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दरभंगा वालों जरा बच के! शहर में आया ‘बाल काटने’ वाला गैंग, अबतक कितने हुए शिकार?

Darbhanga Hair Cutting Gang: बिहार के दरभंगा जिले का एक शांत सा गांव इन दिनों खौफ के साए में जी रहा है. शाम ढलते ही घरों में सन्नाटा पसर जाता है और महिलाएं-लड़कियां खौफ से कांप उठती हैं. यह डर किसी साधारण चोर-उचक्के का नहीं, बल्कि एक ऐसे रहस्यमयी और विकृत मानसिकता वाले ‘साइको गैंग’ का है, जिसने इलाके के लोगों की रातों की नींद उड़ा दी है. बहादुरपुर थाना क्षेत्र के डरहार गांव में महज आठ दिनों के भीतर डकैती की दो ऐसी वारदातें हुई हैं, जिसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए हैं.

सिर्फ कैश-जेवर की लूट नहीं

दरअसल, यह गिरोह सिर्फ लाखों के जेवर और कैश नहीं लूट रहा, बल्कि जाते-जाते घर की महिलाओं और मासूम बच्चियों के बाल भी काट रहा है. इस अजीबोगरीब पैटर्न ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना दिया है.

पहली वारदात

दहशत का यह सिलसिला करीब आठ दिन पहले डॉ. पवन मिश्रा के घर से शुरू हुआ. शाम के वक्त पांच हथियारबंद बदमाश छत के रास्ते घर में दाखिल हुए. उस समय घर में उनकी 22 वर्षीय बहू करिश्मा और डेढ़ साल की बच्ची अकेली थी. बदमाशों ने करिश्मा के हाथ-पैर बांधे, उसके साथ मारपीट की और फिर उसके बाल काट दिए.

पीड़ित परिवार का आरोप है कि बदमाशों ने महिला की पीठ में कोई नशीला इंजेक्शन भी लगाया, जिससे वह बेहोश हो गई. इसके बाद बदमाशों ने घर के टीवी की आवाज तेज कर दी ताकि चीख-पुकार बाहर न जाए और करीब 5 लाख के जेवर व नगदी लेकर फरार हो गए.

मासूम बच्ची भी बनी शिकार

अभी पुलिस पहली वारदात की गुत्थी सुलझा भी नहीं पाई थी कि बदमाशों ने उसी गांव में एक शिक्षक दंपति सुमन कुमार चौधरी के घर को निशाना बना डाला. यहां भी लुटेरों ने जमकर लूटपाट की और जाते-जाते घर में सो रही एक नाबालिग बच्ची के बाल चाकू से काट दिए. लगातार दो घरों में एक जैसी दरिंदगी के बाद अब गांव के लोग रात-रात भर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं.

साधारण लुटेरे या कोई ‘साइको गैंग’?

आमतौर पर डकैतों का मकसद सिर्फ धन-दौलत लूटना होता है, लेकिन यहां लूट के साथ-साथ बाल काटने की सनक ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह किसी विकृत मानसिकता या फिर पीड़ितों के मन में गहरे तक आतंक बैठाने की साजिश हो सकती है.

फिलहाल बहादुरपुर थाना पुलिस, एफएसएल और टेक्निकल सेल की टीमें मौके से सबूत जुटाकर जांच में जुटी हैं, लेकिन जब तक यह गैंग पकड़ा नहीं जाता, डरहार गांव की महिलाओं का डर दूर होना नामुमकिन है.

ये भी पढ़ें: जीते तो बादशाह, हारे तो इतिहास… बांकीपुर में पीके के लिए करो या मरो जैसी स्थिति क्यों?

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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