नॉशिर गोवाडिया
Noshir Gowadia: बीते दिनों ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान अमेरिका ने अपने एक बेहद शक्तिशाली विमान से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया. जब से अमेरिका ने ईरान पर इस विमान से हमला किया है तब से दुनिया में सिर्फ एक ही नाम चल रहा है और वो है B2 स्पिरिट बॉम्बर. आखिर क्या है B2 स्पिरिट बॉम्बर और कैसे इसे बनाने में एक भारतीय भी था शामिल और क्यों अमेरिका ने उस भारतीय को जेल में डाल दिया, आइये बताते हैं.
पहले समझते हैं कि आखिर B2 स्पिरिट बॉम्बर क्या बला है. दरअसल B2 स्पिरिट बॉम्बर को स्टील्थ बॉम्बर्स भी कहा जाता है. एक ऐसा अदृश्य शिकारी, जो रडार की नज़रों से भी छिपा रह सके. 1980 के दशक में इस स्टेल्थ बमवर्षक को बनाने की योजना शुरू हुई. तकनीक इतनी जटिल थी कि हर एक विमान पर करीब $2.1 बिलियन (यानी 17,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा) खर्च आया. पूरी परियोजना की लागत करीब 45 अरब डॉलर तक पहुंची. इतना खर्च किसी शहर को खड़ा करने में होता है, लेकिन अमेरिका ने इसे आसमान में उड़ाया.
B-2 की डिजाइन किसी आम जहाज जैसी नहीं है. इसके पंख और शरीर एक जैसे हैं. जिससे यह रडार में दिखता ही नहीं. ये विमान बिना रुके 11,000 किलोमीटर तक उड़ सकता है, और परमाणु बम से लेकर स्मार्ट बम तक गिरा सकता है. इस विमान को उड़ाने में इसके प्रॉपल्शन सिस्टम का सबसे बड़ा रोल होता है. कह सकते हैं कि ये B-2 की रीढ़ की हड्डी होता है. इसे बनाने में एक भारतीय अमेरिकी ने भी मदद की थी जिसका नाम था नॉशिर गोवाडिया.
नॉशिर गोवाडिया पेशे से इंजीनियर है और वह मुंबई में पैदा हुआ था. उसपर आरोप है कि उसने क्लासीफाइड सैन्य जानकारी चीन को शेयर की. जिसकी मदद से चीन ने अपनी क्रूज मिसाइलों को डिटेक्ट करने में असमर्थ बनाने के लिए एक एग्जोस्ट सिस्टम तैयार किया था.
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फेडरल ब्यूरो इनवेस्टिगेशन (एफबीआई) के मुताबिक नॉशिर को पहली बार 2005 में आपराधिक शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया था. उसपर क्लासीफाइड जानकारी ऐसे व्यक्ति को देने का आरोप था जिसे नहीं देना चाहिये था. ट्रॉयल के दौरान मिली जानकारी में पता चला कि उसने 1968-1986 के बीच B-2 बॉम्बर्स के निर्माताओं के साथ 20 सालों तक काम किया. इस दौरान उसने उसके यूनिक प्रॉपल्शन सिस्टम और B-2 के लो ऑब्जर्वेबल कैपेबिलिटीज को निर्माण करने में अहम भूमिका निभाई थी.
ट्रॉयल के दौरान पेश किए गए सबूतों के आधार पर पता चलता है कि गोवाडिया ने जून 2003 से जुलाई 2005 के बीच 6 बार चीन का दौरा किया था. इस दौरान उसने चीन में विभिन्न सैन्य तकनीकी सेवाएं दी. जिसमें स्टेल्थी नोजल डेवलप करके क्रूज मिसाइल बनाने में मदद करना भी शामिल था. इसके लिए चीन ने उसे 110,000 डॉलर का भुगतान किया था. साल 2010 में नॉशिर गोवाडिया को अमेरिकी कोर्ट ने 32 सालों की सजा सुनाई थी.
– भारत एक्सप्रेस
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