पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और वहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शानदार प्रदर्शन ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. जाने-माने अमेरिकी स्कॉलर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मामलों के विशेषज्ञ वाल्टर के. एंडरसन ने इस जीत को भारतीय राजनीति के लिए एक ‘ऐतिहासिक मोड़’ करार दिया है. एंडरसन के अनुसार, बंगाल में भाजपा की इस सफलता ने न केवल देश के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्थिति को अभेद्य बना दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनके कद को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है.
एक विशेष साक्षात्कार में एंडरसन ने विस्तार से बताया कि कैसे पीएम मोदी का नेतृत्व और अमित शाह की रणनीति ने एक ऐसे राज्य में भाजपा का झंडा बुलंद किया, जिसे कभी पार्टी के लिए अभेद्य दुर्ग माना जाता था.
वाल्टर एंडरसन ने तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़त कोई इत्तेफाक या अस्थायी चुनावी लहर नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया है जो ‘प्रो-बिजनेस’ और ‘प्रो-इकोनॉमिक्स’ है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है. एंडरसन का मानना है कि इस जीत के बाद वाशिंगटन और दुनिया की अन्य राजधानियों में पीएम मोदी को और भी अधिक गंभीरता से लिया जाएगा.
उन्होंने अमेरिकी राजनीति का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘विजेता’ पसंद हैं और पीएम मोदी स्पष्ट रूप से एक विजेता के रूप में उभरे हैं. ट्रंप ने मोदी को उनकी पार्टी के शानदार प्रदर्शन के लिए बधाई संदेश भी भेजा है, जो दिखाता है कि वैश्विक नेता भारत की राजनीतिक स्थिरता को कितनी अहमियत दे रहे हैं.
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के स्कॉलर एंडरसन ने भाजपा की सफलता को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा है:
एंडरसन ने बताया कि भाजपा ने बंगाल में केवल चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि एक प्रशासनिक ढांचा तैयार किया. उन्होंने खुलासा किया कि बंगाल में आरएसएस की करीब 4,500 शाखाएं सक्रिय हैं, जिन्होंने वोटरों तक पहुंचने और पार्टी का साहित्य बांटने में सेना की तरह काम किया.
इंटरव्यू के दौरान एंडरसन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका की जमकर सराहना की. उन्होंने शाह को पीएम मोदी का ‘टफ मैन’ (सख्त जान) बताया, जो न केवल सख्त हैं बल्कि बेहद चालाक रणनीतिकार भी हैं. एंडरसन के अनुसार, शाह ने बंगाल का बार-बार दौरा किया और उम्मीदवारों के चयन से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक खुद कमान संभाली. शाह का ‘सोशियोलॉजिकल दिमाग’ यह समझने में माहिर है कि कौन सा समीकरण जीत दिलाएगा और वह पूरी ताकत से उसी के पीछे लग जाते हैं.
एंडरसन ने इस बात को रेखांकित किया कि भाजपा ने उन इलाकों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है जहां आदिवासी आबादी अधिक है. विशेष रूप से उत्तर बंगाल में पार्टी की सफलता के पीछे ‘वन आश्रम’ (आरएसएस समर्थित आदिवासी समूह) की कड़ी मेहनत है, जो लंबे समय से उन क्षेत्रों में सेवा कार्य कर रहे हैं. यह दर्शाता है कि भाजपा की जीत केवल भाषणों तक सीमित नहीं थी, बल्कि वर्षों के जमीनी काम का नतीजा थी.
वाल्टर एंडरसन ने एक दिलचस्प तथ्य सामने रखा कि भले ही भाजपा चुनावी तौर पर दक्षिण भारत में कमजोर दिखती हो, लेकिन आरएसएस वहां काफी मजबूत है. केरल जैसे राज्य में आरएसएस की 4,000 से अधिक शाखाएं हैं, जो भाजपा को एक मजबूत बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) प्रदान करती हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा अब सीरियाई ईसाइयों जैसे समूहों तक भी अपनी पहुंच बना रही है, जो पार्टी की बदलती और विस्तारवादी छवि को दर्शाता है.
एंडरसन का मानना है कि इस हार ने ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर कमजोर कर दिया है. उन्होंने सवाल उठाया कि अब वह प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विपक्षी गुट का नेतृत्व कैसे कर पाएंगी, जबकि उनका अपना गढ़ ही कमजोर हो गया है. इसके अलावा, उन्होंने भारत में ‘लेफ्ट’ (वामपंथ) के भविष्य पर भी कड़ा प्रहार किया और कहा कि भारत में अब लेफ्ट पूरी तरह खत्म हो चुका है. कांग्रेस पार्टी के बारे में उन्होंने कहा कि उसका नेतृत्व मतदाताओं में भरोसा जगाने में नाकाम रहा है और उनके पास भाजपा जैसा मजबूत बुनियादी ढांचा नहीं है.
पिछले पांच दशकों से आरएसएस का अध्ययन कर रहे एंडरसन ने बताया कि यह संगठन अब केवल एक सांस्कृतिक समूह नहीं रह गया है. यह मजदूरों, छात्रों, महिलाओं, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़े एक विशाल नेटवर्क में बदल चुका है. उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें आरएसएस को तानाशाही या लोकतंत्र विरोधी बताया जाता है. एंडरसन के अनुसार, आरएसएस के भीतर भी मतभेद होते हैं, लेकिन उनमें एकता बनाए रखने की अद्भुत क्षमता है.
एंडरसन ने एक चौंकाने वाली बात यह भी कही कि बंगाल के सीमावर्ती जिलों में भाजपा के वोट बढ़े हैं, जहां मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है. यह इस बात का संकेत है कि मुस्लिम मतदाताओं का एक हिस्सा भी अब भाजपा की ओर रुख कर रहा है.
आने वाले समय को देखते हुए एंडरसन ने भविष्यवाणी की कि 2029 के आम चुनाव में पीएम मोदी निर्विवाद नेता के रूप में बने रहेंगे. यदि भारत की आर्थिक वृद्धि इसी तरह जारी रही और विपक्ष बंटा रहा, तो भाजपा अगले चुनाव में और भी बड़े बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर सकती है. उनके अनुसार, अभी इसके आसार बहुत मजबूत नजर आ रहे हैं.
नोट: वाल्टर एंडरसन जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में साउथ एशिया स्टडीज के सीनियर एडजंक्ट प्रोफेसर हैं और आरएसएस पर लिखी गई मशहूर किताबों ‘द ब्रदरहुड इन सैफरन’ के को-ऑथर हैं. उन्होंने दशकों तक भारतीय राजनीति और संगठनों का गहराई से विश्लेषण किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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