देश में कोयला उत्पादन बढ़ाने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार लगातार सुधारों पर काम कर रही है. इसी कड़ी में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने संसद सदस्यों की परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में वाणिज्यिक कोयला खनन को बढ़ावा देने, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और अब तक हुए सुधारों की समीक्षा की गई.
बैठक के दौरान जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कोयला मंत्रालय निजी कंपनियों और उद्योग संगठनों के साथ लगातार संवाद कर रहा है. इसके लिए देशभर में रोडशो और परामर्श बैठकों का आयोजन किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक निवेशकों को वाणिज्यिक कोयला खनन से जोड़ा जा सके. उन्होंने बताया कि अब तक कोयला खदानों की वाणिज्यिक नीलामी के 14 दौर सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं, जबकि 15वें दौर की प्रक्रिया जारी है. उनका कहना था कि पारदर्शी नीलामी व्यवस्था से निवेश बढ़ा है और प्रतिस्पर्धा को भी मजबूती मिली है.
बैठक में मौजूद कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने बताया कि पिछले दो वित्त वर्षों में भारत ने एक अरब टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा हासिल किया है, जिसमें कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में कुल उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं खदानों से आया. साथ ही सुधारों के कारण खदानों को चालू करने में लगने वाला समय भी कम हुआ है. पूरी तरह खोजी गई खदानों के लिए यह अवधि 51 महीने से घटकर 40 महीने और आंशिक रूप से खोजी गई खदानों के लिए 66 महीने से घटकर 52 महीने रह गई है.
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बैठक में अतिरिक्त सचिव रुपिंदर बराड़ ने सुधारों पर विस्तृत प्रस्तुति दी. वहीं, समिति के सदस्यों ने सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि निजी निवेश बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए. मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें भविष्य की नीतियों में शामिल किया जाएगा.
-भारत एक्सप्रेस
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