Health awareness
Health awareness :भारत में मोटापा अब एक गंभीर बीमारी का रूप धारण करता जा रहा है. 1990 में इसकी दर 9 से 10 प्रतिशत थी लेकिन आज 2025 में यह दर दोगुनी यानी 20 से 23 प्रतिशत पहुंच गई है. इस तरह पूरे देश में यह बीमारी लगातार बढ़ती जा रही है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार मोटापा शरीर में जरूरत से ज्यादा वसा का जमाव है जो सेहत के लिए काफी हानिकारक है. इसे मापने के लिए बॉडी मास इंडेक्स का इस्तेमाल होता है. भारत में 23 से ऊपर BMI होने पर व्यक्ति को ओवरवेट और BMI 25 से ज्यादा होने पर मोटा (Obese) माना जाता है. भारत में 24 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष मोटापे के शिकार हैं और बच्चों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसके कारण व्यक्ति तमाम बीमारियों से ग्रस्त होते जा रहे हैं और लोगों की औसत आयु भी कम हो रही है.
मोटापा बढ़ने के कई कारण हैं जिनमें मुख्य रूप से तेलयुक्त भोजन, प्रोसेस्ड और जंक फूड का ज्यादा सेवन करना. साथ ही शुगर, मिठाइयां, चावल, आलू का अत्यधिक सेवन करना भी एक महत्वपूर्ण कारण है. आजकल जीवनचर्या में तेल का उपयोग काफी बढ़ गया है और इसकी शुद्धता की भी कोई गारंटी नहीं है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारत में लगातार बढ़ रहे मोटापे को लेकर चिंता जताई है. प्रधानमंत्री ने लाल किले से दिए अपने संबोधन में कहा कि मोटापे से बचने के लिए कई तरह के प्रयास जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि सबसे पहले परिवार यह तय करे कि आप जो तेल भोजन के लिए घर लाते हैं उसमें कम से कम 10 प्रतिशत की कमी कर के घर लाएं. ज्यादा तेल मोटापे के खतरे को तेजी से बढ़ा सकता है.
प्रधानमंत्री मोदी ने देश में बढ़ रहे मोटापे के प्रति लोगों को आगाह किया कि आने वाले समय में यह खतरे की घंटी जैसा है. पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि अगर समय रहते लोग सावधान नहीं हुए तो आने वाले समय में हर तीसरा व्यक्ति मोटापे का शिकार हो सकता है. इसीलिए हम सबको इस समस्या को बढ़ने से रोकना होगा. कहीं ये समस्या विकराल रूप धारण न कर सके.
इंडियन वेजिटेबल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के मुताबिक 1990 में देश में प्रति व्यक्ति खाने वाले तेल की औसत खपत 3.5 लीटर प्रति वर्ष थी. सन 2025 में यह बढ़कर 19 से 20 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष हो गई यानी 1.6 लीटर से 1.7 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति माह है. यानी पिछले 30 वर्षों में यह वृद्धि लगभग 5 गुना बढ़ गई. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार एक स्वस्थ्य व्यक्ति के लिए प्रति माह आधा लीटर पर्याप्त मात्रा है. इसके अधिक सेवन से मोटापा, हृदयरोग, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.
शहरी क्षेत्रों में मोटापे का मुख्य कारण जीवनशैली और खान पान है. महानगरों में लंबी ऑफिस की दिनचर्या, घटती चलने की आदत, प्रोसेस्ड, तेल युक्त उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन टाटा शारीरिक गतिविधियों में कमी भी वजन बढ़ाने में शामिल है.
– भारत एक्सप्रेस
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