Akhilesh Yadav Meet Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 15 साल बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है. 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) मात्र 80 सीटों पर सिमट गई है. इस करारी हार के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बुधवार को निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने कोलकाता पहुंच रहे हैं.
चुनाव नतीजों के बाद यह किसी भी प्रमुख विपक्षी दल के नेता का पहला बंगाल दौरा है. मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अखिलेश मंगलवार को ही आना चाहते थे, लेकिन उन्होंने उन्हें बुधवार को बुलाया है.
भले ही अखिलेश यादव बंगाल चुनाव प्रचार से पूरी तरह दूर रहे, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए लगातार ममता बनर्जी का समर्थन किया. इस दौरे को सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं माना जा रहा है. ममता ने खुद को अब ‘आजाद पंछी’ और ‘आम आदमी’ बताते हुए स्पष्ट किया है कि कुर्सी न होने के बावजूद वे बिना पद के लोगों की सेवा करेंगी और उनका मुख्य लक्ष्य INDIA गठबंधन को मजबूत करना है.
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सियासी जानकारों के अनुसार, अखिलेश पिछले 9 साल से सत्ता से बाहर हैं और ममता ने कई मौकों पर उनकी मदद की है. 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी अखिलेश के लिए प्रचार करने लखनऊ आई थीं. वहीं, अखिलेश ने भी ममता के कहने पर भदोही की लोकसभा सीट टीएमसी को दी थी. यह मुलाकात उसी राजनीतिक वफादारी को निभाने का संकेत है.
नतीजे आने के बाद अखिलेश यादव ने X (पूर्व में ट्विटर) पर तीन अहम पोस्ट किए. उन्होंने बीजेपी की जीत को फरेब बताया है. अखिलेश यादव ने पोस्ट कर लिया कि हर फरेबी फतह की एक मियाद होती है, ये बात ही ‘सच्चाई की बुनियाद’ होती है.
ममता बनर्जी के साथ सीआरपीएफ की कथित धक्का-मुक्की का वीडियो शेयर करते हुए अखिलेश ने बंगाल चुनाव में मतगणना के दौरान केंद्रीय बलों के दुरुपयोग का आरोप लगाया. उन्होंने इसकी तुलना 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव और 2024 के फर्रुखाबाद लोकसभा चुनाव में हुए कथित घपले से की. उन्होंने व्यंग्य किया कि जब परिणाम मनमर्जी से निकाले गए हैं, तो भाजपा की परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री भी पर्ची निकालकर मनमर्जी से ही बनेगा.
कोलकाता रवानगी से पहले अखिलेश यादव ने लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है. उनका दावा है कि यूपी में सपा के ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट भाजपा के पास नहीं है और इसी वजह से भाजपा बौखलाई हुई है.
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सपा प्रमुख ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग करते हुए कहा कि पहले जातीय जनगणना होनी चाहिए और फिर आबादी के अनुपात में आरक्षण की व्यवस्था लागू होनी चाहिए. उन्होंने कार्यकर्ताओं को नसीहत दी है कि वे भाजपा के ‘छलकपट’ से निपटने के लिए वोटर लिस्ट पर पैनी नजर रखें ताकि कोई हेराफेरी न हो सके.
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