Indian Freedom Struggle: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखने वाले दादा भाई नौरोजी ऐसे राजनेता थे जिनके आदर्शों और महान विचारों से प्रभावित होकर देशवासियों ने उन्हें भारत का ग्रैंड ओल्ड मैन, भारतीय अर्थशास्त्र के जनक और आर्थिक राष्ट्रवाद के जनक की उपाधि दी. नौरोजी ने न सिर्फ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तीन बार अध्यक्ष भी रहे, जिन्होंने स्वराज की मांग की.
वह आजादी की नींव रखने वाले उन विचारकों में से थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ तर्क, आंकड़े और आत्मसम्मान के साथ संघर्ष किया. उन्होंने शिक्षा से लेकर संसदीय राजनीति और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना तक, हर मोर्चे पर नेतृत्व किया. उनका दिल हमेशा भारत के लिए धड़कता रहा. उन्होंने बताया कि भारत कैसे गुलाम है और उसका आर्थिक पक्ष क्या है?
1867 से 1880 के बीच उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य की राजधानी लंदन में अपने शोध पत्रों और सांख्यिकीय गणनाओं से दिखाया कि भारत को किस प्रकार खोखला किया जा रहा है और ब्रिटेन की प्रजा के रूप में एक आम भारतीय का जीवन किस प्रकार कष्ट में डाल दिया गया है. इतना ही नहीं नौरोजी दुनिया के उन पहले बुद्धिजीवियों में थे जिन्होंने उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद की गंभीर विवेचना अपनी किताबों में की. लेनिन और दूसरे विद्वानों से पहले. उन्होंने उपनिवेशवाद और भारत मे अंग्रेजी राज की पोल अपनी विश्व प्रसिद्ध कृति Drain of wealth थ्योरी से खोल दी. अंग्रेजी राज कभी नौरोजी की थ्योरी से पार नहीं पा सका. उनकी आर्थिक विवेचना भारतीय राष्ट्रवाद और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की बुनियाद बना. नौरोजी और उन पर आधारित आर्थिक राष्ट्रवाद के अध्ययन के लिए प्रोफेसर बिपिन चन्द्र की पीएचडी थीसिस किताब The rise and growth of economic nationalism in india एक मील का पत्थर माने जाने वाली किताब है. इतिहास के शोधार्थियों को यह किताब जरूर देखनी चाहिए जिससे उन्हें अंदाजा हो सके कि वास्तविक शोध क्या होता है.
दादा भाई नौरोजी केवल 25 वर्ष की आयु में एलफिनस्टोन इंस्टीट्यूट में लीडिंग प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त होने वाले पहले भारतीय बने. 1865 में, नौरोजी ने लंदन इंडियन सोसायटी की आधारशिला रखी, जिसका उद्देश्य भारतीय राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक विषयों पर चर्चा करना था. 1861 में नौरोजी ने मुनर्जी होर्मुसजी कामा के साथ यूरोप के द जोरास्ट्रियन ट्रस्ट फंड की स्थापना की. 1867 में उन्होंने ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना में मदद की, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्ववर्ती संगठनों में से एक था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश जनता के सामने भारतीय दृष्टिकोण को सामने रखना था.
एसोसिएशन ने लंदन के नृवंशविज्ञान सोसायटी द्वारा प्रचार का प्रतिकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने 1866 में अपने सत्र में, यूरोपीय लोगों को एशियाई लोगों की हीनता साबित करने की कोशिश की थी. इस एसोसिएशन ने जल्द ही प्रख्यात अंग्रेजों का समर्थन हासिल कर लिया और ब्रिटिश संसद में काफी प्रभाव डालने में सफल रहे. 1867 में उन्होंने ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की स्थापना में मदद की, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्ववर्ती संगठनों में से एक था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश जनता के सामने भारतीय दृष्टिकोण को सामने रखना था. एसोसिएशन ने लंदन के नृवंशविज्ञान सोसायटी द्वारा प्रचार का प्रतिकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने 1866 में अपने सत्र में, यूरोपीय लोगों को एशियाई लोगों की हीनता साबित करने की कोशिश की थी. इस एसोसिएशन ने जल्द ही प्रख्यात अंग्रेजों का समर्थन हासिल कर लिया और ब्रिटिश संसद में काफी प्रभाव डालने में सफल रहे.
1874 में, वह बड़ौदा के प्रधानमंत्री बने और बंबई विधान परिषद (1885-88) के सदस्य थे. वह भारतीय राष्ट्रीय संघ के सदस्य भी थे, जो बंबई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से कुछ साल पहले सर सुरेंद्रनाथ बनर्जी द्वारा स्थापित किया गया था. 1892 के आम चुनाव में फिन्सबरी सेंट्रल में लिबरल पार्टी के लिए चुने गए, वे पहले ब्रिटिश भारतीय सांसद थे.
1906 में, नौरोजी को फिर से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया. नौरोजी कांग्रेस के भीतर एक कट्टरपंथी उदारवादी थे, इस चरण के दौरान जब पार्टी में राय नरमपंथियों और अतिवादियों के बीच विभाजित थी.
दादाभाई नौरोजी, अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में अंग्रेजों द्वारा भारत के बेकसूर लोगों पर अत्याचार करने और उनके शोषण पर लेख लिखा करते थे. इसके अलावा वे इस विषय पर भाषण दिया करते थे.
30 जून, 1917 को 91 साल की उम्र में भारत के इस महान स्वतंत्रता सेनानी ने अपनी अंतिम सांस बंबई (अब मुंबई) में ली.
ये भी पढ़ें: GST में बड़ी राहत, अब घर और कारोबार दोनों में होंगे फायदे
दिल्ली हाई कोर्ट ने कैश कांड मामले में घिरे इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस…
Ali Ahmed Convoy Stopped In Kaushambi: माफिया अतीक अहमद के दूसरे नंबर के बेटे अली…
UP Assembly Election 2027: लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में एटा और कासगंज के…
दिल्ली हाई कोर्ट ने मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड मामले में आरोपी व मालिक…
Anil Vij reaction to Rahul Gandhi: हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने राहुल गांधी…
Ayurveda Ahar Guidelines: आयुष मंत्रालय ने 'आयुर्वेद आहार' को बढ़ावा देने के लिए परंपरा, सही…