West Bengal Election 2026 Final Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का अंतिम परिणाम आखिरकार 24 घंटे के लंबे इंतज़ार और रोंगटे खड़े कर देने वाले सस्पेंस के बाद आज सामने आ गया. राजरहाट न्यूटाउन की वो आखिरी सीट (Bengal Rajarhat Seat result) जिसे टीएमसी अपनी जीत का ‘अंतिम किला’ मान रही थी, वहां भी भाजपा के पीयूष कनोडिया ने बाजी मार ली है.
बता दें कि 4 मई की सुबह शुरू हुई गिनती 5 मई की दोपहर तक चली और जब 18वें राउंड का आखिरी वोट गिना गया, तो टीएमसी के खेमे में सन्नाटा पसर गया. पीयूष कनोडिया ने महज 309 वोटों से टीएमसी के तापस चटर्जी को हराकर बंगाल की आखिरी सीट भी भाजपा की झोली में डाल दी.
राजरहाट का मुकाबला किसी रोमांचक फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा था. 17वें राउंड की गिनती पूरी होने तक टीएमसी के तापस चटर्जी 323 वोटों की मामूली बढ़त के साथ आगे चल रहे थे. टीएमसी कार्यकर्ता जश्न की तैयारी करने लगे थे, लेकिन 18वें राउंड के अंतिम बॉक्स खुलते ही पासा पूरी तरह पलट गया.
भाजपा के पीयूष कनोडिया को कुल 1,06,564 वोट मिले, जबकि तापस चटर्जी 1,06,255 वोट पर ही रुक गए. इस आखिरी क्षण के ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने भाजपा की जीत के आंकड़े को और भी शानदार बना दिया.
राजरहाट की इस अंतिम सीट पर जीत के साथ ही पश्चिम बंगाल में भाजपा का फाइनल स्कोरकार्ड अब 207 सीटों पर पहुँच गया है. यह 2021 की 77 सीटों से शुरू हुआ वो सफर है, जिसने आज ममता बनर्जी के 15 साल के साम्राज्य को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. 294 सीटों वाली विधानसभा में 200 का आंकड़ा पार करना भाजपा के लिए केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि बंगाल की जनता का वो ‘जनादेश’ है, जिसने हिंसा और सिंडिकेट राज को सिरे से नकार दिया है.
चुनाव आयोग के मुताबिक, राजरहाट सीट पर कुछ तकनीकी कारणों और बार-बार हुई रिकाउंटिंग की मांग की वजह से नतीजा 4 मई को घोषित नहीं हो सका था. 24 घंटे तक दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता काउंटिंग सेंटर के बाहर जमे रहे. आज दोपहर जब पीयूष कनोडिया की जीत का आधिकारिक एलान हुआ, तो भाजपा कार्यकर्ताओं ने इसे ‘ईश्वरीय न्याय’ करार दिया. इस जीत ने भाजपा की सीटों की संख्या को 206 से बढ़ाकर 207 कर दिया है, जबकि टीएमसी 80 के आंकड़े को छूने के लिए भी संघर्ष करती दिखी.
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राजरहाट की यह आखिरी जीत (Bengal Rajarhat Seat result) बंगाल के राजनीतिक बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक है. भवानीपुर में खुद ममता बनर्जी की हार और अब राजरहाट जैसे शहरी गढ़ में टीएमसी का सूपड़ा साफ होना यह बताता है कि ‘दीदी’ का जादू अब पूरी तरह उतर चुका है.
दरअसल पीयूष कनोडिया की इस जीत ने बंगाल फतह के उत्सव को दोगुना कर दिया है. अब दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सिर्फ एक ही चर्चा है कि ‘सोनार बांग्ला’ का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? 2026 का यह चुनाव भविष्य में ‘लोकतंत्र की सबसे बड़ी वापसी’ के तौर पर याद रखा जाएगा.
-भारत एक्सप्रेस
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