सोशल मीडिया के दौर में खबरें आग की तरह फैलती हैं, लेकिन अक्सर इस आग में ‘सच’ झुलस जाता है. हाल ही में 4 मई 2026 को आए पांच राज्यों के चुनावी नतीजों, खासकर पश्चिम बंगाल (West Bengal Result) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद इंटरनेट पर दावों की बाढ़ आ गई है. इनमें से एक वीडियो सबसे ज्यादा चर्चा में है, जिसमें लोगों की एक भारी भीड़ अपना सामान लेकर कहीं जाती हुई दिख रही है.
दावा किया जा रहा है कि बंगाल चुनाव के नतीजे आते ही रोहिंग्या मुसलमान डर के मारे अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर बांग्लादेश भागने लगे हैं. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? जब हमने इस वीडियो की तह तक जाने की कोशिश की, तो हकीकत कुछ और ही निकली.
अब एक्स से लेकर फेसबुक तक, कई यूजर्स एक वीडियो शेयर कर रहे हैं. इस वीडियो में सैकड़ों लोग सिर पर टोपी पहने, हाथों में पोटलियां और सामान लिए एक अस्थायी लकड़ी के पुल से नाव पर सवार होने की जद्दोजहद कर रहे हैं. इस वीडियो को कई लोगों ने शेयर करते हुए लिखा- ‘बंगाल के चुनाव परिणाम आते ही सारे रोहिंग्या बोरिया-बिस्तर बांधकर बांग्लादेश के लिए निकलने लगे!’
जब इस वीडियो की बारीकी से जांच की गई और इसके की-फ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज सर्च के जरिए खंगाला गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. ये वीडियो न तो नया है और न ही इसका भारत या पश्चिम बंगाल के चुनावों से कोई लेना-देना है.
बता दें कि ये वीडियो इंटरनेट पर नवंबर 2025 से ही मौजूद है. यानी बंगाल चुनाव के नतीजों से महीनों पहले का है, जो बंग्लादेश के बारिसल जिले का है. वहां ‘चार्मोनई दरबार शरीफ’ में हर साल एक बड़ी धार्मिक सभा होती है, जिसे ‘चार्मोनई महफिल’ कहा जाता है.
इसके अलावा, वीडियो में दिख रही भीड़ दरअसल उन श्रद्धालुओं की है, जो इस महफिल के खत्म होने के बाद अपने घरों को लौटने के लिए अल-करीम जामे मस्जिद के पास एक नाव (लॉन्च) पर सवार हो रहे थे.
इस जांच से ये साफ हो गया है कि बांग्लादेश की एक धार्मिक सभा के पुराने वीडियो को पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद रोहिंग्याओं के बड़े पैमाने पर पलायन का ये दावा पूरी तरह फर्जी और निराधार है. इसलिए ऐसे किसी भी वीडियो, पोस्ट या फोटो पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें.
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-भारत एक्सप्रेस
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