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मिश्रा जी की छत देख पड़ोसी भी हुए दीवाने! ‘गुल्लक’ के इस एपिसोड ने बदल दी सोलर पैनल को लेकर लोगों की सोच

भारत के मिडिल क्लास परिवारों की जिंदगी अक्सर एक छोटे से हिसाब-किताब के इर्द-गिर्द चलती है. महीने की शुरुआत में खर्चों की लिस्ट बनती है और महीने के आखिर में यह सोचकर राहत मिलती है कि कुछ पैसे बच गए. ऐसे घरों में बिजली का बिल सिर्फ एक बिल नहीं होता, बल्कि हर महीने आने वाली एक चिंता होती है. गर्मियों में एसी या कूलर चलाने से पहले भी कई परिवार एक बार जरूर सोचते हैं कि कहीं अगले महीने बिजली का बिल जेब पर भारी ना पड़ जाए.

यही रोजमर्रा की परेशानी अब एक लोकप्रिय टीवी सीरीज की कहानी के जरिए लोगों तक पहुंची है. सोनीलिव पर आने वाली टीवीएफ की चर्चित सीरीज ‘गुल्लक’ के सीजन 5 ने मनोरंजन के साथ रूफटॉप सोलर को लेकर लोगों की सोच बदलने की कोशिश की है. सीरीज के दो खास एपिसोड ‘अमन का फेयरवेल’ और ‘पापा का मेल ईगो’ ने आम परिवारों की उस परेशानी को दिखाया, जिससे देश के लाखों लोग हर साल गुजरते हैं. इन एपिसोड्स को यूट्यूब और फेसबुक पर 32 लाख से ज्यादा बार देखा गया, जिससे यह संदेश बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा.

कहानी की शुरुआत गर्मी की एक परेशान कर देने वाली सुबह से होती है. मिश्रा परिवार भीषण गर्मी और बढ़ते बिजली खर्च के बीच फंसा नजर आता है. एक तरफ गर्मी से राहत के लिए एसी चलाना जरूरी है, तो दूसरी तरफ बिजली मीटर की तेज रफ्तार चिंता बढ़ाती रहती है.

परिवार के मुखिया संतोष मिश्रा, जो हमेशा सोच-समझकर पैसे खर्च करने के लिए जाने जाते हैं, इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने का फैसला लेते हैं. वह अपनी छत पर सोलर पैनल लगवाने का कदम उठाते हैं. खास बात यह है कि यह फैसला किसी बड़े उद्योगपति या तकनीक प्रेमी व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक आम बचत करने वाले पिता का है. यही बात दर्शकों को इससे जोड़ देती है.

जब एक ऐसा व्यक्ति, जो हर खर्च को तौलकर करता है, सोलर को फायदे का सौदा मानता है, तो आम लोगों के मन में भी भरोसा पैदा होता है कि यह सिर्फ दिखावे की चीज नहीं है.

सरकारी योजना को आसान भाषा में समझाने की कोशिश

सीरीज ने सिर्फ कहानी नहीं दिखाई, बल्कि उन सवालों का जवाब भी दिया जो अक्सर लोगों के मन में आते हैं. जैसे सोलर लगाने में कितना खर्च आएगा? सरकारी मदद कैसे मिलेगी? क्या इसके लिए बहुत ज्यादा कागजी कार्रवाई करनी पड़ेगी?

एपिसोड्स के जरिए बताया गया कि ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत सरकार की ओर से ₹78,000 तक की सब्सिडी मिल सकती है. इसके अलावा बाकी खर्च के लिए करीब 6 प्रतिशत ब्याज दर पर आसान बैंक लोन की सुविधा भी उपलब्ध है. इससे उन लोगों की सबसे बड़ी चिंता दूर करने की कोशिश की गई जो शुरुआती खर्च और प्रक्रिया को लेकर पीछे हट जाते हैं.

पड़ोसी की छत देखकर बढ़ा भरोसा

कहानी में जब मिश्रा के घर की छत पर सोलर पैनल लग जाता हैं और बिजली खर्च में बड़ा बदलाव दिखता है, तो पहले शक करने वाली पड़ोसी भी इससे प्रभावित हो जाती हैं. वह भी सोलर लगवाने के लिए आवेदन करने का फैसला करती हैं.

यह दृश्य भारतीय समाज की उस आदत को दिखाता है जहां लोग किसी विज्ञापन से ज्यादा अपने आसपास के लोगों के अनुभव पर भरोसा करते हैं. जब किसी पड़ोसी या रिश्तेदार को किसी चीज का फायदा मिलता दिखाई देता है, तो उसे अपनाने का भरोसा तेजी से बढ़ता है.

जेब की चिंता से शुरू हुई सोलर की चर्चा

इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी सफलता यही रही कि इसमें सोलर को सिर्फ पर्यावरण बचाने के मुद्दे तक सीमित नहीं रखा गया. आम परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल होता है कि इससे मेरी बचत कितनी होगी? ‘गुल्लक’ ने इसी सोच को समझते हुए सोलर को एक स्मार्ट घरेलू फैसले के रूप में पेश किया.

संतोष मिश्रा के किरदार के जरिए यह संदेश दिया गया कि सोलर सिर्फ बिजली बचाने का तरीका नहीं, बल्कि जिंदगी को थोड़ा आसान बनाने वाला बदलाव भी हो सकता है. बिजली बचाने को लेकर घर में होने वाली रोज की बहस और चिंता भी इससे कम हो सकती है.

सरकारी सब्सिडी की समयसीमा मार्च 2027 तक होने की वजह से इस कहानी ने लोगों को जल्द फैसला लेने के लिए भी प्रेरित किया है. एक मनोरंजक सीरीज ने जिस तरह एक सरकारी योजना को बातचीत का हिस्सा बना दिया है, वह दिखाता है कि सही कहानी और सही संदेश मिल जाए तो बड़ी नीतियां भी लोगों तक आसानी से पहुंच सकती हैं.

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भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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