एजुकेशन

बिना कोचिंग के गाड़ा झंडा! CBSE में हासिल किए 500/500, मिलिए उस ऑल-राउंडर से जिसने तोड़ दिए टॉपर्स के सारे मिथक

CBSE 10th Topper 2026 Story: अक्सर भारतीय परिवारों में एक कथन काफी मशहूर है. बचपन से ही बच्चों को हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाता है, क्योंकि अगर बच्चा नहीं पढ़ेगा तो 10वीं में अच्छे नंबर नहीं आएंगे. अच्छे नंबर नहीं आएंगे तो अच्छा कॉलेज नहीं मिलेगा, और फिर आगे चलकर अच्छी नौकरी पाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा. हालांकि, इन पुरानी बातों से आगे बढ़कर एक छात्र ने CBSE 10वीं के रिजल्ट में बड़ा कारनामा कर दिखाया है. हम बात कर रहे हैं अमृतसर के रहने वाले मुदित जैन (Mudit Jain) की. मुदित ने 10वीं के रिजल्ट में 500 में से 500 अंक लाकर सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की 10वीं की परीक्षा में टॉप किया है.

बिना कोचिंग के हासिल किया टॉप रैंक

आज के समय में, जब छात्र शुरुआती कक्षाओं से ही महंगे कोचिंग संस्थानों और ट्यूशन पर निर्भर हो जाते हैं, मुदित ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया. उन्होंने अपनी सफलता केवल सेल्फ-स्टडी के बल पर हासिल की. न किसी कोचिंग का सहारा लिया और न ही बाहरी मार्गदर्शन पर निर्भर रहे. उनका मानना है कि स्कूल में पढ़ाया गया पाठ और खुद तैयार किए गए नोट्स ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बने. अनुशासन के साथ नियमित पढ़ाई और समय का सही उपयोग करते हुए उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की.

ऑल-राउंडर निकला टॉपर

मुदित की पहचान केवल शैक्षणिक सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ऑलराउंडर हैं. राष्ट्रीय स्तर के ओलंपियाड और मॉडल यूनाइटेड नेशंस (MUN) जैसी गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी उन्हें अलग पहचान देती है. इसके साथ ही, उनकी रुचि रोबोटिक्स और तकनीकी क्षेत्रों में भी गहरी है.


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सफलता में किसका रहा योगदान?

मुदित की इस उल्लेखनीय सफलता में उनके परिवार का अहम योगदान रहा है. उनकी मां, पारुल जैन, उसी विद्यालय में अंग्रेजी की अध्यापिका हैं जहां मुदित पढ़ता हैं, जिससे उन्हें घर और स्कूल दोनों जगह से सही मार्गदर्शन मिलता रहा. वहीं उनके पिता, रजनीश जैन, जो बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े हैं, बताते हैं कि मुदित भविष्य में एक उत्कृष्ट इंजीनियर बनने की इच्छा रखते हैं.

अमृतसर के श्री राम आश्रम स्कूल के छात्र मुदित ने यह दिखा दिया कि सफलता पाने के लिए सिर्फ लगातार पढ़ाई में डूबे रहना ही जरूरी नहीं, बल्कि संतुलित प्रयास और सही दिशा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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