Bihar Election: भोजपुरी गायक और अभिनेता पवन सिंह ने जब राजनीति में कदम रखा था तो उनके प्रशंसकों को उम्मीद थी कि वह एक लंबी सियासी पारी खेलेंगे लेकिन जैसे ही उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने उन पर गंभीर आरोप लगाए और मामला सार्वजनिक हुआ तो पवन सिंह ने विधानसभा चुनाव से खुद को अलग कर लिया. उन्होंने साफ किया कि वह भाजपा के सिपाही बने रहेंगे लेकिन चुनाव नहीं लड़ेंगे.
पवन सिंह ने पहले आसनसोल लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की तैयारी की थी लेकिन महिला विरोधी गानों को लेकर विवाद के चलते उन्हें पीछे हटना पड़ा. इसके बाद उन्होंने काराकाट लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा लेकिन हार का सामना करना पड़ा. इस हार के बाद उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने की योजना बनाई थी लेकिन पत्नी के आरोपों के चलते उन्हें बैकफुट पर जाना पड़ा.
वहीं दूसरी ओर ज्योति सिंह ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. उनके पिता रामबाबू सिंह ने स्पष्ट किया कि ज्योति इस बार बिहार चुनाव जरूर लड़ेंगी. हालांकि अभी तक यह तय नहीं है कि वह किस पार्टी से और किस सीट से चुनाव लड़ेंगी लेकिन काराकाट विधानसभा सीट का नाम चर्चा में है. रामबाबू सिंह का कहना है कि ज्योति ने पहले पवन सिंह के लिए प्रचार किया था और तभी से उनका स्थानीय लोगों से जुड़ाव बन गया.
ज्योति सिंह और पवन सिंह के बीच विवाद का मामला कोर्ट में है. रामबाबू सिंह ने आरोप लगाया है कि पवन सिंह ने सुलह के सभी प्रयासों को नकार दिया. इस पारिवारिक विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है. हाल ही में ज्योति सिंह की जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर से मुलाकात हुई जिससे अटकलें तेज हो गई हैं कि वह जन सुराज की टिकट पर चुनाव लड़ सकती हैं.
पवन सिंह ने भले ही विधानसभा चुनाव से खुद को अलग कर लिया हो लेकिन सूत्रों का कहना है कि वह लोकसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं. बीजेपी उन्हें युवाओं और राजपूत वोटबैंक को साधने के लिए भविष्य में इस्तेमाल कर सकती है. फिलहाल वह राजनीतिक रूप से शांत हैं लेकिन यह शांति केवल अस्थायी माना जा रहा है.
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इस पूरे घटना ने बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है. जहां एक ओर पवन सिंह का सपना अधूरा रह गया है वहीं दूसरी तरफ उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने सियासी सफर की शुरुआत कर दी है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पवन सिंह फिर से चुनावी मैदान में लौटते हैं या ज्योति सिंह ही उनके राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाती हैं?
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-भारत एक्सप्रेस
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