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‘नोलन एक साल पहले डेट देते हैं…’ नागार्जुन ने टॉलीवुड की प्लानिंग पर उठाए तीखे सवाल

Nagarjun On Tollywood: दिग्गज कलाकार अक्किनेनी नागार्जुन ने टॉलीवुड इंडस्ट्री की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा करते हुए बड़ा सवाल उठाया है. बेटे अखिल अक्किनेनी की हालिया रिलीज फिल्म ‘लेनिन’ के इवेंट में पहुंचे नागार्जुन ने तेलुगु सिनेमा की सबसे बड़ी समस्या पर निशाना साधा. उन्होंने फिल्मों की बार-बार टलती रिलीज डेट और आखिरी वक्त तक चलने वाले पोस्ट-प्रोडक्शन कल्चर पर तीखे सवाल उठाए. उन्होंने हॉलीवुड का उदाहरण देते हुए पूछा कि जब वहां फिल्म की रिलीज डेट एक साल पहले तय हो सकती है, तो टॉलीवुड में ऐसा क्यों नहीं? उनके इस बयान ने अब इंडस्ट्री में नई बहस छेड़ दी है.

टॉलीवुड सुपरस्टार नागार्जुन ने कहा कि पोस्ट-प्रोडक्शन में देरी अब इंडस्ट्री की आदत बन चुकी है, जिसका असर फिल्म की क्वालिटी पर पड़ता है. यही कारण है कि रिलीज डेट टालने का ट्रेंड लगातार बढ़ रहा है. नागार्जुन ने साफ कहा कि इस कल्चर को बदलना ही होगा.

नागार्जुन का गुस्सा फूटा

अभिनेता ने टेक्नीशियन्स, डायरेक्टर्स और म्यूज़िक डायरेक्टर्स को खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने कहा, रिलीज़ से दो हफ्ते पहले फिल्म पोस्ट-प्रोडक्शन टीम के हाथ में होनी चाहिए, आखिरी मिनट में नहीं. उन्होंने साफ कहा कि जल्दबाजी में काम करने से फिल्म की क्वालिटी बिगड़ती है. नागार्जुन ने खुद को भी नहीं बख्शा. उन्होंने माना कि ‘लेनिन’ पर भी आखिरी वक्त तक काम चलता रहा और यह तरीका बदलना होगा.

नॉलन का दिया उदाहरण

हॉलीवुड का उदाहरण देते हुए नागार्जुन ने टॉलीवुड की प्लानिंग पर सवाल उठा दिए. उन्होंने क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’ का जिक्र करते हुए कहा, “उन्होंने एक साल पहले रिलीज़ डेट बता दी. हम ऐसा क्यों नहीं कर पाते? और अगर कर भी देते हैं, तो उसे टालना क्यों पड़ता है?” नागार्जुन ने कहा कि बार-बार रिलीज़ डेट बदलने से दर्शकों का भरोसा टूटता है और बिजनेस पर भी सीधा असर पड़ता है. उन्होंने पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि पहले फिल्मों की फाइनल कॉपी रिलीज से कई हफ्ते पहले ही तैयार हो जाती थी.

रिलीज़ से एक महीना पहले देख लेते थे फाइनल कॉपी

नागार्जुन ने अपनी फिल्म ‘लेनिन’ का उदाहरण भी दिया. उन्होंने माना कि तय तारीख पर फिल्म रिलीज़ नहीं हो पाई. वजह थी पोस्ट-प्रोडक्शन का अधूरा काम. उन्होंने कहा कि शूटिंग पूरी होने के बाद भी फिल्म को समय चाहिए होता है.

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उन्होंने पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि ‘निन्ने पेल्लाडाटा’ और ‘अन्नमय्या’ जैसी फिल्मों की फाइनल कॉपी रिलीज़ से एक महीने पहले ही तैयार हो जाती थी. उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले ऐसा हो सकता था, तो अब क्यों नहीं? नागार्जुन ने कहा कि सिनेमा की बेहतरी के लिए इंडस्ट्री को अपनी काम करने की प्रक्रिया बदलनी होगी.

(यह खबर सौम्या सिंह ने लिखी है. सौम्या भारत एक्सप्रेस में इंटर्न के रूप में काम कर रही हैं.)

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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