अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो. (फाइल फोटो)
Russia-Ukraine War: अनादोलु एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार (20 मई) को कहा कि अगर रूस यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष में युद्ध विराम के लिए अपनी शर्तों के साथ प्रस्ताव देने में विफल रहता है, तो अमेरिका द्वारा रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जाएंगे. सीनेट की विदेश संबंध समिति के सामने बोलते हुए, विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि रूस की ओर से इस तरह की देरी इस मामले पर बातचीत करने के मास्को के वास्तविक इरादे को दिखाएगी.
अनादोलु एजेंसी के हवाले से रुबियो (Marco Rubio) ने सीनेट समिति को बताया, “हमारी समझ यह है कि रूसी युद्ध विराम तक पहुंचने के लिए आवश्यक शर्तें तय कर रहा है, उसके बाद ही रूस व्यापक वार्ता के लिए अनुमति देंगा. “हम उन शर्तों का इंतजार कर रहे हैं और फिर मुझे पुतिन की मांग के बारे में बेहतर समझ होगी, जब हम देखेंगे कि वे शर्तें क्या हैं.”
नए प्रतिबंधों की संभावना के बारे में पूछे जाने पर, रुबियो ने कहा कि अगर रूस शांति की तलाश करने के लिए अनिच्छुक दिखाई देता है और युद्ध जारी रखता है, तो ऐसे होने की संभावना है.
रुबियो ने कहा कि अगर यह स्पष्ट हो जाता है कि रूसियों को शांति समझौते में कोई दिलचस्पी नहीं है और वे बस चाहते हैं कि वे एक दूसरे के साथ लड़ाई जारी रखना चाहते हैं, तो हम उस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.
हालांकि, रुबियो ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस स्तर पर प्रतिबंधों की धमकी नहीं देना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि यह कूटनीतिक प्रक्रिया को पटरी से उतार सकता है. राष्ट्रपति का मानना है कि अभी यदि आप प्रतिबंधों की धमकी देना शुरू करते हैं, तो रूसी बात करना बंद कर देंगे,
रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप संघर्ष को समाप्त करने के लिए “बहुत प्रतिबद्ध” हैं और जहां तक हो सके लंबे समय तक दोनों पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान की ओर प्रभावित करने की क्षमता बनाए रखना चाहते हैं.
इससे पहले सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि रूस और यूक्रेन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ दो घंटे की लंबी कॉल के बाद युद्ध विराम और चल रहे युद्ध के संभावित अंत की दिशा में “तुरंत” बातचीत शुरू करेंगे. उन्होंने बताया कि नव निर्वाचित पोप लियो XIV द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले वेटिकन ने वार्ता की मेजबानी करने में रुचि व्यक्त की है.
दोनों देशों के बीच कैदियों के आदान-प्रदान के समझौते के बावजूद यह प्रस्ताव इस्तांबुल में हाल ही में युद्ध विराम वार्ता की विफलता के बाद शांति वार्ता के लिए 16 मई को पोप के प्रस्ताव के अनुरूप है.
-भारत एक्सप्रेस
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