देश

Manipur में जारी हिंसा के बीच 6 पुलिस थाना क्षेत्रों में फिर से लगाया गया AFSPA

मणिपुर के घाटी क्षेत्रों के 6 पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के तहत ‘अशांत क्षेत्र’ अधिसूचना फिर से लागू कर दी गई है. राज्य में चल रहे जातीय संघर्ष के लगभग 19 महीने बाद यह अधिसूचना जारी की गई है.

गृह मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी एक अधिसूचना में, ‘अशांत क्षेत्र’ की स्थिति – जो राज्य के मेईतेई-बहुल घाटी क्षेत्रों में 19 पुलिस स्टेशनों को छोड़कर पूरे मणिपुर के लिए लागू थी – अब इम्फाल पश्चिम में सेकमाई और लामसांग पुलिस स्टेशनों, इम्फाल पूर्व में लामलाई, बिष्णुपुर में मोइरांग, कांगपोकपी में लेइमाखोंग और जिरीबाम पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र तक बढ़ा दी गई है.

सशस्त्र बलों को शक्ति

अन्य बातों के अलावा, यह अधिनियम सशस्त्र बलों के किसी अधिकारी को ‘किसी भी व्यक्ति जो किसी कानून या आदेश का उल्लंघन कर रहा है’ के खिलाफ ‘गोली चलाने या बल प्रयोग करने, यहां तक ​​कि मौत का कारण बनने तक’ का अधिकार देता है, अगर उनकी राय में ऐसा करना आवश्यक है. इस अधिनियम के तहत काम करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना मुकदमा चलाने की भी अनुमति नहीं देता है.


ये भी पढ़ें: वक्फ संपत्तियों का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए किया जाएगा: किरेन रिजिजू


गृह मंत्रालय ने क्या कहा

अधिसूचना में गृह मंत्रालय ने कहा कि मणिपुर में स्थिति की समीक्षा में पाया गया कि स्थिति अभी भी ‘अस्थिर’ बनी हुई है और ‘विष्णुपुर-चुराचांदपुर, इंफाल ईस्ट-कांगपोकपी-इंफाल वेस्ट और जिरीबाम जिलों के सीमांत क्षेत्रों में हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है.’ इसमें यह भी कहा गया है कि इनमें से कई घटनाओं में, ‘हिंसा के जघन्य कृत्यों में विद्रोही समूहों की सक्रिय भागीदारी’ के उदाहरण सामने आए हैं.

1980 से अशांत क्षेत्र का दर्जा

मणिपुर को 1980 से ही AFSPA के तहत ‘अशांत क्षेत्र’ का दर्जा प्राप्त है और इसे 2004 में 32 वर्षीय थांगजाम मनोरमा की हत्या के बाद हुए कड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद इंफाल के कुछ हिस्सों से वापस ले लिया गया था.

2022 से ‘अशांत क्षेत्र’ के रूप में अधिसूचित क्षेत्रों को क्रमिक रूप से कम किया गया है और 1 अप्रैल 2023 से इसे 19 पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र से हटा दिया गया है, जो सभी राज्य की मेईतेई-बहुल घाटी में स्थित हैं. इसके तुरंत बाद 3 मई 2023 को राज्य में जातीय संघर्ष भड़क उठा.

‘अशांत क्षेत्र’ अधिसूचना छह महीने की अवधि के लिए लागू होती है, जिसके बाद स्थिति का आकलन करने के बाद गृह मंत्रालय द्वारा इसे समय-समय पर बढ़ाया जा सकता है.

-भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

Recent Posts

भगवा जागरण: उत्तर प्रदेश मंडल की राजनीति से कमंडल के दबदबे तक कैसे पहुंचा

Saffron Politics In UP: उत्तर प्रदेश तब बदला, जब जाति आधारित राजनीति सत्ता की एकमात्र…

4 minutes ago

बीजेपी की नई टीम का चरणबद्ध बदलाव, पुराने दिग्गजों की हुई दमदार वापसी

BJP New National Team: बीजेपी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों में हाल में किए गए फेरबदल को…

18 minutes ago

आखिर क्यों हादसों का हाईवे माना जाता है यमुना एक्सप्रसवे?

यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा है. ग्रेटर नोएडा में बस आग…

37 minutes ago

क्या है बीजेपी की नई यूपी रणनीति? लखनऊ से लेकर बूथ तक ऐसे बिछ रहा है चुनावी जाल

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने लखनऊ में अपनी संगठनात्मक तैयारियां…

41 minutes ago

दागी नेताओं पर आजीवन चुनाव बैन की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जल्द होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट दागी जनप्रतिनिधियों पर आजीवन चुनाव बैन और लंबित आपराधिक केसों के जल्द निपटारे…

42 minutes ago