भारत के ‘क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन’ (स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन) को एक नई और अभूतपूर्व रफ्तार मिल गई है. देश की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी, अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने गुजरात के खावड़ा में 3.37 गीगावाट-आवर (GWh) का ‘बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम’ (BESS) सफलतापूर्वक चालू कर दिया है. यह न केवल भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह चीन के बाहर दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन बैटरी स्टोरेज डिप्लॉयमेंट बन गया है.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस विशालकाय प्रोजेक्ट को ऑन-साइट निर्माण शुरू होने के महज 10 महीने के रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया है. यह अपने आप में देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.
सौर (Solar) और पवन (Wind) ऊर्जा की सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि ये मौसम और समय पर निर्भर करते हैं. लेकिन BESS इस अस्थिरता को खत्म कर देता है.
अडानी ग्रीन की यह 3.37 GWh की विशाल ‘सुपर बैटरी’ इतनी ताकतवर है कि यह अकेले पूरे एक दिन के लिए करीब 10 लाख घरों को बिजली दे सकती है. यह क्षमता इंदौर, चंडीगढ़ या पूरे गोवा राज्य की चरम (Peak) बिजली मांग को पूरा करने के लिए काफी है. यही नहीं, यह सिस्टम 1.2 करोड़ (12 मिलियन) एलईडी बल्बों को लगातार 10 घंटे तक जलाए रख सकता है.
कंपनी ने एक बहुत बड़ा मेगा-प्लान भी साझा किया है, जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) तक 10 GWh और अगले 5 वर्षों में 50 GWh तक बैटरी स्टोरेज क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है. अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक सागर अडानी ने इस ऐतिहासिक मौके पर कहा-
“भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के अगले चरण में बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) एक निर्णायक भूमिका निभाएगा. खावड़ा में 3.37 GWh BESS के चालू होने के साथ, AGEL लचीली और डिस्पैचेबल ऊर्जा प्रणालियों की नींव मजबूत कर रहा है.”
यह BESS प्रोजेक्ट उन्नत ऊर्जा प्रबंधन प्रणालियों (Energy Management Systems) और लिथियम-आयन बैटरी तकनीक का एक बेजोड़ संगम है. इसे रणनीतिक रूप से गुजरात के खावड़ा में स्थापित किया गया है, जहां AGEL पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट बना रहा है.
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आपको जानकर हैरानी होगी कि खावड़ा का यह बंजर जमीन पर फैला प्लांट 538 वर्ग किलोमीटर में है, जो फ्रांस की राजधानी पेरिस से भी 5 गुना बड़ा है. यहाँ कंपनी 2029 तक 30 GW क्षमता विकसित कर रही है, जिसमें से 9.9 GW पहले ही चालू हो चुकी है. यह प्रोजेक्ट साबित करता है कि भारत अब सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा के मामले में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है.
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