सीएम योगी का नेहरू पर बड़ा हमला
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को चौरी-चौरा की ऐतिहासिक घटना का जिक्र करते हुए कांग्रेस और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा. चौरी-चौरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने 288 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. इसी मंच से उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े कई ऐतिहासिक संदर्भ भी सामने रखे.
नेहरू को लेकर क्या बोले योगी?
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस अक्सर जवाहरलाल नेहरू को एक प्रतिष्ठित वकील के रूप में पेश करती है, लेकिन चौरी-चौरा कांड के बाद की परिस्थितियों को देखें तो तस्वीर अलग दिखाई देती है. सीएम योगी आदित्यनाथ का आरोप था कि 4 फरवरी 1922 की घटना के बाद जब अंग्रेजी हुकूमत ने किसानों, मजदूरों और व्यापारियों समेत 172 लोगों को मृत्युदंड सुनाया, तब नेहरू उनकी कानूनी मदद के लिए आगे नहीं आए.
मालवीय ने निभाई बड़ी भूमिका
सीएम योगी ने कहा कि उस कठिन समय में पंडित मदन मोहन मालवीय ने क्रांतिकारियों का पक्ष संभाला. उन्होंने अदालत में प्रभावशाली ढंग से पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप 151 लोगों को फांसी की सजा से राहत मिल सकी. मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र निर्माण में मालवीय के योगदान को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया.
शहीदों के बलिदान को बताया अमूल्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि चौरी-चौरा के वीरों का त्याग भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का बेहद महत्वपूर्ण अध्याय है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन दांव पर लगाया, उनके बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता. ऐसे सेनानियों की स्मृति को संजोना और आने वाली पीढ़ियों तक उनकी कहानी पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है.
आंदोलन पर पड़ा था बड़ा असर
सीएम योगी ने कहा कि चौरी-चौरा की घटना का प्रभाव इतना व्यापक था कि कांग्रेस नेतृत्व ने अपना आंदोलन स्थगित करने का फैसला ले लिया. हालांकि, स्थानीय स्तर पर स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों का संघर्ष जारी रहा. उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई केवल बड़े नेताओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि गांव-गांव में सामान्य लोगों ने भी उसमें योगदान दिया.
गुलामी का कारण बताया सामाजिक विभाजन
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत लंबे समय तक इसलिए गुलाम रहा क्योंकि समाज कई हिस्सों में बंटा हुआ था. लोग आपसी विवादों और संघर्षों में उलझे रहते थे, जिसका फायदा विदेशी शक्तियों ने उठाया. उन्होंने कहा कि बाहरी शासकों ने इसी कमजोरी का लाभ लेकर देश पर नियंत्रण स्थापित किया और यहां की संपदा का दोहन किया.
21 शहीद क्रांतिकारियों को किया नमन
सीएम योगी आदित्यनाथ ने चौरी-चौरा प्रकरण में फांसी पाए 21 क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की. इनमें नजर अली, कोमल सिंह यादव, लाल मोहम्मद, बेगू तिवारी, अब्दुल्ला और श्याम सुंदर जैसे नाम शामिल थे. उन्होंने कहा कि इन वीरों की याद में निर्मित शहीद स्मारक और क्षेत्र में किए जा रहे विकास कार्य उनके सम्मान का प्रतीक हैं.
ओवरब्रिज का नाम शहीदों के नाम पर रखने का सुझाव
मुख्यमंत्री ने भोपा बाजार का भी जिक्र किया, जहां रेलवे लाइन की वजह से पहले लोगों को अक्सर जाम की समस्या का सामना करना पड़ता था. उन्होंने बताया कि अब ओवरब्रिज बनने से आवागमन काफी आसान हुआ है. सीएम योगी ने सुझाव दिया कि इस पुल का नाम ‘शहीद स्मारक ओवरब्रिज’ रखा जाए, ताकि लोगों को आजादी के सेनानियों की याद हमेशा बनी रहे.
दिनकर की पंक्तियों के साथ दिया संदेश
अपने भाषण के अंत में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की खातिर सर्वस्व न्योछावर करने वाले क्रांतिकारियों को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाना चाहिए. उन्होंने दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों से पहले 288 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाएं जनता को समर्पित करने पर प्रसन्नता भी व्यक्त की और कहा कि विकास तथा राष्ट्रभक्ति दोनों साथ-साथ आगे बढ़ने चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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