Iran Israel War: तेहरान के आसमान में छाई बारूद की धुंध के बीच, ईरान के राजनीतिक इतिहास का एक नया अध्याय शुरू हो गया है. 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के भीषण हवाई हमले में 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद, ईरान ने रातों-रात अपना नया ‘सुप्रीम लीडर’ चुन लिया है. यह नाम कोई और नहीं, बल्कि उनके ही बेटे मोजतबा खामेनेई का है.
मोजतबा खामेनेई सिर्फ एक बेटे नहीं, बल्कि अपने पिता के सबसे बड़े ‘शैडो ऑपरेटर’ रहे हैं. उनका जन्म साल 1969 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था. शुरुआत से ही वे एक बेहद कट्टर धार्मिक माहौल में पले-बढ़े और वहीं से अपनी तालीम हासिल की.
जब ईरान और इराक का युद्ध अपने आखिरी और सबसे खूनी दौर में था, तब युवा मोजतबा ने ईरान की सबसे ताकतवर सेना ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) में काम किया था. यहीं से सेना के भीतर उनकी जड़ों का विस्तार शुरू हुआ.
मोजतबा खामेनेई का नाम कागजों पर बहुत कम नजर आता है, लेकिन ईरान की सत्ता के गलियारों में उनकी तूती बोलती है. मोजतबा ने आज तक सरकार में कोई बड़ा आधिकारिक या सार्वजनिक पद नहीं संभाला. लेकिन वह हमेशा अपने पिता अली खामेनेई के सबसे भरोसेमंद सलाहकार और ‘गेटकीपर’ (Gatekeeper) रहे. सर्वोच्च नेता के दफ्तर से निकलने वाला हर बड़ा फैसला उनके हाथों से होकर गुजरता था.
उनकी सबसे बड़ी ताकत सेना (IRGC) और ईरान के खूंखार अर्धसैनिक बल ‘बासिज’ (Basij) के साथ उनके गहरे और मजबूत संबंध हैं. यही सैन्य समर्थन आज उन्हें इस सर्वोच्च कुर्सी तक ले आया है. मोजतबा खामेनेई का नाम दुनिया के सामने पहली बार तब प्रमुखता से उछला, जब 2009 में ईरान में राष्ट्रपति चुनावों के नतीजों (महमूद अहमदीनेजाद की जीत) के खिलाफ देशव्यापी ‘ग्रीन मूवमेंट’ विरोध प्रदर्शन हुए थे.
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आरोप है कि सड़कों पर उतरे लाखों प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से कुचलने की रणनीति सीधे तौर पर मोजतबा ने ही तैयार की थी. बासिज मिलिशिया को खुली छूट देने और विरोध को खून से दबाने के पीछे मोजतबा के सख्त फैसलों को ही जिम्मेदार माना जाता है. इसी घटना ने उन्हें ईरान के कट्टरपंथियों का चहेता बना दिया.
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