अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी
Gautam Adani: अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी का कहना है वे कभी भी अपने सामने मौजूद विकल्पों का जरूरत से ज्यादा मूल्यांकन नहीं करते और न ही उन पर विचार करते हैं. गौतम अडानी ने कहा, “मैं व्यक्तिगत रूप से इस पहलू को सबसे मुक्तिदायक मानता हूं और यही मुक्ति मुझे उद्यमी बनाती है. मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारत में 100 अडानी समूह बनाने की क्षमता है और आज उद्यमी बनने के लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं हो सकती है.”
पालनपुर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गौतम अडानी ने अपनी यात्रा के बारे में बताया. उन्होंने कहा, “पहली पीढ़ी के उद्यमी ज्यादातर एक अनूठे लाभ के साथ शुरुआत करते हैं – खोने के लिए कुछ नहीं होने का लाभ. यह विश्वास उनकी ताकत है. मेरे अपने दिमाग में यह मुक्तिदायक था. मेरे पास अनुसरण करने के लिए कोई विरासत नहीं थी- लेकिन मेरे पास एक विरासत बनाने का अवसर था.”
उन्होंने कहा, “मेरे पास किसी को साबित करने के लिए कुछ भी नहीं था, लेकिन मेरे पास खुद को साबित करने का मौका था कि मैं ऊपर उठ सकता हूं. अनजाने में पानी में कूदकर मेरे पास जोखिम लेने के लिए कुछ भी नहीं था. मुझे अपनी खुद की अपेक्षा पूरी करने की कोई उम्मीद नहीं थी. ये विश्वास मेरा एक हिस्सा बन गए.”
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अडानी ने कहा, “मेरा पहला वास्तविक ब्रेक वर्ष 1985 में आया. यह राजीव गांधी के देश के प्रधानमंत्री बनने और आयात नीतियों को उदार बनाने के साथ आम चुनावों के बाद हुआ. जबकि मेरे पास कोई व्यापारिक अनुभव नहीं था, मैंने अवसर का लाभ उठाया और व्यापारिक संगठन स्थापित करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा. हमने कच्चे माल से वंचित लघु उद्योगों को आपूर्ति करने के लिए पॉलिमर का आयात करना शुरू कर दिया. इस कदम ने वैश्विक व्यापार व्यवसाय की प्रारंभिक नींव रखी.”
उन्होंने कहा, “1991 में, भारत अपने सबसे खराब विदेशी मुद्रा भंडार संकट से गुजर रहा था. उस समय पी.वी. नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे और उनके वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई साहसिक फैसलों की घोषणा की. यहां फिर से मैंने तत्काल निर्णय लिया और पॉलिमर, धातु, कपड़ा और कृषि उत्पादों में काम करने वाला पूर्ण वैश्विक व्यापारिक घराना स्थापित करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा.”
अदाणी ने कहा, “हम 2 साल के भीतर देश का सबसे बड़ा वैश्विक व्यापारिक घराना बन गए. मैं 29 साल का हो गया था और दो आयामों के मूल्य की पूरी सराहना करता था जो हमारे द्वारा की जाने वाली हर चीज को परिभाषित करेगा- पैमाना और गति. इन वर्षो में मैंने महसूस किया है कि आप हमेशा ‘चीजों को सही समय’ देने में सक्षम नहीं हो सकते हैं, लेकिन आपकी ²ढ़ता ‘चीजों को सही समय’ दे सकती है और हमारा तीसरा बड़ा ब्रेक सही समय पर मिले अवसरों की श्रृंखला का परिणाम था.”
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