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JEE Main success story: भारत में जब भी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं का जिक्र होता है, तो UPSC के बाद IIT-JEE का नाम सबसे ऊपर आता है. हर साल 12 से 15 लाख युवा इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन मुट्ठी भर छात्रों को ही अपनी मनपसंद IIT में जाने का मौका मिल पाता है. उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से एक ऐसी सक्सेस स्टोरी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि अगर इरादे पक्के हों, तो गरीबी कभी सपनों के आड़े नहीं आ सकती. बरेली के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले अंश प्रताप सिंह (Ansh Pratap Singh) ने बिना किसी खास संसाधन के जेईई मेन जैसी मुश्किल परीक्षा में इतिहास रच दिया है.
अंश का बचपन अभावों और कड़े संघर्षों में बीता है. उनका परिवार एक कच्चे मकान में रहता है. अंश के पिता एक दिहाड़ी मजदूर हैं, जिन्हें दिन भर की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद कभी 200 तो कभी 500 रुपये की दिहाड़ी मिलती है. कई बार तो हालात इतने खराब होते हैं कि काम नहीं मिलता और उन्हें खाली हाथ ही घर लौटना पड़ता है. लेकिन इन तमाम मुश्किलों के बावजूद, अंश ने कभी गरीबी के आगे घुटने नहीं टेके.
बहुत कम उम्र में ही अंश को अपने परिवार की आर्थिक स्थिति का गहराई से अहसास हो गया था. इसलिए उन्होंने कभी अपने माता-पिता से पैसे या संसाधनों की मांग नहीं की. एक रिपोर्ट के अनुसार, जेईई मेन जैसी महंगी और कठिन परीक्षा की तैयारी के लिए अंश ने नई किताबें और स्टडी मटेरियल खरीदने के बजाय पुरानी किताबों से अपना काम चलाया. किताबें कहीं-कहीं से कटी और फटी हुई भी थीं, बावजूद इसके उन्होंने दिन-रात इन्हीं किताबों से पढ़ाई की और अपने सपनों को पंख देने की कोशिश में जुटे रहे.
अंश का सफर इतना आसान नहीं था. गरीबी और सीमित संसाधनों से जूझते हुए उन्होंने साल 2024 में पहली बार जेईई मेन्स की परीक्षा दी थी, लेकिन तब उनकी रैंक बहुत अच्छी नहीं आई और वे आईआईटी में एडमिशन पाने में असफल रहे. इसी कठिन दौर में कोटा के एक कोचिंग सेंटर से उन्हें 21,000 रुपये की स्कॉलरशिप मिली. अंश के लिए यह सिर्फ 21 हजार रुपये नहीं थे, बल्कि उनके टूटते सपनों को सच करने का एक जीवनदान था.
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कोटा कोचिंग से मिली सही गाइडेंस और अपनी अटूट मेहनत के दम पर अंश ने दूसरे अटेंप्ट में खुद को साबित कर दिया. साल 2025 के जेईई मेन रिजल्ट में उन्होंने 97.928 परसेंटाइल हासिल किए. पूरे देश में उन्हें 658वीं रैंक (AIR) प्राप्त हुई. आज अंश अपनी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद सुर्ख़ियों में छा गए हैं. दृढ़ संकल्प और हार न मानने के जज्बे से भरी उनकी यह कहानी उन लाखों युवाओं को मोटिवेट कर रही है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद आगे बढ़ने का सपना देखते हैं.
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