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ब्रिटेन ने इज़रायल के साथ मुक्त व्यापार समझौता वार्ता निलंबित की, गाज़ा संकट का दिया हवाला, नेतन्‍याहू सरकार बोली- “यह हमारे खिलाफ जुनून है”

ब्रिटिश सरकार ने कहा- “हम वर्तमान हालात को देखते हुए इज़रायल के साथ चल रही व्यापार वार्ता को रोक रहे हैं. हमारी प्राथमिकता इस समय क्षेत्र में शांति, मानवीय सहायता और युद्धविराम को बढ़ावा देना है.”

Israel PM Benjamin Netanyahu

Free Trade Agreement israel UK: ब्रिटेन ने गाज़ा में चल रहे मानवीय संकट और युद्ध के हालात को देखते हुए इज़राइल के साथ चल रही मुक्त व्यापार (Free Trade Agreement – FTA) की बातचीत को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है. ब्रिटेन की सरकार ने यह कदम तब उठाया जब गाज़ा पट्टी में इज़राइली सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना तेज हो गई है.

ब्रिटेन की सरकार का बयान

ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि “हम वर्तमान हालात को देखते हुए इज़राइल के साथ चल रही व्यापार वार्ता को रोक रहे हैं. हमारी प्राथमिकता इस समय क्षेत्र में शांति, मानवीय सहायता और युद्धविराम को बढ़ावा देना है.” सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय और व्यापार विभाग के बीच गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया.

इज़राइल की तीखी प्रतिक्रिया

ब्रिटेन के इस कदम पर इज़राइली विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है. मंत्रालय ने बयान में कहा, “यह ब्रिटिश सरकार की एकतरफा और पक्षपातपूर्ण नीति को दर्शाता है, जो इज़राइल के खिलाफ एक लंबे समय से चली आ रही पूर्वाग्रह की भावना का हिस्सा है. यह ‘एंटी-इज़राइल ऑबसेशन’ (हमारे खिलाफ जुनून) है, जो न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि आतंकवादियों को भी एक प्रकार की नैतिक छूट दे रहा है.”

नए मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत

ब्रिटेन और इज़राइल के बीच एक नए मुक्त व्यापार समझौते को लेकर 2022 से बातचीत चल रही थी. यह समझौता दोनों देशों के बीच वस्त्र, दवा, टेक्नोलॉजी और रक्षा क्षेत्र में व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था. अब तक कई दौर की बैठकें हो चुकी थीं.

लेकिन हाल के सप्ताहों में गाज़ा में इज़राइली सैन्य हमलों में सैकड़ों नागरिकों की मौत और मानवीय संकट को लेकर ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों में विरोध बढ़ा है. कई सांसदों और मानवाधिकार संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाया था कि वह इज़राइल के साथ व्यापारिक समझौते को निलंबित करे.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय ब्रिटेन की घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय छवि को ध्यान में रखकर लिया गया है, खासकर तब जब ब्रिटेन में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी और मानवाधिकार समूहों का दबाव बढ़ता जा रहा है.

ब्रिटेन का यह कदम न केवल इज़राइल के साथ उसके व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि पश्चिमी देशों में इस्राइली नीतियों को लेकर बदलते रुख का भी संकेत देता है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य यूरोपीय देश भी इसी राह पर चलते हैं या कोई मध्यस्थता की कोशिश होती है.

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