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ममता का ‘खेला’ खत्म, बीजेपी का ‘गोल’ सफल! 80 हजार फुटबॉल और 5 हजार बैट ने कैसे पलट दी बंगाल की बाजी?

West Bengal Election Results: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे जैसे-जैसे बीजेपी के पक्ष में आ रहे हैं वैसे-वैसे बंगाल की राजनीतिक फिजाएं बदलती जा रही हैं. अभी काउंटिंग चल रही है, जिसमें बीजेपी भारी बहुमत से जीतती दिखाई दे रही है. बीजेपी जहां 192 सीटों पर आगे चल रही है, तो वहीं टीएमसी 97 सीटों पर बढ़त बनाए दिख रही है. बीजेपी की इस जीत पर कई केस स्टडी हो सकती है, लेकिन बीजेपी का एक राजनीतिक दांव पर इस समय काफी चर्चा हो रही है, वो है स्पोर्ट्स पॉलिटिक्स.

बीजेपी की इस जीत के पीछे फुटबॉल और क्रिकेट बैट की वो कौन सी कहानी है, जिसने पिछले 15 सालों से बंगाल में लगातार चली आ रही ममता सरकार को चारों खाने चित कर दिया. आइये जानते हैं.

बंगाल की धमनियों में बसता है क्रिकेट-फुटबॉल

पश्चिम बंगाल भारत के सबसे पूर्वी इलाके में पड़ता है. यहां के युवाओं में ना सिर्फ क्रिकेट बल्कि फुटबॉल का भी जबरदस्त क्रेज दिखाई देता है. साल 2021 के विधानसभा चुनाव में मिली हार ने बीजेपी को एक आईना दिखाने का काम किया. बीजेपी ये समझ चुकी थी कि सिर्फ आम आदमी के मुद्दे पर चुनाव लड़ने पर जीत नहीं मिल सकती, बंगाल में अगर अपनी ताकत बढ़ानी है तो युवाओं को जोड़ना होगा.

बीजेपी ने इसके लिए एक जबरदस्त स्ट्रेटजी अपनाई. उसने पश्चिम बंगाल के युवाओं की धमनियों में बह रहे क्रिकेट और फुटबॉल के क्रेज को अपनी राजनीति के केंद्र में रखी. पार्टी ने सूबे के स्थानीय क्लबों से लेकर बड़े खिलाड़ियों तक से संपर्क साधा और एक बेहतरीन प्लान तैयार किया.

स्थानीय क्रिकेट क्लबों से लेकर फुटबॉल तक में दिया सीधे दखल

बीजेपी ने बंगाल के गली-मोहल्लों से लेकर स्थानीय क्रिकेट और फुटबॉल क्लबों तक से संपर्क किया. अबतक इन्हें राज्य सरकार में रूल कर रही पार्टियां ही संरक्षण देती थीं, लेकिन वो उतना कारगर साबित नहीं होता दिख रहा था. बीजेपी ने इसका फायदा उठाया और बंगाल के युवाओं को फुटबॉल और क्रिकेट से जोड़ने का काम शुरू किया.

चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने पूरे बंगाल में मौजूद स्थानीय क्लबों को 5 हजार क्रिकेट बैट और 80,000 फुटबॉल बांटे. इसके जरिये बीजेपी की कोशिश रही कि वो राज्य के कोने-कोने में मौजूद युवाओं तक पहुंचे. जिसका फायदा आज बीजेपी को दिख रहा है.

स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी ने पहुंचाया बड़ा मैसेज

बीजेपी ने अपनी इस स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी के जरिये यह मैसेज पहुंचाने की कोशिश की कि वो राज्य के छोटे से छोटे स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों तक पर नजर रख रही है. जब एक छोटे से क्लब तक देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी पहुंची तो वहां के युवाओं में एक मैसेज क्लियर गया कि कोई ऐसी भी पार्टी है जो उनका भी ख्याल रख रही है.

इसके अलावा बीजेपी ने चुनाव से ठीक पहले पूरे बंगाल में नरेंद्र मोदी कप का आयोजन कराया. 7 दिनों तक चले इस टूर्नामेंट में पूरे सूबे के 18 हजार से ज्यादा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. इस टूर्नामेंट के जरिये बीजेपी ने 18 हजार परिवारों तक सीधे पहुंच बनाई.

नरेंद्र मोदी कप में महिलाओं को मिली भागीदारी

बीजेपी का पूरा फोकस महिला खिलाड़ियों पर भी रहा. नरेंद्र मोदी कप में 253 महिला फुटबॉल टीमों ने हिस्सा लिया था. इसके जरिये बीजेपी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वो राज्य की नारी शक्ति का भी उतना ही ध्यान रख रही है, जितना पुरुषों की. ऐसे में बीजेपी का यह चुनावी दांव उसे जबरदस्त ताकत दे गया.

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बीजेपी की इस स्पोर्ट्स पॉलिटिक्स ने पूरे सूबे के युवाओं में एक क्लियर मैसेज दे दिया कि कोई ऐसी भी पार्टी है जो उन युवा खिलाड़ियों का भी ख्याल कर रही है. आज इसका बीजेपी को फायदा मिलता दिख रहा है. 15 सालों से बंगाल की सत्ता पर सवार ममता बनर्जी की पार्टी आज अपनी आखिरी सांसें गिन रही है. आज बंगाल में बीजेपी प्रचंड बहुमत की तरफ बढ़ रही है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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