भारत का फूड प्रोसेसिंग सेक्टर अब देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनता जा रहा है. डेलॉइट और फिक्की की नई रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र कुल मैन्युफैक्चरिंग ग्रॉस वैल्यू एडिशन (GVA) में 7.7 प्रतिशत का योगदान दे रहा है और इसकी वैल्यू चेन में 70 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है.
करीब 160 अरब डॉलर मूल्य का यह क्षेत्र ग्रामीण औद्योगिकीकरण को गति देने के साथ-साथ फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को भी कम कर रहा है. बढ़ती ग्रामीण मांग, डिजिटल बदलाव और सरकारी नीतियों के समर्थन से इस क्षेत्र को नई रफ्तार मिली है. रिपोर्ट बताती है कि कृषि और फूड प्रोसेसिंग की वैल्यू चेन अब देश के कुल खाद्य बाजार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन चुकी है.
डेलॉइट साउथ एशिया में कंज्यूमर इंडस्ट्री के लीडर आनंद रमणाथन ने कहा, “भारत का कृषि और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर अब एक बड़े बदलाव की कगार पर है, जहां परंपरा और आधुनिक तकनीक मिलकर एक भविष्य-तैयार खाद्य व्यवस्था बना रहे हैं.”
उन्होंने यह भी बताया कि उपभोक्ताओं की पसंद अब साफ लेबल वाले, प्रोटीन से भरपूर और पाचन को बेहतर बनाने वाले खाद्य उत्पादों की ओर बढ़ रही है, जिससे भारत का खाद्य बाजार एक नई संरचना में ढल रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों के जरिए भारत हेल्थ-केंद्रित, तकनीक-आधारित और समावेशी फूड सिस्टम में वैश्विक नेतृत्व करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत का कृषि निर्यात 48.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो वैश्विक मांग की मजबूती को दर्शाता है. शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतें भी बदल रही हैं — अब लगभग 50 प्रतिशत खाद्य बजट पैकेज्ड और रेडी-टू-ईट उत्पादों पर खर्च किया जा रहा है.
इसी बीच, ग्रामीण क्षेत्रों में एफएमसीजी (तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता उत्पाद) की खपत में 2023-24 की तीसरी तिमाही में 6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है. वहीं, टियर-2 और टियर-3 शहर अब नए मांग केंद्र के रूप में उभर रहे हैं.
फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज ने कहा, “भारत का फूड प्रोसेसिंग सेक्टर केवल आर्थिक वृद्धि का इंजन नहीं, बल्कि समावेशी विकास का एक मजबूत माध्यम भी बन सकता है.” उन्होंने जोर दिया कि उपभोक्ताओं की बदलती पसंद और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को देखते हुए अब इस क्षेत्र में नवाचार, मूल्य संवर्धन और लचीलापन जरूरी हो गया है.
हालांकि इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं, रिपोर्ट यह भी बताती है कि आपूर्ति श्रृंखला में कई चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं. स्मार्ट तकनीकों में निवेश, मजबूत सप्लाई चेन का निर्माण और हेल्थ-केंद्रित उत्पादों का विस्तार— ये तीनों पहलू भारत के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को वैश्विक मानकों के अनुरूप ले जा सकते हैं.
यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि यदि सरकार, उद्योग जगत और इनोवेटर्स मिलकर काम करें, तो भारत आने वाले वर्षों में एक वैश्विक खाद्य शक्ति बन सकता है.
ये भी पढ़ें: India-UK FTA से JLR को भारत में बढ़ेगा फायदा, तीन साल में बिक्री दोगुनी करने का लक्ष्य
-भारत एक्सप्रेस
Kedarnath Waste Crisis 2026: केदारनाथ में अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच 50.30 मीट्रिक टन…
Nagaland Spurious Liquor Deaths: साल 1990 से पूर्ण शराबबंदी वाले राज्य नागालैंड में मिलावटी और…
Kab Hai Sarva Pitru Amavasya: पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के साथ होता है.वर्ष…
Manmohan Singh Birth Anniversary Tributes: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र…
Triple Talaq Law: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि…
मथुरा-वृंदावन के गुरु कृपा कुंज आश्रम में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण…