिक तैयारियों को दर्शाता है और चीन की लगातार बढ़ती आक्रामकता के बीच एक महत्वपूर्ण सैन्य संकेत माना जा रहा है.

300 किलोमीटर तक के टारगेट को बना सकती है निशाना

HIMARS रॉकेट सिस्टम, जिसे अमेरिका की रक्षा कंपनी Lockheed Martin ने विकसित किया है, ताइवान को चीन से निपटने के लिए दी गई प्रमुख सैन्य सहायता में शामिल है. यह सिस्टम एक मोबाइल प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जो सटीकता और रेंज के मामले में बेहद खतरनाक और प्रभावशाली माना जाता है. यह प्रणाली 300 किलोमीटर तक के टारगेट को सटीकता से निशाना बना सकती है.

ताइवान की रक्षा मंत्रालय ने कही ये बात

ताइवान की रक्षा मंत्रालय ने इस परीक्षण की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम देश की संप्रभुता की रक्षा और किसी भी बाहरी खतरे से निपटने की तैयारियों का हिस्सा है. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि परीक्षण सफल रहा और रॉकेट ने अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदा. उन्होंने कहा, “हम किसी युद्ध को बढ़ावा नहीं देना चाहते, लेकिन हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना हमारा कर्तव्य है.”

चीन की समुद्री और हवाई गतिविधियों का दे सकेगा जवाब

विशेषज्ञ मानते हैं कि HIMARS प्रणाली के संचालन से ताइवान की स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक (दूरी से हमला करने की क्षमता) क्षमताएं कई गुना बढ़ जाएंगी, जिससे वह चीन की समुद्री और हवाई गतिविधियों का प्रभावी जवाब दे सकेगा.

ताइवान के चारों ओर चीन की सैन्य गतिविधियों में आई तेज़ी

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में ताइवान के चारों ओर चीन की सैन्य गतिविधियों में तेज़ी आई है. चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करता है. ऐसे में HIMARS जैसे अत्याधुनिक हथियार ताइवान को सामरिक रूप से मज़बूत करने के साथ-साथ अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का भी अहम हिस्सा हैं.

अमेरिका ने ताइवान को 11 HIMARS यूनिट्स देने की घोषणा की

अमेरिका ने 2020 में ताइवान को 11 HIMARS यूनिट्स देने की घोषणा की थी. यह सौदा लगभग 436 मिलियन डॉलर का था और इसका उद्देश्य ताइवान को संभावित चीनी हमले के खिलाफ रणनीतिक बढ़त देना था. यह परीक्षण ताइवान की सैन्य तैयारियों और अमेरिका-ताइवान रक्षा सहयोग को दर्शाता है, जो आने वाले समय में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में अहम भूमिका निभा सकता है.

-भारत एक्सप्रेस 

मिताली चंदोला, एडिटर, स्पेशल प्रोजेक्ट्स

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