ESMA Act of India: भारत सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट के बीच रसोई गैस की कमी रोकने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है. सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 (ESMA) के तहत सभी तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है.
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग ने मिडिल ईस्ट से एलपीजी की सप्लाई को खासा प्रभावित किया है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है. पिछले साल भारत ने 33.15 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी का इस्तेमाल किया था. इसमें से 85-90 प्रतिशत एलपीजी मिडिल ईस्ट से आता है.
इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से सप्लाई चेन बाधित हो गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण रास्ते प्रभावित हुए हैं. ऐसे में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कमी होने का खतरा बढ़ गया था. सरकार ने समय रहते कदम उठाया है ताकि आम लोगों को परेशानी न हो.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने ESMA 1955 की आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया. इस कानून के तहत सरकार आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठा सकती है.
आदेश में साफ कहा गया है कि सभी रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस (एलपीजी) बनाने के लिए करें. इनका कोई अन्य इस्तेमाल जैसे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स बनाना नहीं होगा. रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन को अधिक से अधिक एलपीजी में बदलें.
सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि घरेलू उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के गैस सिलेंडर मिलते रहें. आदेश के तहत सभी कंपनियां प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को देंगी. इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) शामिल हैं.
ये सरकारी कंपनियां देश भर में घरेलू एलपीजी वितरित करती हैं. लगभग 33 करोड़ से ज्यादा एक्टिव कंज्यूमर हैं जो इनके जरिए गैस लेते हैं. आदेश से पेट्रोकेमिकल या अन्य इंडस्ट्री में प्रोपेन-ब्यूटेन का डायवर्शन रोका जाएगा.
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने ESMA का सहारा लिया है. यूक्रेन युद्ध के समय भी तेल क्षेत्र में ऐसे नियम लागू किए गए थे. तब रिफाइनिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया था कि वे देश में फ्यूल की कमी न होने दें. साथ ही फ्यूल को बाहर एक्सपोर्ट न करें क्योंकि उस समय विदेश में ज्यादा मार्जिन मिल रहा था. अब भी यही मकसद है कि घरेलू जरूरत पहले पूरी हो.
एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 एक कानून है जो सरकार को आवश्यक वस्तुओं की कीमत और उपलब्धता नियंत्रित करने की शक्ति देता है. इसमें खाद्य पदार्थ, ईंधन, दवाइयां आदि शामिल हो सकती हैं. आपात स्थिति में सरकार उत्पादन, वितरण और स्टॉक पर नियंत्रण कर सकती है.
एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है. यह मुख्य रूप से रसोई में इस्तेमाल होता है. भारत में करोड़ों परिवार इसी पर निर्भर हैं. कमी होने पर आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ता है और जीवन प्रभावित होता है.
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सरकार पहले से ही अमेरिका से एलपीजी आयात बढ़ा रही है. 2026 में करीब 2.2 मिलियन टन एलपीजी अमेरिका से खरीदने का डील किया गया है. यह कुल आयात का करीब 10 प्रतिशत है. साथ ही रूस से तेल आयात के लिए अमेरिका ने 30 दिनों की छूट भी दी है. ये कदम मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने की दिशा में हैं. लेकिन फिलहाल घरेलू उत्पादन बढ़ाना सबसे जरूरी है.
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