फैक्ट चेक

क्या बीजेपी की सख्ती के डर से बांग्लादेश भाग रहे हैं अवैध घुसपैठिए? जानें बॉर्डर की ओर बढ़ती भीड़ के वायरल वीडियो का सच

Fact Check: पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई सरकार बनने के बाद से ही राज्य की सियासत में जबरदस्त गर्माहट है. नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा अवैध घुसपैठियों को राज्य छोड़ने की चेतावनी दिए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया पर बंगाल से जुड़ी कई खबरें और वीडियो तैर रहे हैं. इसी बीच इंटरनेट पर एक वीडियो आग की तरह फैल रहा है, जिससे दावा किया जा रहा है कि बीजेपी सरकार की सख्ती और कार्रवाई के डर से लाखों संदिग्ध अवैध घुसपैठिए पश्चिम बंगाल के हकीमपुर बॉर्डर के रास्ते वापस बांग्लादेश भाग रहे हैं. लेकिन इस वीडियो की असल सच्चाई कुछ और ही है.

क्या है सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा?

दरअसल, फेसबुक और एक्स पर इस वीडियो को एक खास एंगल से पोस्ट किया जा रहा है. पोस्ट के कैप्शन में लिखा जा रहा है, ‘बांग्लादेश सीमा से लगे हकीमपुर बॉर्डर इलाके की ओर हजारों संदिग्ध अवैध घुसपैठियों के बढ़ने की खबरों ने देशभर में सीमा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है.’ कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी दावा किया गया था कि नई सरकार के एक्शन के बाद बॉर्डर पर संदिग्धों की भीड़ जुटने लगी है, जिसके बाद लोगों ने इस वीडियो को मौजूदा हालात का असली सबूत मान लिया.

पड़ताल में खुला सच

जब इस वीडियो की बारीकी से पड़ताल की गई, तो इसकी असल सच्चाई सामने आ गई. ये वीडियो न तो हकीमपुर बॉर्डर का है और न ही इसका अवैध घुसपैठियों के पलायन से कोई लेना-देना है. असल में, ये वीडियो पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में आयोजित हुए एक धार्मिक आयोजन का है, जो चुनाव के नतीजे आने से महीनों पहले ही रिकॉर्ड किया गया था.

इंटरनेट पर सर्च करने के दौरान पता चला कि हुगली जिले के पुइनान गांव में इसी साल 2 जनवरी से 5 जनवरी 2026 के बीच ‘बिस्वा इज्तिमा’ (एक इस्लामी धार्मिक सभा) का आयोजन किया गया था. ये भीड़ उसी इज्तिमा में शामिल होने आए श्रद्धालुओं की थी, जो कार्यक्रम खत्म होने के बाद वापस लौट रहे थे.

कब का है ये वीडियो

बता दें कि इस वीडियो को 5 जनवरी 2026 को पहली बार सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया था. वहीं, जानकारी के अनुसार पहली बार अपलोड करने वाले शख्स ने इस बात की भी पुष्टि की कि ये वीडियो पूरी तरह से असली है, लेकिन इसके साथ जो दावा किया जा रहा है वो बिल्कुल फर्जी है. ये भीड़ बिस्वा इज्तिमा से लौट रहे लोगों की है. शख्स ने इस वीडियो को पश्चिम बंगाल के सिंगुर के पास हाईवे से सटे अमीरा मोड़ के नजदीक फिल्माया था.

वहीं, तकनीकी जांच और गूगल स्ट्रीट व्यू की मदद से जब उस हाईवे और अमीरा मोड़ के लैंडमार्क्स (नेविगेशन पॉइंट) का मिलान किया गया, तो ये बात बिल्कुल सच साबित हुई.

इस जांच से ये साफ हो जाता है कि हुगली में जनवरी 2026 में हुए धार्मिक इज्तिमा के पुराने वीडियो को गलत संदर्भ में फैलाया जा रहा है. इसका मौजूदा राजनीतिक हालातों या बांग्लादेशी प्रवासियों के पलायन से कोई संबंध नहीं है.

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-भारत एक्सप्रेस 

Vaibhav Gupta

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