अजब-गजब

इसलिए भूलभुलैया जैसे रास्तों में भी नहीं भटकतीं मधुमक्खियां, ड्रोन तकनीक ने पहली बार रिकॉर्ड किया उनका सीक्रेट रास्ता

Bee Navigation Study: आपके दिनचर्या में शामिल शहद को बनाने के लिए मधुमक्खियों को सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है. वो लंबी दूरी तय कर फूलों तक पहुंचती हैं और रस चूसकर अपने छत्ते में इकट्ठा करती हैं. आप सोच रहे होंगे कि आखिर मधुमक्खियां इतनी दूरी कैसे तय कर लेती हैं और वो रास्ता कैसे नहीं भूलती. इस सवाल का अब जवाब मिल गया है. शोधकर्ताओं ने एक नए रिसर्च में पाया है कि मधुमक्खियां बेहद शानदार नेविगेटर होती हैं.

रिसर्च में यह भी पाया गया कि हर मधुमक्खी का अपना रूट तय होता है. वो अपने रूट से बिल्कुल नहीं भटकती हैं. वो जब भी उड़ती हैं, उसी रूट पर चलती हैं. कई मधुमक्खियां तो अपने पुराने रास्ते से सिर्फ खुछ सेंटीमीटर की दूरी पर उड़ती पाई गईं.

ड्रोन आधारित तकनीक ने बदली रिसर्च की दिशा

यह रिसर्च फ्रीबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ड्रोन आधारित तकनीक की मदद से की. उन्होंने जंगली मधुमक्खियों की उड़ान को ट्रैक किया. इस रिसर्च का नेतृत्व न्यूरोबायोलॉजिस्ट और व्यवहार जीवविज्ञानी प्रोफेसर डॉ. एंड्रयू स्ट्रॉ ने किया. उनकी टीम ने मधुमक्खियों को उनके छत्ते और करीब 120 मीटर दूर मौजूद भोजन स्रोत के बीच उड़ते हुए ट्रैक किया.

इस काम के लिए शोधकर्ताओं ने ‘फास्ट लॉक-ऑन ट्रैकिंग’ यानी FLO नाम की खास तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें हर मधुमक्खी पर एक छोटा रिफ्लेक्टिव मार्कर लगाया गया. ड्रोन पर लगे कंप्यूटर ने उड़ती मधुमक्खी की पहचान की और मिलीसेकंड के भीतर उसका पीछा किया. इस तकनीक से पहली बार मधुमक्खियों के हाई-रिजॉल्यूशन 3D फ्लाइट पाथ रिकॉर्ड किए जा सके.

अपने पसंदीदा रास्ते पर ही चलती हैं मधुमक्खियां

अध्ययन में सामने आया कि हर मधुमक्खी अपना पसंदीदा रास्ता चुनती है और आने-जाने के दौरान उसी रास्ते पर बेहद सटीक तरीके से उड़ती है. प्रोफेसर स्ट्रॉ के मुताबिक, इन मधुमक्खियों के झुंड में मौजूद सभी मधुमक्खियां अपने-अपने रूट पर ही चलती दिखाई दीं.

शोधकर्ताओं ने जर्मनी के कैसरस्टुहल क्षेत्र के पास मधुमक्खियों के 255 उड़ान मार्गों का विश्लेषण किया. इस क्षेत्र में झाड़ियां, मक्के का खेत और एक पेड़ मौजूद था. पेड़ छत्ते और भोजन स्रोत के बीच था, जिससे सीधा रास्ता रुक रहा था.

पेड़ों को निशानी के तौर पर यूज करती हैं मधुमक्खियां

नतीजों में पता चला कि मधुमक्खियां रास्ता पहचानने के लिए आसपास मौजूद पेड़ों और दूसरी प्राकृतिक निशानियों का सहारा लेती हैं. पेड़ों के पास उड़ते समय उनका रास्ता सबसे ज्यादा स्थिर और सटीक रहा. वहीं मक्के के खेत जैसे एक जैसे दिखने वाले इलाकों में उनके रास्ते में थोड़ा ज्यादा बदलाव देखने को मिला. इससे साफ हुआ कि अलग-अलग निशानियां मधुमक्खियों को दिशा पहचानने और सही मार्ग पर बने रहने में मदद करती हैं.

इस अध्ययन ने मधुमक्खियों के मशहूर ‘वैगल डांस’ को लेकर भी नई जानकारी दी है. वैगल डांस के जरिए मधुमक्खियां अपने साथियों को भोजन स्रोत की दिशा और दूरी की जानकारी देती हैं. पहले माना जाता था कि इस नृत्य में दिशा संबंधी जानकारी पूरी तरह सटीक नहीं होती. करीब 100 मीटर दूर भोजन स्रोत के लिए इसमें दिशा की जानकारी लगभग 30 डिग्री तक अलग हो सकती है.

सटीक तरीके से उड़ती हैं मधुमक्खियां

लेकिन नए अध्ययन से साफ हुआ कि यह कमी मधुमक्खियों की नेविगेशन क्षमता की कमजोरी नहीं है. जब मधुमक्खियां किसी परिचित जगह की ओर उड़ती हैं, तो वे नृत्य में दी गई जानकारी से कहीं ज्यादा सटीक तरीके से वहां पहुंचती हैं.

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प्रोफेसर स्ट्रॉ के अनुसार मधुमक्खियां अपने जाने-पहचाने रास्तों पर बेहद कम गलती करती हैं. जहां उनके रास्ते में सबसे ज्यादा बदलाव दिखा, वहां भी वे अपने निजी मार्ग से सिर्फ कुछ डिग्री ही भटकीं. इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि मधुमक्खियों की दिशा पहचानने की क्षमता पहले की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

गोविंद सिंह बिहार के कैमूर जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हासिल की और पटना कॉलेज, पटना से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, कंटेंट एडिटिंग, रिसर्च और न्यूज प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया। फिलहाल वह भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस विदेश नीति, राष्ट्रीय राजनीति और बिहार से जुड़े मुद्दों पर है।

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