Gautam Adani Indology Mission: अदाणी कॉर्पोरेट हाउस में चल रहे 3 दिवसीय अदाणी ग्लोबल इंडोलॉजी कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उपस्थित रहे. यहां मुख्य अतिथि के रूप में पधारे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने कहा, “जब मैं शंकराचार्य बना था तब कहा था कि मेरा पद तब सार्थक होगा जब भारत विश्वगुरु बनेगा. आज गौतम अदाणी जी का यह कदम उसी स्वप्न को बल दे रहा है.”
इस अवसर पर अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भी संबोधन दिया. उन्होंने अपने भावुक भाषण की शुरुआत अपनी माँ शांताबेन को याद करते हुए की. उन्होंने कहा, “मेरा बचपन बनासकांठा के रेगिस्तान में बीता. हर शाम माँ हमें रामायण-महाभारत की कहानियाँ सुनाती थीं. सीता माता की भक्ति, राम का 14 वर्ष का वनवास, अर्जुन के संशय और कृष्ण का उपदेश – ये सिर्फ कहानियाँ नहीं थीं, ये मेरे धर्म, कर्तव्य और भक्ति का पाठ थे. माँ ने सिखाया – राम की शक्ति उनके धनुष में नहीं, उनके धर्म में थी.”
उन्होंने बताया कि पिछले साल अयोध्या में राम मंदिर प्रतिष्ठा के क्षण में माँ की आवाज फिर गूँजी और उसी क्षण इंडोलॉजी का विचार जन्मा.
“सभ्यताएँ तलवारों से नहीं, स्मृति-शून्यता से टूटती हैं”
गौतम अदाणी ने ऐतिहासिक आघातों को याद किया. उन्होंने कहा- बख्तियार खिलजी ने नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी जला दिए. 1835 में मैकाले ने हमारी ज्ञान-परंपरा को “बेकार” घोषित कर दिया. लाखों पांडुलिपियाँ यूरोप ले जाई गईं, अनुवाद हुईं, पेटेंट हुए और पश्चिमी खोज बता दी गईं.
उन्होंने चेतावनी दी, “हमला अब तलवारों से नहीं, ध्यान और स्मृति पर कब्जे से हो रहा है. आज सबसे बड़ा खतरा Artificial Intelligence है. अगर हमने अपनी सभ्यता को डिजिटल युग में नहीं बचाया तो कल का बच्चा जब पूछेगा – ‘धर्म क्या है?’ तो मशीन जवाब देगी अपनी ठंडी भाषा में – ‘Duty’. मोक्ष को बता देगी ‘Salvation’.”
तीन बड़े खतरे जिनकी ओर अदाणी ने किया इशारा
अदृश्यता का खतरा – हमारे ग्रंथ डिजिटल नहीं हुए तो AI के लिए हम अदृश्य हो जाएँगे.
सांस्कृतिक संकोच – धर्म, श्रद्धा, पुरुषार्थ जैसे विशाल भावबोध को AI एक शब्द में समेट देगा.
विदेशी न्याय – पश्चिमी ‘सेफ्टी फिल्टर’ वाले मॉडल हमारे वेद-उपनिषद को ‘मिथक’ या ‘हानिकारक’ घोषित कर देंगे.
उन्होंने कहा, “अगर सभ्यता ने अपनी सांस्कृतिक स्मृति की रक्षा नहीं की तो इंसान का व्यवहार परंपरा की ओर नहीं, मशीन के कोल्ड लॉजिक की ओर मुड़ेगा. यह बदलाव धीरे-धीरे और खामोशी से होगा.”
अंत में गौतम अदाणी ने घोषणा की, “शुरुआत के तौर पर मैं 100 करोड़ रुपये की राशि भारत नॉलेज ग्राफ बनाने और विद्वानों-तकनीशियनों को सहयोग देने के लिए समर्पित करता हूँ. यह सभ्यतागत ऋण चुकाने की शुरुआत है.” उन्होंने देश के सभी कॉर्पोरेट घरानों से इसमें शामिल होने की अपील की.
उन्होंने जोर देकर कहा, “यह कॉन्क्लेव सिर्फ सम्मेलन नहीं, घोषणा-पत्र है.
कि भारत अपनी संस्कृति को फिर कभी टूटने, पतला होने या बँटने नहीं देगा.
कि माँ की सुनाई राम-सीता की कहानियाँ कभी ‘मिथक’ नहीं कहलाएंगी.
कि धर्म कभी सिर्फ ‘नियम’ नहीं बनेगा.
जब मुंबई का बच्चा, बोस्टन का भारतीय किशोर या बर्लिन का योग शिक्षक पूछेगा – ‘धर्म क्या है?’
तो मशीन जवाब दे – हमारी माँओं की बुद्धि से, हमारे शास्त्रों की सत्यता से, आपके संरक्षित ज्ञान से.”
अंत में – “केवल भारत ही भारत को परिभाषित करेगा. भारत का इतिहास – भारत खुद लिखेगा!”
जय हिंद! जय भारत!
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