US Midterm Elections: अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म (मध्यावधि) चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. रिपब्लिकन शासन वाले 26 राज्यों में वोटर लिस्ट से भारतीय मूल के लगभग 2 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं. अमेरिका में कुल 21 लाख भारतीय मूल के वोटर्स हैं, जिनका रुझान पारंपरिक रूप से विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रहा है.
ट्रम्प प्रशासन चुनाव सुरक्षा और धांधली रोकने के नाम पर ‘सेव अमेरिका एक्ट’ के तहत वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण कर रहा है, जिसमें नागरिकता साबित करने के लिए पासपोर्ट और जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य किए जा रहे हैं. विपक्ष का आरोप है कि रिपब्लिकन पार्टी अपनी घटती लोकप्रियता और हार के डर से जानबूझकर भारतीय और अल्पसंख्यक वोटरों को निशाना बना रही है. हालिया सर्वे में ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 30% पर आ गई है, जिससे संसद में बहुमत खोने की चिंता में रिपब्लिकन उम्मीदवार भी उनसे दूरी बना रहे हैं.
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले देश की राजनीति में हड़कंप मच गया है. ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के शासन वाले 26 राज्यों में वोटर लिस्ट से करीब 2 लाख भारतीय मूल के अमेरिकियों के नाम हटा दिए गए हैं. अमेरिका में लगभग 21 लाख भारतीय मूल के मतदाता रहते हैं. आंकड़ों के मुताबिक, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में लगभग 65% भारतीय-अमेरिकियों ने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस को वोट दिया था. ऐसे में विश्लेषकों का मानना है कि इस वोट बैंक के कटने से चुनाव नतीजों पर गहरा असर पड़ सकता है.
ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि अयोग्य और गैर-नागरिक वोटरों के नाम हटाने के लिए वोटर लिस्ट की पारदर्शी जांच की जा रही है. इसके तहत ट्रम्प ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को लागू कराने पर जोर दे रहे हैं. इस कानून के मुताबिक, मतदान के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वालों को पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज दिखाकर अमेरिकी नागरिकता साबित करनी होगी. साथ ही पोलिंग बूथ और डाक (माध्यम) से वोट डालने के नियमों को बेहद सख्त बना दिया गया है. हालांकि, विपक्षी नेताओं का कहना है कि इन सख्त नियमों के बहाने वैध मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है.
मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रम्प की लोकप्रियता में भारी गिरावट देखी जा रही है. एपी-एनओआरसी (AP-NORC) के ताजा सर्वे के अनुसार, केवल 30% अमेरिकी ही ट्रम्प के कामकाज से संतुष्ट हैं. वहीं, महंगाई से निपटने के उनके तौर-तरीकों पर अप्रूवल रेटिंग गिरकर महज 17% रह गई है. लगभग 65% से ज्यादा नागरिक बढ़ती कीमतों के लिए उनकी नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. इस गिरते ग्राफ की वजह से उनकी अपनी पार्टी के कई उम्मीदवार चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प और उनके ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे से दूरी बनाते दिख रहे हैं.
अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस में अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए रिपब्लिकन पार्टी के लिए यह चुनाव बेहद अहम है. सीनेट की 100 में से 35 सीटों और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव होने हैं. वर्तमान में रिपब्लिकन के पास सीनेट में 53 और हाउस में 218 सीटें हैं. अगर ट्रम्प की पार्टी यह चुनाव हार जाती है और बहुमत खो देती है, तो राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए संसद में किसी भी बिल को पास कराना या कानून बनाना लगभग असंभव हो जाएगा.
यह भी पढे़ं-PAK के हाथों में कटोरा, मुंह पर धौंस! वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट से कांप उठेगा पाकिस्तान, क्यों हुआ कंगाल?
-भारत एक्सप्रेस
Bhagwant Mann OSD Case: पंजाब सीएमओ के कथित भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच के खिलाफ याचिका…
Delhi High Court: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के खिलाफ यूथ कांग्रेस पहुंची…
Pilot Smit Machar: इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को…
2026 के उपचुनावों के शुरुआती रुझानों में असम की नगांव लोकसभा सीट और पश्चिम बंगाल…
Electronic Items Price Hike: कॉपर, स्टील और प्लास्टिक की कीमतों में तेजी से गीजर, कूलर…
Brij Bhushan Sharan Singh: भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी…