अजब-गजब

नौकरी का ‘काल’ बना बवासीर! बाथरूम ब्रेक पर कंपनी ने किया फायर, अदालत पहुंचा मामला

चीन से एक ऐसा अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जो चर्चा का विषय बन गया है. चीन के इस मामले ने सोशल मीडिया पर मौजूद लोगों के बीच बहस का मुद्दा बना गया है. साथ ही लोगों के मन में कंपनियों के कर्मचारियों के अधिकार को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.

क्या है ये अजीबो-गरीब मामला?

दरअसल, चीन में एक इंजीनियर को बार-बार और लंबे समय के लिए बाथरूम ब्रेक लेने पर अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ गया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये मामला पूर्वी चीन के जियांगसू प्रांत का है. यहां के एक निजी कंपनी में ली नाम का ये शख्स 2010 से काम कर रहा था. साल 2014 में उसका ओपन टर्म कॉन्ट्रैक्ट भी रिन्यू किया गया, जिससे यह साफ था कि वह लंबे समय से कंपनी का कर्मचारी रहा है.

हालांकि, साल 2024 के अप्रैल और मई के महीने में उसकी गतिविधियों ने प्रबंधन का ध्यान खींचा. एक महिने की इस अवधि में उसने लगभग 14 बार बाथरूम ब्रेक लिया, जिसमें से एक ब्रेक तो 4 घंटो का था.

हर समय गायब रहने पर कंपनी ने की जांच

कंपनी ने बताया कि ली की नौकरी ऐसी थी की उसका हर समय उपलब्ध रहना जरूरी था. उसे काम से जुड़े सभी संदेशों का तुरंत जवाब देने का था, लेकिन वो बार-बार और लंबे समय के लिए अपनी सीट से गायब रहता था. जब प्रबंधन ने सीसीटीवी फुटेज को देखा, तो ली को बार-बार लंबे समय तक बाथरूम में जाते हुए देखा गया.

कंपनी ने ये भी बताया कि उनकी आंतरिक नियमों के अनुसार, बिना परमिशन के लंबे समय के लिए अपनी सीट छोड़ना अनुपस्थिति माना जाता है. साथ ही कंपनी का ये भी नियम है की 180 दिनों की अवधि में तीन कार्यदिवस की अनुपस्थिति पर कर्मचारी कंपनी से निकाला जा सकता है.

बता दें कि, लेबर यूनियन से मंजूरी लेने के बाद कंपनी ने ली को नौकरी से निकाल दिया.

क्या थी बार-बार ब्रेक की वजह?

कंपनी से निकाले जाने पर शख्स ने अदालत का रुख अपनाया. अदालत में उसने दावा किया कि उसे बवासीर की बीमारी है, जिसके कारण उसे लंबे समय का ब्रेक लेना पड़ता था. उसने अपने समर्थन में ऑनलाइन खरीदी गई दवाइयों की रसीद और सर्जरी के रिकॉर्ड पेश किए. इसके साथ ही उसने करीब 3.2 लाख युआन के मुआवजे की मांग की.

अदालत ने मेडिकल सबूतों पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिए गए रिकॉर्ड कई ब्रेक के बाद के हैं. ली ने न तो पहले अपनी बीमारी की जानकारी कंपनी को दी और न ही आधिकारिक रूप से सिकलिव के लिए आवेदन किया.

अदालत ने दो सुनवाइयों के बाद अदालत ने कंपनी और ली के बीच मध्यस्थता करवाई. साथ ही कंपनी को ली को 30 हजार युआन की सहायता राशि देने का निर्देश दिया.

ये भी  पढ़ें: अंटार्कटिका की नौकरी ने मचाया बवाल! 6 महीने काम के बदले ₹1.31 करोड़, फिर भी रिसर्च स्कॉलर क्यों है दुखी?

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

Recent Posts

‘ईमानदारी ही संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी’, श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का विशेष आयोजन

दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के…

18 minutes ago

अल फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका पर ईडी को नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने लाल किला ब्लास्ट से जुड़े मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी के…

27 minutes ago

Explained: ट्रंप के लिए बड़ी मुसीबत! कांग्रेस गंवाने के बाद क्या ईरान युद्ध पर यू-टर्न लेने को मजबूर होंगे अमेरिकी राष्ट्रपति?

US Politics: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का कब्जा हो…

44 minutes ago

ट्रंप की हार और शेयर मार्केट में आई बहार…! सेंसेक्स 1400 अंक उछला तो निफ्टी हुई 24,300 के पार

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगने की खबर के बीच भारतीय शेयर…

1 hour ago

दिल्ली के चावड़ी बाजार में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत ढही, दो लोगों की मौके पर मौत

Delhi Building Collapse: दिल्ली के चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत…

1 hour ago

अमेरिकी चुनाव में रिपब्लिकन की करारी हार, क्या अब कमजोर पड़ रही है ट्रंप की पकड़? 2028 की सियासी जंग के लिए खुलने लगे नए रास्ते

2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार ने डोनाल्ड ट्रंप की…

1 hour ago