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शीना बोरा हत्याकांड में नया ट्विस्ट! गवाह विधि मुखर्जी के यू-टर्न से सनसनी, क्या बेगुनाह साबित होगी इंद्राणी मुखर्जी?

Sheena Bora Murder Case: शीना बोरा हत्याकांड मामले की अहम गवाह विधि मुखर्जी अपने उस बयान से पलटी मार ली, जिसमें उन्होंने कहा था कि जांच एजेंसियों ने उनका कोई बयान दर्ज नहीं किया था और चार्जशीट में लगाये गए दस्तावेज “जाली और मनगढ़ंत” हैं. अदालत में दाखिल हलफनामे में विधि मुखर्जी ने कहा कि, 2015 में सीबीआई ने उनका बयान दर्ज किया था.

सीबीआई की विशेष अदालत में विधि मुखर्जी की गवाही गुरुवार को पूरी हो गई. इससे पहले विधि मुखर्जी ने अदालत में दिये अपने बयान से सबको चौंका दिया था. जिसमें 28 वर्षीय विधि ने कहा था कि जांच एजेंसियं के सामने उन्होंने कोई बयान दर्ज नहीं कराया था. सीबीआई चार्जशीट में शामिल दस्तावेज फर्जी हैं.

अपनी गवाही में क्या बोली विधि मुखर्जी?

गुरुवार को विधि ने अदालत में अपनी 2015 की गतिविधियों का ब्योरा देते हुए बताया कि , अगस्त 2015 में मां इंद्राणी मुखर्जी की गिरफ्तारी के बाद वो लंदन चली गईं. जब वो अक्टूबर में तीन दिनों के लिए लौटी तो उसे पूछताछ के लिए सीबीआई दफ्तर ले जाया गया.

क्या है शीना बोरा हत्याकांड?

24 अप्रैल साल 2012 की बात है. मुंबई के एक अमीर घर की बेटी शीना बोरा गायब हो जाती है. शीना बोरा उस समय मुंबई मेट्रो वन में सहायक प्रबंधक के रूप में कार्यरत थी. शीना बोरा इंद्राणी मुखर्जी की बेटी थीं और आखिरी बार उन्हें मुंबई में ही एक जगह पर देखा गया था. जिसके बाद उनके मंगेतर राहुल मुखर्जी और भाई मिखाइल बोरा ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. शुरुआत में पुलिस को शीना बोरा का कुछ पता नहीं चल पाया. पुलिस की पूछताछ में इंद्राणी ने बताया कि शीना अमेरिका चली गई है और उसने किसी को भी इस बारे में नहीं बताया है.

रायगढ़ के जंगलों में मिली अधजली लाश

इसके लगभग 10 दिनों के बाद महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के पेन गांव के जंगल में एक स्थानीय निवासी गणेश धेने को जंगल में एक लाश मिली. लाश अधजली अवस्था में थी. गणेश धेने पुलिस मित्र भी थे. उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी. पुलिस मौके पर आकर शव को कब्जे में लेकर शिनाख्त में जुट गई. लाश इतनी बुरी तरह जल चुकी थी कि उसकी पहचान नहीं हो सकी.

ऐसे खुला मामला?

फिर 3 सालों के बाद साल 2015 में 21 अगस्त के दिन मुंबई पुलिस ने इंद्राणी मुखर्जी के ड्राइवर को अवैध गन रखने के मामले में अरेस्ट कर लिया. पुलिस की पूछताछ में राय ने जो बताया उसने पूरे पुलिस महकमे को सकते में डाल दिया. राय ने बताया कि उसने इंद्राणी और उनके पूर्व पति संजीव खन्ना के साथ मिलकर शीना बोरा का गला घोंट कर उसे मौत के घाट उतार दिया था. राय ने बताया कि 24 अप्रैल 2012 को शीना की हत्या कर शव रायगढ़ के जंगलों में जला दिया.

पीटर मुखर्जी पर केस क्यों?

राय के बयान पर पुलिस ने 25 अगस्त 2015 को इंद्राणी मुखर्जी को उनके मुंबई स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद पुलिस संजीव खन्ना की तलाश में जुट गई. कुछ दिनों के बाद संजीव खन्ना को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से हिरासत में ले लिया गया. नवंबर 2015 में इंद्राणी मुखर्जी के तीसरे पति और स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी को भी गिरफ्तार कर लिया गया. पीटर पर भी शीना बोरा की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा था.

शीना बोरा इंद्राणी की बेटी थी बहन नहीं

इस दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ. पुलिस की पूछताछ में पता चला कि इंद्राणी मुखर्जी जिस शीना बोरा को सबसे अपनी बहन कहकर परिचय करवाती थीं. वो दरअसल उनकी बेटी थी. जो उनके पहले पति सिद्धार्थ दास से हुई थी. इंद्राणी 1986-1989 के बीच सिद्धार्थ के साथ रिश्ते में थी. उसी दौरान शीना बोरा का जन्म हुआ था.

राहुल और शीना के रिश्ते से नाराज थी इंद्राणी

साल 2006 में शीना बोरा मुंबई में इंद्राणी के पास आकर रहना शुरू कर दिया. इस दौरान शीना बोरा का इंद्राणी के पति पीटर मुखर्जी के बेटे राहुल मुखर्जी के साथ प्रेम संबंध शुरू हो गया. जब ये बात इंद्राणी मुखर्जी को पता चला तो उन्होंने इसका जोरदार विरोध किया. बताया जाता है कि यहीं कारण था कि शीना बोरा की हत्या की गई.

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जिंदा है शीना?

इस दौरान इंद्राणी मुखर्जी ने एक चौंकाने वाला दावा किया है. इंद्राणी ने अपनी किताब अनब्रोकेन: द अनटोल्ड स्टोरी में दावा किया कि शीना बोरा जिंदा हैं. वो आखिरी बार 2012 में गुवाहाटी हवाई अड्डे पर आखिरी बार देखी गई. उन्होंने अपनी किताब में ये दावा किया कि शीना कश्मीर में हो सकती हैं. हालांकि सीबीआई ने उनके इस दावे को खारिज कर दिया और उनपर शीना की हत्या के आरोपों को बरकरार रखा.

इस मामले में सुनवाई अभी भी जारी है. इंद्राणी, संजीव खन्ना और श्यामवर राय फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. जबकि पीटर मुखर्जी पर अभी भी हत्या का मामला दर्ज है. इस मामले में अबतक 60 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं. हालांकि इतने सालों बाद भी शीना बोरा की मौत की गुत्थी अभी भी उलझी हुई है.

– भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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