झारखंड की सियासत में बसंत पंचमी का दिन भारतीय जनता पार्टी के लिए नई ऊर्जा और नई जिम्मेदारी लेकर आया है. रांची स्थित प्रदेश बीजेपी मुख्यालय में आज भारी गहमागहमी देखने को मिली, जब सांसद आदित्य साहू ने आधिकारिक तौर पर झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी संभाली. 14 जनवरी को निर्वाचित होने के बाद, उन्होंने आज शुभ मुहूर्त में पूरे विधि-विधान और पूजा-पाठ के साथ अपना पदभार ग्रहण किया.
इस खास मौके पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और अब नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे बाबूलाल मरांडी खुद मौजूद थे. उन्होंने बड़े ही सौहार्दपूर्ण माहौल में आदित्य साहू को अध्यक्ष की कुर्सी पर बिठाया और उन्हें नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं. पदभार संभालते ही आदित्य साहू काफी भावुक और संकल्पित नजर आए. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मेरी बस एक ही कोशिश रहेगी कि मेरे कार्यकाल में कोई ऐसा काम न हो जिससे पार्टी की साख या छवि पर कोई आंच आए.” कार्यकर्ताओं के बीच उनके इस बयान को संगठन के प्रति उनकी निष्ठा के रूप में देखा जा रहा है.
वहीं दूसरी ओर, पद छोड़ने के बाद बाबूलाल मरांडी ने भी मुख्यालय में ही बने ‘नेता प्रतिपक्ष’ के चेंबर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. जब उनसे नई कमेटी के गठन को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए गेंद नए अध्यक्ष के पाले में डाल दी और कहा कि अब संगठन का विस्तार करना आदित्य साहू की जिम्मेदारी है.
कार्यक्रम की रौनक के बीच पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश के बयानों ने सियासी पारा गरमा दिया. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विदेश यात्रा पर कड़ा तंज कसते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ रही हैं, उद्योगपति डरे हुए हैं और पलायन को मजबूर हैं, लेकिन सूबे के मुखिया अपने परिवार और अफसरों के साथ विदेश में छुट्टियां बिता रहे हैं.
लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाला बयान उन्होंने ‘झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स’ को लेकर दिया. दीपक प्रकाश ने चैंबर की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जमशेदपुर में एक कारोबारी के बेटे का अपहरण हो गया है, करोड़ों की रंगदारी मांगी जा रही है और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है. ऐसे समय में चैंबर को सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना चाहिए था, लेकिन विडंबना देखिए कि चैंबर के पदाधिकारी मुख्यमंत्री के साथ विदेश यात्रा का आनंद ले रहे हैं.
सियासी जानकारों की मानें तो दीपक प्रकाश का यह गुस्सा बेवजह नहीं है. दरअसल, झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स को परंपरागत रूप से बीजेपी का समर्थक माना जाता रहा है. लेकिन हाल के दिनों में जिस तरह से चैंबर और हेमंत सरकार के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं, उसने बीजेपी की पेशानी पर बल ला दिए हैं. बीजेपी को डर है कि अगर व्यापारी वर्ग का साथ इसी तरह छिटकता रहा, तो आने वाले निकाय चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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