Sagar Adani Doha Visit: रेगिस्तान की रेत पर तेल के कुओं से अपनी किस्मत लिखने वाला मिडिल ईस्ट अब हवा और धूप (ग्रीन एनर्जी) में अपना भविष्य तलाश रहा है. और इस भविष्य के निर्माण में भारत का अदाणी ग्रुप एक ‘ग्लोबल प्लेयर’ बनकर उभर रहा है. अदाणी समूह और कतर के बीच आर्थिक रणनीतिक संबंधों की किताब में अब एक नया और बेहद अहम अध्याय जुड़ने जा रहा है. रविवार को कतर की राजधानी दोहा के बंद कमरों में एक ऐसी हाई-लेवल मीटिंग हुई है, जिसने वैश्विक निवेश बाजार की धड़कनें तेज कर दी हैं. यह मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि यह भविष्य के अरबों डॉलर के ‘ग्रीन इन्वेस्टमेंट’ की वह नींव हो सकती है, जो ग्लोबल एनर्जी मार्केट के समीकरण बदल कर रख देगी.
रविवार को कतर में अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (Adani Green Energy Ltd) के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कतर के सबसे रसूखदार वित्तीय अधिकारियों में से एक से मुलाकात की. सागर अदाणी ने कतर के सेंट्रल बैंक (QCB) के गवर्नर और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) के चेयरमैन शेख बंदर बिन मोहम्मद बिन सऊद अल थानी (Sheikh Bandar bin Mohammed bin Saoud Al-Thani) के साथ एक लंबी और अहम बैठक की.
कतर सेंट्रल बैंक द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल बैठक में वैश्विक वित्त (Global Finance) और दुनिया भर में निवेश के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई. माना जा रहा है कि यह मीटिंग ‘अक्षय ऊर्जा’ (Renewable Energy) और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में कतर के बड़े निवेश का एक नया द्वार खोलने वाली है.
यह पहली बार नहीं है जब कतर का खजाना अदाणी समूह की ओर आकर्षित हुआ है. अदाणी ग्रुप और कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA) के बीच पहले से ही बेहद मजबूत और भरोसेमंद व्यावसायिक संबंध रहे हैं. कतर के इसी सॉवरेन वेल्थ फंड (QIA) ने अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड (AEML) में लगभग 25% हिस्सेदारी हासिल करने के लिए 3,200 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया था.
इसके अलावा, पिछले साल ही QIA ने अदाणी ग्रीन एनर्जी की विकास क्षमता पर मुहर लगाते हुए इसमें करीब 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,150 करोड़ रुपये) का निवेश कर 2.7% की हिस्सेदारी खरीदी थी. यह नया दौरा इसी पुराने भरोसे को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की कवायद माना जा रहा है.
इस मीटिंग का सबसे बड़ा ‘कैच’ दोनों पक्षों का साझा विजन है. कतर अब अपनी अर्थव्यवस्था की निर्भरता केवल तेल और गैस पर नहीं रखना चाहता, वह तेजी से ‘ग्रीन एनर्जी’ की ओर शिफ्ट हो रहा है. वहीं, अदाणी समूह ने भी कतर में अपने निवेश विस्तार की योजनाएं स्पष्ट कर दी हैं. समूह की नजर कतर के साथ मिलकर ग्रीन हाइड्रोजन और विशाल सौर ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित करने पर है. कतर के पास अथाह पूंजी है और अदाणी ग्रीन के पास ‘एक्सपर्टीज’ यह दोनों का संगम एक बेजोड़ व्यावसायिक मॉडल तैयार कर रहा है.
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अदाणी समूह ने साल 2030 तक 45 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का एक बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. इतने बड़े विजन को हकीकत में बदलने के लिए QIA जैसे दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड्स का साथ किसी ‘संजीवनी’ से कम नहीं है. सागर अदाणी की दोहा यात्रा महज़ एक कारोबारी दौरा नहीं है; यह एक संकेत है कि भारत का कॉर्पोरेट जगत अब सिर्फ दुनिया से फंड नहीं मांग रहा, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था को दिशा देने की मेज पर बराबरी से बैठा है.
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