पाकिस्तान ने क्यों एक्टिव किया मक्का पैक्ट
Why Makkah Pact Activated: यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के नाक में दम कर दिया गया है. हूती लड़ाको ने सऊदी के रणनीतिक बंदरगाहों पर कब्जा कर लिया है. कई इलाकों में भारी आतंक मचाया है. इस बीच ‘मक्का पैक्ट’ को लेकर अचानक सरगर्मियां तेज हो गई हैं.
अचानक इस समझौते पर बात इसलिए होने लगी है क्योंकि 5 अक्टूबर 2026 को रियाद में हुई आपात बैठक में तीनों देशों ने इसे एक्टिवेट कर दिया है. हालांकि, इससे पहले पाकिस्तान इससे इनकार कर रहा है था. ऐसे में आइये जानें आखिर न न करते पाकिस्तान को आखिर किस मजबूरी में ऐसा करना पड़ा.
दो महीने पहले पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच एक समझोते में ‘मक्का पैक्ट’ बना. इस पैक्ट की बुनियादी शर्त नाटो (NATO) के आर्टिकल 5 की तरह है. यानी ‘तीनों में से किसी एक देश पर हमला, तीनों पर हमला माना जाएगा.
शुरुआत में पाकिस्तान इस समझौते के तहत सऊदी अरब में अपनी जमीनी फौज झोंकने से साफ बच रहा था. 10 सितंबर तक इस्लामाबाद का रुख था कि हूतियों के खिलाफ कोई सैन्य बातचीत नहीं हुई है. कुछ ही दिनों के भीतर पाकिस्तान ने 180 डिग्री का यू-टर्न ले लिया. 4 कार्गो विमानों से एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन और तोपों की खेप भेजते हुए अपनी सेना की तैनाती पर मुहर लगा दी. सवाल उठता है कि आखिर न..न.. करते हुए पाकिस्तान को किस दबाव और मजबूरी में यह पैक्ट एक्टिवेट करना पड़ा?
ये भी पढ़ें: मैंने क्यों चुनी थी फ्लाईदुबई…? को-पायलट हम्माम अल-हम्मामी ने उगले सारे राज
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 10 सितंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बात की थी. उन्होंने हूतियों पर अमेरिकी हवाई हमलों की गुहार लगाई थी. हालांकि, अमेरिका ने सीधे इसके लिए मना कर दिया.
ठीक बाद 15 सितंबर को हूतियों और अमेरिका के बीच एक गुप्त समझौता हुआ. इसमें हूतियों ने वादा किया कि वे लाल सागर में अमेरिका और इजरायल के जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे. अमेरिका का हाथ पीछे खिंचते ही सऊदी अरब संकट मंडराने लगा और उसने मक्का पैक्ट के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया.
15-16 सितंबर की रात हूतियों ने मक्का की दिशा में ड्रोन दागे. इंटरसेप्शन के दौरान ताइफ शहर में एक नागरिक की मौत हो गई. हूतियों ने इसे तेल संयंत्रों पर निशाना बताया. हालांकि, सऊदी अरब ने इसे ‘पवित्र हरमैन शरीफैन पर हमला’ करार दिया.
पाकिस्तान के लिए मक्का-मदीना की सुरक्षा संवेदनशील और जज्बाती मुद्दा है, जिस पर वह पीछे नहीं हट सकता था. 17 सितंबर को रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को आनन-फानन में ऐलान करना पड़ा कि पैक्ट न भी होता, तब भी पाकिस्तान मक्का और मदीना की हिफाजत के लिए अपनी सेना भेजेगा.
कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को सऊदी अरब के अरबों डॉलर के डिपॉजिट और सस्ते तेल का सहारा है. 1982 के जॉइंट डिफेंस प्रोटोकॉल और सितंबर 2025 की स्पेशल डिफेंस डील के तहत पाकिस्तान के करीब 8 हजार सैनिक पहले से ही सऊदी अरब में तैनात हैं. अगर पाकिस्तान इस नाजुक मोड़ पर मक्का पैक्ट से पीछे हटता, तो सऊदी अरब से मिलने वाली तमाम वित्तीय इमदाद तुरंत रुक जाती.
ये भी पढ़ें: जनता जानती है..! नवादा में गरजे प्रशांत किशोर, अनंत सिंह पर खुला PK का राज
सऊदी अरब की सुरक्षा के नाम पर मक्का पैक्ट को सक्रिय करना पाकिस्तान के लिए कांटों का ताज साबित हो सकता है. एक तरफ जहां पाकिस्तान अपने देश के भीतर मौजूद बड़ी शिया आबादी और पड़ोसी ईरान की नाराजगी का जोखिम उठा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब की आर्थिक मजबूरी ने उसे यमन के उस खूनी दलदल में धकेल दिया है, जिससे वह पिछले एक दशक से बचने की कोशिश कर रहा था.
Russia Ukraine War: रूस ने कीव समेत यूक्रेन के कई शहरों पर बड़े पैमाने पर…
Makka Pact Impact on India Pakistan War: क्या भारत-पाक तनाव में सऊदी अरब और तुर्किये…
जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की…
सुप्रीम कोर्ट ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत के खिलाफ…
Pakistan Political Crisis: पाकिस्तान में शहबाज शरीफ, असीम मुनीर और मोहसिन नकवी के बीच बढ़ती…
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और…