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भारत में धार्मिक पर्यटन का विशाल आर्थिक अवसर, सरकार कैसे कर सकती है इसे एक उद्योग के रूप में विकसित?

महाकुंभ के दौरान अनुमान से कहीं अधिक भीड़ देखने को मिली. पहले 500 मिलियन लोगों के आने की उम्मीद थी, लेकिन यह संख्या 600 से 660 मिलियन तक पहुंच गई. यह भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 40% है. यदि प्रति व्यक्ति खर्च ₹2,000 माना जाए, जिसमें यात्रा, ठहरने, भोजन, दान और अन्य खर्च शामिल हों, तो कुल व्यय सिर्फ 45 दिनों में ₹1.2 लाख करोड़ तक पहुंच जाता है. यह एक बड़ा आर्थिक अवसर दिखाता है.

यह सवाल उठता है कि क्या धार्मिक पर्यटन को एक उद्योग के रूप में विकसित किया जा सकता है? धर्म और आस्था का असर आर्थिक मंदी पर नहीं पड़ता. विपरीत परिस्थितियों में भी लोग आध्यात्मिक स्थानों की यात्रा करते हैं. उदाहरण के लिए, तिरुपति में हर साल 20-30 मिलियन लोग आते हैं, जबकि अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में 35-36 मिलियन श्रद्धालु पहुंचते हैं. मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर 18-22 मिलियन और वैष्णो देवी 10-12 मिलियन भक्तों को आकर्षित करता है. 2024 में अयोध्या में रिकॉर्ड 160 मिलियन श्रद्धालु पहुंचे.

हालांकि, समय के साथ किसी नए धार्मिक स्थल की लोकप्रियता कम हो सकती है. राम मंदिर को लेकर अभी जबरदस्त उत्साह है, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए बार-बार यात्रा करने को प्रोत्साहित करना होगा. महाकुंभ का आयोजन 144 वर्षों में एक बार होता है, इसलिए इसकी भव्यता अलग थी. अन्य कुंभ भी कम अंतराल पर होते हैं, लेकिन वे भी भारी भीड़ जुटाते हैं.

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कुछ आवश्यक बिंदु हैं:

1. स्थिर भीड़ का प्रवाह
तिरुपति जैसे स्थलों में एक समय के बाद भीड़ स्थिर हो जाती है. नियमित दर्शन की तुलना में त्योहारों या विशेष आयोजनों के दौरान अधिक लोग पहुंचते हैं. चार धाम यात्रा भी अधिकांश लोगों के लिए जीवन में एक बार की जाने वाली यात्रा होती है.

2. बेहतरीन कनेक्टिविटी
सरकार को सड़कें, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, पार्किंग सुविधाएं और हवाई अड्डे बेहतर बनाने होंगे ताकि लोग आसानी से वहां पहुंच सकें.

3. आरामदायक ठहरने की व्यवस्था
धार्मिक पर्यटन के दौरान बड़ी संख्या में लोग कम खर्च में यात्रा करना पसंद करते हैं. महंगे होटलों की जगह किफायती धर्मशालाओं और लॉज की संख्या बढ़ानी होगी. राजस्थान, गोवा और केरल जैसे पर्यटन स्थलों में विदेशी पर्यटकों के लिए उच्च स्तरीय सुविधाएं हैं, लेकिन मंदिर नगरों में ऐसी सुविधाएं नहीं मिलतीं.

4. प्रचार और योजना
महाकुंभ का व्यापक प्रचार किया गया, जिससे बड़ी भीड़ जुटी. लेकिन अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भी लगातार प्रचार जरूरी है. अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी को जोड़ने वाला तीर्थ सर्किट पहले से लोकप्रिय है. इसी तरह, नदी पर्यटन और नई यात्रा योजनाएं तैयार की जा सकती हैं.

5. खर्च बढ़ाने के उपाय
धार्मिक यात्राएं आमतौर पर दर्शन तक सीमित रहती हैं, जिससे लोग कम खर्च करते हैं. लंबे समय तक ठहरने की सुविधा देने से उनका खर्च बढ़ सकता है. हालांकि, सस्ते होटल और लॉज बनाने के लिए व्यावसायिक संभावनाएं जांचनी होंगी. शायद यही वजह है कि बड़े होटल ब्रांड इन स्थानों पर नहीं जाते.

धार्मिक पर्यटन को उद्योग बनाने के लिए जरूरी है कि पर्यटक अधिक समय बिताएं और अधिक खर्च करें. अमीर श्रद्धालु बार-बार नहीं आते, बल्कि हर बार अलग अनुभव चाहते हैं. शायद यही कारण है कि मंदिर नगरों का विकास सीमित है, जबकि अन्य पर्यटन स्थल जो अधिक खर्च करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, तेजी से बढ़ते हैं. फिर भी, धार्मिक पर्यटन में अपार संभावनाएं हैं और इस पर गंभीर विचार करने की जरूरत है.


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-भारत एक्सप्रेस

Ashutosh Kumar Rai

आशुतोष कुमार राय, भारत एक्सप्रेस के साथ बतौर सब एडिटर जुड़े हैं और करीब 7 वर्ष से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले आशुतोष, पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं. क्रिकेट, लाइफस्टाइल और राजनीति में खास दिलचस्पी है. देश-दुनिया और राजनीति की लेटेस्ट खबरों, विश्लेषण, इनसाइड स्टोरी और अपडेट्स के लिए आशुतोष को फॉलो करें… X Account: @AshuRai208

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