भारतीय सूचना एवं प्रसारण संस्थान (IIMC) ने डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद एक नया इतिहास रचा है. संस्थान के पहले दीक्षांत समारोह में भारतीय सूचना सेवा (IIS) के ऑफिसर ट्रेनीज को पहली बार स्नातकोत्तर (मास्टर) की डिग्री प्रदान की गई.
समारोह को संबोधित करते हुए सूचना एवं प्रसारण (I&B) मंत्रालय के सचिव ने कहा कि आईआईएस अधिकारियों की भूमिका केवल सूचना का आदान-प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सरकारी नीतियों और जनता की आकांक्षाओं के बीच एक मजबूत व भरोसेमंद माध्यम हैं.
I&B सचिव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकारी संचार एक दोतरफा प्रक्रिया होनी चाहिए, जिसमें नागरिकों से मिलने वाला फीडबैक बेहद अहम भूमिका निभाता है.
उन्होंने कहा कि आज के दौर में भले ही खबरें पहुंचाने की गति (Speed) मायने रखती हो, लेकिन सूचना की सटीकता और विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता, क्योंकि सरकारी स्तर से जारी हर सूचना संस्थागत अधिकार लेकर आती है.
अधिकारियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि उनके हर काम के केंद्र में देश का आम और सबसे गरीब नागरिक होना चाहिए. अगर उनका काम किसी गरीब का जीवन आसान नहीं बना रहा, तो उन्हें अपनी कार्यशैली पर फिर से विचार करना चाहिए.
IIMC की कुलपति डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने पास आउट हो रहे ऑफिसर ट्रेनीज को बधाई देते हुए कहा कि केवल जानकारी देना ही संचार नहीं है, बल्कि सामने वाले तक सही समझ पहुंचाना असली संचार है.
उन्होंने कहा कि आईआईएस अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निष्पक्षता, स्पष्टता और संवेदनशीलता के साथ निभानी होगी. यह मास्टर डिग्री अधिकारियों के लिए लगातार सीखने और बदलते मीडिया परिदृश्य के साथ खुद को अपडेट रखने की याद दिलाती रहेगी.
इस ऐतिहासिक अवसर पर I&B मंत्रालय के अपर सचिव श्री प्रभात, संयुक्त सचिव श्री के. के. निराला, महानिदेशक एल. मधु नाग सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, आईआईएमसी के फैकल्टी मेंबर्स और ऑफिसर ट्रेनीज मौजूद रहे.
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-भारत एक्सप्रेस
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