पटना: बिहार की राजनीति में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर सियासी बयानबाजी तेज होती जा रही है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य अब्दुल बारी सिद्दीकी ने इस पूरे मामले में बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि सरकार छात्रों की आवाज सुनने के बजाय आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है और अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए अलग-अलग दावे कर रही है.
गुरुवार को विधानमंडल परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिद्दीकी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों के साथ बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा कि जो सरकार छात्रों पर लाठी चलाती है, उसे अपनी कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. उनके अनुसार, किसी भी विरोध प्रदर्शन का जवाब संवाद से दिया जाना चाहिए, न कि सख्ती से.
सिद्दीकी ने सरकार के उस बयान पर भी सवाल खड़े किए जिसमें कहा गया था कि प्रदर्शन में छात्र शामिल नहीं थे. उन्होंने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताया. राजद नेता ने कहा कि जिन लोगों को कोतवाली समेत अन्य जगहों से हिरासत में लिया गया, उनकी पहचान और अन्य विवरण सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं. ऐसे में यह कहना कि आंदोलन में छात्र मौजूद ही नहीं थे, वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता.
बातचीत के दौरान सिद्दीकी ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र आंदोलनों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. उन्होंने याद दिलाया कि बिहार की राजनीति में छात्र आंदोलनों की हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उनके मुताबिक, राज्य के इतिहास में कई बड़े राजनीतिक बदलाव ऐसे आंदोलनों से जुड़े रहे हैं और इस विरासत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
राजद नेता का दावा है कि दिल्ली और पटना में चल रहे विरोध प्रदर्शन पूरी तरह छात्रों की पहल पर हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों के पीछे किसी राजनीतिक दल की भूमिका नहीं है. उनके अनुसार, छात्र अपने भविष्य, अधिकारों और विभिन्न मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरे हैं. ऐसे में सरकार को उनकी चिंताओं को समझने की जरूरत है, न कि उनकी आवाज को दबाने की.
सिद्दीकी ने वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि उस दौर के आंदोलन ने देश और बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने का काम किया था. उनका मानना है कि आज भी युवा समाज में परिवर्तन की ताकत बन सकते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सत्ता के प्रभाव में युवाओं की समस्याओं और उनके अधिकारों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रही है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.
हालांकि, सिद्दीकी ने यह भी माना कि पूरे घटनाक्रम के दौरान कुछ नेताओं की भूमिका से माहौल और अधिक तनावपूर्ण हुआ है. उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सभी पक्षों को जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए. अंत में उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाए और किसी भी विवाद का समाधान बल प्रयोग के बजाय बातचीत और लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से निकाला जाए. उनका कहना है कि यही रास्ता छात्रों के हित में भी होगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी मजबूत करेगा.
यह भी पढ़ें-कौन है वो शख्स जिसने सीएम योगी को खून से लिखा पत्र? कर दी यह बड़ी मांग
-भारत एक्सप्रेस
दशहरा 2026 में 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा या 21 अक्टूबर को? दशमी तिथि दो…
Reliance Reply To Musk: स्टारलिंक के साथ उपजे विवाद पर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इलॉन मस्क…
Durga Puja 2026: बंगाल की दुर्गा पूजा में बिल्व निमंत्रण और अकाल बोधन का विशेष…
Kamchatka Earthquake: रूस के कामचटका में शुक्रवार को 7 तीव्रता का भूकंप आया. यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल…
Indian Census Analysis: हरेन्द्र प्रताप की पुस्तक 1961 से 2011 तक की जनगणना के आधार…
राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय यूथ कांग्रेस, NSUI और सेवादल…