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धारावी पुनर्विकास में अड़ंगा लगाने वालों पर नकेल! जानबूझकर देरी की तो कटेगा ट्रांजिट किराया

Dharavi Redevelopment: धारावी पुनर्विकास के लिए जरूरी झोपड़ियों को जानबूझकर खाली करने में देरी करने वाले निवासियों को कम ट्रांजिट किराया दिया जाएगा. वहीं हजारों ऐसे निवासी जो सहयोग कर रहे हैं और स्वेच्छा से अपनी झोपड़ियां खाली कर रहे हैं, उन्हें उनके सभी लाभ पूरी तरह मिलते रहेंगे.

यह फैसला जमीन पर सामने आए हालिया मामलों के बाद लिया गया है. 16 झोपड़ियों को तोड़ने के नोटिस दिए गए थे. DRP ने परिवारों से बातचीत की और उन्हें समझाया. इसके बाद 12 परिवार स्वेच्छा से वहां से चले गए. लेकिन चार परिवारों ने जगह खाली नहीं की. आखिरकार उन्हें हटाने के लिए DRP को पुलिस की मदद लेनी पड़ी.

इसके बाद DRP ने 85 और झोपड़ियों की पहचान की. इस बार भी परिवारों को समझाया गया और नतीजा अलग रहा. सभी 85 परिवार बिना किसी बल प्रयोग के स्वेच्छा से वहां से चले गए. इसी आधार पर ANDPL का कहना है कि पूरे प्रोजेक्ट में कुछ ही निवासी ऐसे हैं, जो जानबूझकर प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं.

जबतक जगह खाली नहीं होती…

ANDPL के एक प्रवक्ता ने कहा,

समझाने से परिवारों को स्वेच्छा से वहां से जाने में मदद मिली है और यही हमारा तरीका बना रहेगा. लेकिन जब तक कोई जगह पूरी तरह खाली नहीं होती, वहां पुनर्वास का निर्माण शुरू नहीं किया जा सकता. जब जानबूझकर जगह खाली करने में देरी की जाती है, तो हजारों दूसरे परिवारों को अपने पुनर्वास घरों के लिए ज्यादा समय तक इंतजार करना पड़ता है. वहीं, मजदूरी और उपकरणों की लागत भी लगातार बढ़ती रहती है.

धारावी पुनर्विकास परियोजना का उद्देश्य नियमों के तहत यहां रहने वाले लोगों और कारोबारों को आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है. परियोजना के तहत पात्र निवासियों के पुनर्वास का प्रावधान किया गया है.

धारावी में मुफ्त मिलेगा 350 वर्ग फुट का घर

पहली बार ऐसे पात्र ग्राउंड फ्लोर के निवासियों को जिनके घर 1 जनवरी 2000 या उससे पहले मौजूद थे, धारावी में ही 350 वर्ग फुट का घर मुफ्त दिया जाएगा. वहीं, 2000 से 2011 के बीच वाली श्रेणी में पात्र लोगों को शहर की सीमा के भीतर 300 वर्ग फुट का घर 2.5 लाख रुपये के भुगतान पर मिलेगा.

इसके अलावा 1 जनवरी 2011 के बाद के निवासी और वे सभी ऊपरी मंजिल के निवासी, जिनके घर 15 नवंबर 2022 तक मौजूद थे, उन्हें धारावी से बाहर किफायती किराये की नीति के तहत 300 वर्ग फुट के घर का अधिकार होगा.

ANDPL के प्रवक्ता ने कहा,

जानबूझकर देरी के कुछ मामलों की वजह से करीब 10 लाख लोगों को मिलने वाले घर और दूसरे लाभ नहीं रुकने चाहिए.

अब किसे कितना ट्रांजिट किराया मिलेगा?

  • इस फैसले के दायरे में आने वाले गैर-सहयोगी ग्राउंड फ्लोर निवासियों को 18,000 रुपये की जगह 15,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे.
  • गैर-सहयोगी ऊपरी मंजिल के निवासियों को 15,000 रुपये की जगह 12,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे.
  • इस फैसले के दायरे में आने वाले गैर-सहयोगी व्यावसायिक और औद्योगिक कब्जाधारियों को 175 रुपये प्रति वर्ग फुट की जगह 145 रुपये प्रति वर्ग फुट मिलेंगे.
  • गैर-सहयोगी परिवारों को 5,000 रुपये का एकमुश्त शिफ्टिंग भत्ता नहीं मिलेगा.

आखिर कम क्यों किया जा रहा है ट्रांजिट किराया?

SPV के मुताबिक, कम दरों का उद्देश्य ऐसे गैर-सहयोगी निवासियों की जानबूझकर की जाने वाली देरी को रोकना है, जिनके अपने हित जुड़े हुए हैं. महाराष्ट्र स्लम एरिया एक्ट, 1971 की धारा 33 और 38 तथा DCPR 2034 के विनियमन 33(10A) के क्लॉज 1.14(iii) और (iv) के तहत ऐसे गैर-सहयोगी निवासियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जो जानबूझकर एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजना में देरी करने की कोशिश करते हैं.

SPV के अनुसार, ऐसे मामलों में संबंधित लोग किराये या ट्रांजिट आवास से जुड़े लाभ पाने के हकदार नहीं रह सकते हैं. हालांकि, ANDPL ऐसे मामलों में कम दर पर ट्रांजिट किराये का भुगतान जारी रखेगा.

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SPV का कहना है कि सामान्य दर और कम दर के बीच का अंतर उन अतिरिक्त खर्चों की कुछ भरपाई के लिए रखा गया है, जो ऐसे मामलों में सामने आते हैं. इसमें पुलिस बंदोबस्त के साथ अतिरिक्त मजदूर और उपकरणों पर होने वाला खर्च शामिल है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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