चुनाव

ममता का बंगाली कार्ड बनाम बीजेपी का हिंदी दांव! 50 विधानसभा सीटों पर छिड़ा सबसे बड़ा चुनावी घमासान, पढ़ें- EXPLAINER

Bengal Election Hindi Voters: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब एक महीने से भी कम समय बचा है. जिसको लेकर 294 सीटों वाले इस राज्य में राजनीतिक गतिविधियां अब अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं. भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मान रही है और संगठन से लेकर नेतृत्व स्तर तक तैयारी में जुटी है. हाल ही में चुने गए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव बड़ी चुनौती है. इसको लेकर बीजेपी की टॉप लीडरशिप से लेकर लोकल स्तर के नेता एड़ी-चोटी जोर लगाए हुए हैं.

चुनावी विमर्श में जहां एक ओर मुस्लिम वोटबैंक और घुसपैठ जैसे मुद्दे प्रमुखता से उभर रहे हैं, वहीं बीजेपी एक अन्य समीकरण पर भी नजर बनाए हुए है और वो हैं हिंदीभाषी मतदाता. राज्य की 50 से अधिक विधानसभा सीटों पर हिंदी बोलने वाले मतदाता हार-जीत के अंतर को प्रभावित करने का माद्दा रखते हैं.

इन इलाकों में हिंदीभाषी समुदाय की उपस्थिति चुनावी गणित को प्रभावित करती है, खासकर शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में. ऐसे में बीजेपी इन सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रही है.

बीजेपी इन्हीं हिंदी भाषियों को अपनी तरफ करने की कोशिश में है. इसको लेकर बीजेपी ने बिहार के 100 से ज्यादा नेताओं को बंगाल में तैनात किया है. जिसमें मंगल पांडेय और नितिन नवीन प्रमुख हैं.

ममता बनर्जी का बीजेपी पर आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल जीतने में नकाम होने पर बीजेपी बिहार के 4 जिलों और उत्तर बंगाल को तोड़कर एक अलग राज्य बनाने की साजिश कर रही है. ममता बनर्जी की नजर पश्चिम बंगाल में रहने वाले हिंदी भाषियों पर हैं.

ये हिंदी भाषी वो लोग हैं जो बिहार, यूपी, झारखंड जैसे राज्यों से आकर लोग यहां पर बस गए हैं. खासकर पश्चिम बंगाल के शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में इनकी आबादी सबसे ज्यादा है.

ममता बनर्जी ने अपने बिहारी नेताओं को इन इलाकों में वोटबैंक को अपनी तरफ मोड़ने में लगा रखा है. चुनाव भले ही पश्चिम बंगाल में है लेकिन इसमें लड़ाई बिहार बनाम बिहार की है.

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इन सीटों पर हिंदी भाषी रखते हैं ताकत

2011 की जनगणना के मुताबिक पश्चिम बंगाल में हिंदी बोलने वाले लोगों की जनसंख्या 63 लाख से ज्यादा थी. जिसमें से करीब 12 लाख लोग बिहार से हैं. जिसमें बिहार के कटिहार, अररिया और किशनगंज से आकर अधिकतर लोग बसे हुए हैं.

पश्चिम बंगाल में हिंदी भाषियों को हिंदुस्तानी कहा जाता है. जिनकी उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, मालता और कूच बिहार इलाके में अच्छी खासी तादाद है. इसके अलावा कोयलांचल इलाके में जिसमें दुर्गापुर, रानीपुर और आसनसोल में भी बिहार और झारखंड के लोगों की बड़ी संख्या है. पश्चिमी बंगाल के खड़गपुर, कोलकाता, 24 परगना और मेदनीपुर में भी दूसरे हिंदी भाषी राज्यों से आकर बसने वाले लोगों की काफी संख्या है. जो इन इलाकों में हार और जीत में बड़ी भूमिका निभाते हैं.

बिहारियों को बीजेपी दे सकती है मौका

बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बिहार के लोगों को मौका दे रही है. जिसमें आरा के अर्जुन सिंह, बिहार के बक्सर के संतोष पाठक, रितेश तिवारी जैसे प्रमुख हैं. जिस वजह से बीजेपी को इस चुनाव में काफी मदद मिल सकती है.

बंगाल में बिहारियों के साथ भेदभाव का आरोप

पश्चिम बंगाल में बिहार और अन्य हिंदी राज्यों से आये लोगों के साथ बुरे बर्ताव के आरोप लगते रहे हैं. इन्हें हिंदुस्तानी कहा जाता है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक हिंदी भाषियों को बंगाल में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उनको यहां पर फ्लैट खरीदने में, घर बनाने में और सीमेंट खरीदने में काफी मशक्कत करना पड़ता है. उन्हें रंगदारी भी देनी पड़ती है. कहा जाता है कि बिहारियों को दूध तक लेने पर भी पहले रंगदारी देनी पड़ती थी.

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ममता बनर्जी क्या कर रही हैं?

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी लगातार बंगाली बनाम बाहरी का मुद्दा उठा रही हैं. इसके बावजूद वो हिंदी भाषियों को रिझाने में काफी मशक्कत कर रही हैं. हाल ही में उन्होंने संस्कृत विश्वविद्यालय बनवाया है. इसके अलावा छठ पर्व को प्रमोट भी कर रही हैं.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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