India Maritime Reforms 2025: भारत सरकार बंदरगाह अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विस्तार और कारोबार को सुगम बनाने के लिए व्यापक सुधार कर रही है, जिससे बंदरगाह दक्षता (पोर्ट एफिशिएंसी) में वृद्धि, कार्गो प्रवाह में मजबूती और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. यह बात केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सिंगापुर मैरीटाइम वीक (24-28 मार्च) के दौरान कही. उन्होंने कहा कि भारत विश्व स्तर पर जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) के लिए एक प्रतिस्पर्धी और विश्वसनीय विकल्प बनने की दिशा में कार्य कर रहा है.
2047 तक शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल होने का लक्ष्य
सोनोवाल ने कहा, “नीतिगत प्रोत्साहनों, व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) और बुनियादी ढांचे में सुधार के माध्यम से, हम 2047 तक भारत को शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल करने की नींव रख रहे हैं.”
उन्होंने हरित और टिकाऊ समुद्री भविष्य (Green and Sustainable Maritime Future) पर जोर देते हुए कहा कि भारत अपने बंदरगाहों को हरित अवसंरचना (ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर) के साथ उन्नत कर रहा है, कम उत्सर्जन वाले जहाजों को बढ़ावा दे रहा है और हरित समुद्री अर्थव्यवस्था की नींव रख रहा है.
ग्रीन हाइड्रोजन हब पोर्ट और ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर की पहल
भारत तीन प्रमुख ग्रीन हाइड्रोजन हब पोर्ट – कांडला, तूतीकोरिन और पारादीप – विकसित कर रहा है, जहां हरित हाइड्रोजन और उसके व्युत्पन्न (डेरिवेटिव) का निर्माण होगा. इससे समुद्री क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा.
उन्होंने यह भी कहा, “हम भारत-सिंगापुर ग्रीन और डिजिटल कॉरिडोर सहित ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. यह स्वच्छ ऊर्जा, स्मार्ट लॉजिस्टिक्स और स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता के अनुरूप है.”
डिजिटलीकरण और नवाचार के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार शिपिंग
सोनोवाल ने कहा कि गुजरात में स्थित GIFT सिटी (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी) एक वैश्विक समुद्री वित्त और शिप लीजिंग केंद्र के रूप में विकसित हो रही है. यह क्षेत्र अनुकूल कर और नियामक व्यवस्था (टैक्स और रेगुलेटरी इकोसिस्टम) प्रदान कर वैश्विक पूंजी बाजारों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करेगा.
उन्होंने कहा, “सागर हमें अलग नहीं करता, बल्कि जोड़ता है. हमें आज की चुनौतियों को अवसरों में बदलना होगा और एक ऐसा समुद्री विश्व बनाना होगा जो संपूर्ण मानवता की सेवा करे.”
$20 बिलियन की निवेश प्रतिबद्धता और व्यापार में तेजी
भारत ने बंदरगाह संपर्क, बहु-मॉडल लॉजिस्टिक्स और व्यापार सुविधा को बढ़ाने के लिए $20 बिलियन (लगभग 1.65 लाख करोड़ रुपये) के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है.
वर्तमान में भारतीय बंदरगाह वैश्विक कार्गो का 6% संभालते हैं, लेकिन 2047 तक इसे 15% तक बढ़ाने का लक्ष्य है. मैरिटाइम डेवलपमेंट फंड भारतीय जहाजों के बेड़े के विस्तार, शिपयार्ड आधुनिकीकरण और समुद्री अवसंरचना को सुदृढ़ करने में सहायक होगा.
भारत-यूएई-सिंगापुर के साथ डिजिटल व्यापार कॉरिडोर
सोनोवाल ने कहा कि भारत यूएई और सिंगापुर जैसे वैश्विक साझेदारों के साथ मिलकर वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर विकसित कर रहा है, जिससे बंदरगाहों के डिजिटल कनेक्शन, निर्बाध कार्गो मूवमेंट और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को कम किया जा सके.
वैश्विक व्यापार मार्गों में भारत की भूमिका
भारत वर्तमान में इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEEC), ईस्टर्न मैरीटाइम कॉरिडोर और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसी रणनीतिक परियोजनाओं को विकसित कर रहा है. इससे अंतर-महाद्वीपीय व्यापार मार्गों में विविधता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी.
-भारत एक्सप्रेस
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