China Live Grenade Hammer Story: कहावत है कि ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय.’ यह बात चीन की एक 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर बिल्कुल सटीक बैठती है. वह पिछले दो दशकों से हर दिन मौत के साये में जी रही थीं, लेकिन उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था. जिस लोहे के औजार से वह रोज अपनी रसोई में मिर्च पीसती थीं और दीवारों पर कीलें ठोकती थीं, वह कोई घरेलू औजार नहीं बल्कि तबाही मचाने वाला एक जिंदा हैंड ग्रेनेड था.
चीन के हुबेई प्रांत में 90 साल की एक बुजुर्ग महिला लगभग 20 सालों से जिस लोहे के टुकड़े को साधारण हथौड़ा समझकर रसोई में मिर्च पीसने, धान कूटने, अखरोट फोड़ने और दीवारों पर कीलें ठोकने के लिए इस्तेमाल कर रही थीं, वह असल में चीनी सेना का एक बेहद खतरनाक और जिंदा ‘टाइप 67’ हैंड ग्रेनेड था.
महिला को यह औजार करीब दो दशक पहले अपने खेत से मिला था, लेकिन इसकी सेफ्टी पिन और फ्यूज असेंबली सुरक्षित रहने के कारण हजारों बार जोरदार चोटें लगने के बावजूद इसका मुख्य बारूद ट्रिगर नहीं हुआ और एक बड़ा हादसा टल गया. जून 2024 में जब महिला का पुराना घर गिराने आई डिमोलिशन टीम के एक मजदूर ने इस औजार को पहचानकर पुलिस को खबर दी, तब बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुंचकर इसे सुरक्षित रूप से नष्ट किया.
कहते हैं किस्मत जब मेहरबान हो तो मौत भी घर के दरवाजे से खाली हाथ लौट जाती है. चीन से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली और अजब-गजब दास्तान सामने आई है, जिसे सुनकर कोई भी हैरान रह जाए. यह चौंकाने वाला वाकया चीन के हुबेई प्रांत का है, जहां 90 साल की एक बुजुर्ग दादी को करीब 20 साल पहले खेत में काम करते समय लोहे का एक भारी और मजबूत टुकड़ा मिला था. दिखने में बिल्कुल हथौड़े जैसा लगने के कारण दादी ने इसे उठाकर अपनी रसोई का हिस्सा बना लिया.
इसके बाद अगले दो दशकों तक यह औजार दादी की दिनचर्या का सबसे खास साथी बन गया. दादी बिना किसी डर के रोज इससे धान कूटती थीं, सूखी लाल मिर्च पीसती थीं, सख्त छिलके वाले अखरोट तोड़ती थीं और दीवारों पर धड़ाधड़ कीलें ठोकती थीं. हजारों बार इस लोहे के टुकड़े पर जोरदार झटके और चोटें पड़ीं, लेकिन हर बार किस्मत ने दादी का साथ दिया और किचन में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ.
इस अजब-गजब सिलसिले का अंत जून 2024 में हुआ, जब दादी का पुराना घर गिराने के लिए डिमोलिशन टीम वहां पहुंची. रसोई में रखे इस औजार पर जैसे ही एक मजदूर की नजर पड़ी, उसके पसीने छूट गए. वह कोई साधारण घरेलू सामान नहीं बल्कि चीनी सेना का बेहद खतरनाक ‘टाइप 67’ जिंदा हैंड ग्रेनेड था. मजदूर ने बिना देर किए तुरंत स्थानीय पुलिस और बम डिस्पोजल विशेषज्ञों को इसकी सूचना दी.
मौके पर पहुंचे बम विशेषज्ञों ने जांच के बाद बताया कि फटने के लिए ग्रेनेड की सेफ्टी पिन का खिंचना जरूरी होता है. चूंकि दादी ने कभी इसकी सेफ्टी पिन और फ्यूज असेंबली से छेड़छाड़ नहीं की थी, इसलिए हजारों बार पीटे जाने के बावजूद इसके अंदर का मुख्य बारूद सोया ही रहा. जब मासूम दादी को बताया गया कि वे 20 सालों से एक जिंदा बम से मसाले कूट रही थीं, तो उन्होंने भोलेपन से कहा कि उन्हें तो यह बस एक मजबूत औजार लगता था. आखिरकार पुलिस ने पूरे इलाके को खाली करवाकर उस ग्रेनेड को सुरक्षित तरीके से धमाका करके नष्ट किया और 20 साल पुराने इस ‘मौत के खेल’ का अंत हुआ.
यह भी पढ़ें- दूध की गाड़ी… लेकिन अंदर निकली शराब! तस्करों का ‘दूध वाला’ खेल फेल
-भारत एक्सप्रेस
दिल्ली के मावलंकर हॉल में आयोजित पेंटिंग प्रदर्शनी 'डिस्कवर द पावर ऑफ एक्सप्रेशन' में भारत…
SP Singh Baghel: भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क, महाकवि गोपाल दास नीरज फाउंडेशन ट्रस्ट और सोनवी…
नालसार यूनिवर्सिटी में बोलते हुए जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि चुनाव आयोग की SIR…
Vijay Sinha: बिहार सरकार के मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में…
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट…
भोपाल में गृह मंत्री अमित शाह ने देश को 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य…