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हैंडशेक नहीं, तस्वीर नहीं… ट्रंप के बयान से बिगड़ा माहौल; स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान की 80 मिनट की बातचीत में क्या-क्या तय हुआ?

US Iran Talks in Switzerland: मिडिल ईस्ट में महीनों से जारी तनाव के बीच हालात सामान्य करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं. इसी कड़ी में रविवार (21 जून) को स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पहली उच्चस्तरीय बैठक हुई ( US Iran Switzerland Meeting). हालांकि, बातचीत से किसी बड़ी प्रगति के संकेत नहीं मिले. लेबनान समेत क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद सामने आए, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने भी माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया.

स्विट्जरलैंड में हुई इस अहम वार्ता में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने किया. वहीं, ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) और विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) बातचीत में शामिल हुए.

80 मिनट तक चली बातचीत

स्विट्जरलैंड में हुई यह बैठक हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बने अंतरिम समझौते के बाद आयोजित की गई थी (US Iran Talks). इसका मकसद दोनों देशों के बीच चल रहे विवादों पर बातचीत को आगे बढ़ाना और पिछले चार महीनों से जारी तनाव को कम करने के रास्ते तलाशना था.

औपचारिक वार्ता से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों से अलग-अलग मुलाकात की. इसके बाद तेहरान ने स्पष्ट किया कि आगे की बातचीत का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका समझौते की शर्तों को कितनी गंभीरता से लागू करता है और लेबनान में जारी इजरायली सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है. ईरान का आरोप है कि समझौते के तहत व्यापक युद्धविराम सुनिश्चित करने की दिशा में अब तक पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है. उसके मुताबिक लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर हालात अभी भी नहीं बदले हैं.

करीब 80 मिनट तक चली इस बैठक में दोनों पक्षों ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की. इनमें ईरान पर लगे प्रतिबंधों में राहत, विदेशों में उसकी फ्रीज संपत्तियों को जारी करने और आपसी भरोसा बहाल करने जैसे विषय प्रमुख रहे.

हैंडशेक से किया इनकार

वार्ता के दौरान तनाव तब बढ़ गया, जब डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया पर ईरान को लेबनान में अपने सहयोगी समूहों को नियंत्रित करने की चेतावनी दी. इससे नाराज ईरानी प्रतिनिधिमंडल कुछ समय के लिए बैठक छोड़कर चला गया. बाद में ईरान ने अमेरिका से बयानबाजी में संयम बरतने की सलाह दी, जबकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे कठिन कूटनीतिक वार्ताओं का सामान्य हिस्सा बताया.

तनाव का असर बैठक के माहौल पर भी दिखा और ईरान ने प्रस्तावित हैंडशेक व संयुक्त तस्वीर से इनकार कर दिया. वहीं, इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य मौजूदगी जारी रखने के संकेत दिए. इस बीच, वार्ता में बने गतिरोध से तेल बाजार भी प्रभावित हुआ और ब्रेंट क्रूड की कीमत 81 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई.

प्रमुख समझौते और परिणाम

बैठक के बाद कतर और पाकिस्तान ने संयुक्त बयान जारी कर बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच पहली उच्चस्तरीय समिति की वार्ता सकारात्मक माहौल में संपन्न हुई. दोनों पक्षों ने बातचीत को आगे बढ़ाने और लंबित मुद्दों के समाधान के लिए कई अहम कदमों पर सहमति जताई.


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समझौते के तहत अमेरिका और ईरान ने एक संयुक्त समिति बनाने पर सहमति जताई है, जो बातचीत की प्रगति पर नजर रखेगी. परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान के लिए अलग-अलग समूह भी बनाए जाएंगे. दोनों देशों ने अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव या किसी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए सीधे बातचीत का रास्ता बनाया जाएगा. वहीं, लेबनान में हालात पर नजर रखने और सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए एक विशेष निगरानी व्यवस्था भी बनाई जाएगी.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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