Ahmedabad Plane Crash
Ahmedabad Air India Plane Crash: गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून को एक बड़ा हादसा हो गया. जहां एयर इंडिया का एक यात्री प्लेन बोइंग ड्रीमलाइन 787 क्रैश हो गया. इस प्लेन में 10 क्रू मेंबर्स के अलावा 242 पैसेंजर्स सवार थे. आइये जानते हैं कि भारत में अबतक कौन-कौन से बड़े प्लेन हादसे हुए हैं और इसमें कितने लोगों की मौत हुई है.
7 अगस्त 2020 के दिन दुबई से कोझिकोड आ रही एयर इंडिया की बोइंग 737-800 फ्लाइट उस समय हादसे का शिकार हो गई. जब वो भारी बारिश और तेज हवाओं के बीच लैंड कर रही थी. एयर इंडिया की यह फ्लाइट लैंडिंग के वक्त रनवे से फिसलकर एक घाटी में गिर गई. इस विमान में 185 यात्रियों और 6 चालक दल सहित कुल 191 लोग सवार थे.
इस दुर्घटना में दोनों पायलटों सहित कुल 21 लोग मारे गए. विमान की कमान विंग कमांडर कैप्टन दीपक वसंत साठे के हाथों में थी. वहीं सह पायलट के तौर पर भारतीय वायुसेना के परीक्षण पायलट रहे कप्तान अखिलेश कुमार थे. इस मामले की जांच में पायलट की गलती और खराब मौसम को हादसे का जिम्मेदार माना गया.
22 मई 2010 को एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट 812 दुबई से भारत के मंगलौर के लिए उड़ान भरी. उस समय मंगलौर में भारी बारिश हो रही थी. एयर इंडिया की इस फ्लाइट में कुल 166 लोग सवार थे. अधिकतर यात्री केरल और मंगलौर के ही थी. लैंडिंग के वक्त एयर इंडिया की यह फ्लाइट दुर्घटना का शिकार हो गई. इस हादसे में 158 लोगों की मौत हो गई.
हादसे का कारण
मंगलौर के जिस एयरपोर्ट पर यह हादसा हुआ वो पहाड़ी की चोटी पर मौजूद है. इस रनवे को टेबल टॉप रनवे कहते हैं. क्योंकि जब भी कोई प्लेन जब इस एयरपोर्ट पर लैंड करता है तो वो पहाड़ी के अंतिम छोर पर लैंड करता है. जांच में पाया गया कि पहली बार में लैंडिंग के वक्त पायलट रनवे को मिस कर गया. इसके बाद वो दोबारा रनवे पर आने की कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहा. जिसकी वजह से यह प्लेन एयरपोर्ट की दीवार को तोड़ते हुए खाई में जा गिरा. खाई में गिरते ही प्लेन विस्फोट के साथ उड़ गया. प्लेन के टायर फट गए. मंगलौर के इस रनवे के आसपास जंगल और खाई मौजूद हैं. जिसकी वजह से फौरन बचाव अभियान चलाने में समस्याएं आई. जांच के दौरान हादसे में पायलट की गलती पायी गई.
17 जुलाई 2000 को कोलकाता से दिल्ली के लिए एलायंस एयर की फ्लाइट नंबर 7412 उड़ान भरती है. यह विमान बोइंग 737-200 था. जिसका पटना में स्टॉपेज था. सुबह के 7:30 बजे जब विमान पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतर रहा था. तभी पायलट ने विमान पर से अपना नियंत्रण खो दिया. जिसके बाद यह विमान लैंडिंग से महज 2 किलोमीटर पहले असंतुलित होकर पटना के गर्दनीबाद इलाके में गिर गया.
हादसे में 66 लोगों की हुई थी मौत
हादसे के दौरान इस विमान में 55 यात्री और 6 क्रू मेंबर्स मौजूद थे. इस हादसे में विमान में सवार सभी लोग और जमीन पर मौजूद 5 लोगों की जान चली गई. इस हादसे में 66 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. जांच में पायलट की गलती पाई गई. बताया गया कि अपने गलत निर्णय की वजह से पायलट ने लैंडिंग से पहले ही विमान पर से अपना नियंत्रण खो दिया. जिसकी वजह से ये हादसा हुआ.
आज से 28 साल पहले 12 नवंबर 1996 की शाम को हरियाणा के चरखी दादरी के गांव टिकाण कलां के आसमान में भयंकर विस्फोट हुआ. विस्फोट इतना भयंकर था कि ग्रामीणों को लगा कि आसमान में दो सूरज निकल आए हैं. दरअसल टिकाण कलां गांव के आसमान में मालवाहक विमान और यात्री विमान के बीच टक्कर हो गई थी. यात्री विमान कजाकिस्तान का था जबकि मालवाहक विमान सऊदी अरब का था. इस हादसे में कुल 349 लोगों की मौत हो गई थी.
10 किलोमीटर तक बिखरे मिले शव
हादसा इतना जबरदस्त था कि विमानों का मलबा और शव 10 किलोमीटर की परिधि में बिखरे मिले. बताया जाता है कि इस हादसे में इतने शव मिले की शव रखने के लिए चरखी दादरी का सरकारी अस्पताल परिसर भी छोटा पड़ गया.
349 लोगों की हुई मौत
इस हादसे में सऊदी अरब के 18, नेपाल के 9, पाकिस्तान के 3, भारत के 231, अमेरिका के 2 और एक ब्रिटिश नागरिक की जान चली गई. वहीं इस हादसे में 84 शवों की पहचान ही नहीं हो सकी.
हादसे का कारण
दिल्ली से कजाकिस्तान का यात्री विमान उड़ान भरा. उसी समय सऊदी अरब का मालवाहक विमान दिल्ली में उतर रहा था. कजाकिस्तान का यात्री विमान 15 हजार फिट की ऊंचाई पर था और धीरे-धीरे अपनी ऊंचाई खोते हुए नीचे आ रहा था. नई दिल्ली एटीसी लगातार उससे अपनी 15 हजार फिट की ऊंचाई बरकरार रखने की अपील कर रहा था. लेकिन कजाकिस्तान का विमान अपने तय ऊंचाई से और नीचे चला आ रहा था. जिसके चलते सामने से आ रहे सऊदी अरब के मालवाहक विमान से उसकी टक्कर हो गई. इस हादसे में कुल 349 लोगों की मौत हो गई थी. इस हादसे को अबतक हुए सबसे बड़े हवाई हादसों में से एक गिना जाता है.
26 अप्रैल 1993 को इंडियन एयरलाइंस का विमान बोइंग 737 औरंगाबाद से उड़ान भरने की कोशिश करता है. तभी रनवे पर मौजूद एक ट्रक से उसका बांया इंजन टकराकर क्षतिग्रस्त हो जाता है. क्षतिग्रस्त विमान करीब 3 किलोमीटर और उड़ान भरता है फिर नीचे आते हुए बिजली के तारों से टकराकर दो हिस्सों में टूट जाता है. इससे विमान में आग लग जाती है.
इस हादसे में 62 लोगों की जान बच जाती है,लेकिन 55 लोग हादसे में मारे गए. इस हादसे में बचने वालों में दोनों पायलट भी थे.
16 अगस्त, 1991 इंडियन एयरलाइंस का विमान 257 कोलकाता से इंफाल के लिए रवाना हुआ. यह विमान बोइंग का 737-2A8 मॉडल था. जो इंफाल के थांगजिंग हिल के पहाड़ी इलाके में दुर्घटना का शिकार हो गया था. इस हादसे में विमान में सवार सभी 69 लोग मारे गए.
जांच के दौरान यह पाया गया कि विमान का पायल इंफाल पहुंचने के लिए दिए गए जरूरी गाइडलाइंस का पालन नहीं किया. विमान के चालक दल ने शॉर्ट कट लिया था. जिसकी वजह से विमान पहाड़ी इलाकों में दुर्घटना का शिकार हो गया. जांच के दौरान यह भी पता चला कि दुर्घटना के समय इलाके में मौसम खराब था. जिसके बावजूद पायलट ने शॉर्ट कट लिया और विमान को क्रैश कर दिया.
इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट 605 14 फरवरी 1990 के दिन मुंबई से बैंगलोर के लिए उड़ान भरी. यह विमान एयरबस एयरबस A320-231 था. बैंगलोर में लैंडिंग के दौरान विमान एक गोल्फ कोर्स में क्रैश हो गया. इस हादसे में 92 लोगों की मौत हो गई. हादसे के वक्त प्लेन में कुल 146 लोग सवार थे.
जब इस दुर्घटना के कारणों की जांच की गई. तो जांच टीम को एक चौंकाने वाली जानकारी मिली. भारतीय वाणिज्यिक पायलट एसोसिएशन ने दावा किया कि एयरबस ए320 के डिजाइन में खामी है. उन्होंने कहा कि विमान संचालन प्रणाली बहुत लेंदी थी. जिसकी वजह से यह दुर्घटना हुआ. दावा यह भी किया गया कि विमान का चालक दल इस दुर्घटना को टालने के लिए संघर्ष कर रहा था.
जांच में पायलट को हादसे का बताया गया कारण
वहीं भारतीय जांच समिति ने भारतीय वाणिज्यिक पायलट एसोसिएशन के दावे को नकारते हुए पायलट को हादसे का कारण करार दिया. जांच समिति ने कहा कि विमान को उतारने के दौरान पायलटों को ग्लाइडस्लोप कैप्चर की जगह ओपन डिसेंट नियंत्रण मोड का चयन करना चाहिये था.
इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट 113 मुंबई से अहमदाबाद के लिए सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर उड़ान भरी. इस प्लेन के कैप्टन ओएम दलाया थे. विमान जब अहमदाबाद के पास पहुंचा तो धुंध के कारण विमान रनवे से ढाई किलोमीटर दूर चिलोदा कोटरपुर के पास पेड़ों से टकराकर एक धान के खेत में क्रैश हो गया. इस हादसे में विमान पूरी तरह से नष्ट हो गया. इस हादसे में कुल 133 लोग मारे गए. वहीं दो लोग इस हादसे में गंभीर रूप से घायल पाये गए. जिनकी जान बच गई.
जांच के दौरान यह पाया गया कि यह दुर्घटना खराब विजिबिलिटी और पायलट की गलती के कारण हुआ.
एयर इंडिया की फ्लाइट 403 21 जून 1982 को कुआलालंपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मद्रास होते हुए मुंबई आ रहा था. लैंडिंग के वक्त मुंबई में भारी बारिश हो रही थी. एयर इंडिया का यह विमान मुंबई के सांता क्रूज एयरपोर्ट प र लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया. इस हादसे में कुल 17 लोगों की मौत हो गई थी. उस समय इस फ्लाइट में कुल 111 लोग सवार थे.
इस हादसे की जांच कर रहे दल ने अपनी जांच में पाया कि पायलट की गलती की वजह से ये हादसा हुआ. जांच दल के अनुसार पायलट ने 12 सेकेंड पहले इंजन के पावर को कम कर दिया था. जिसकी वजह से फ्लाइट तेजी से नीचे आया और क्रैश हो गया.
एयर इंडिया की फ्लाइट 855 (बोइंग 747) 1 जनवरी 1978 को मुंबई से दुबई के लिए उड़ान भरी. उड़ान के लगभग 2 मिनट से भी कम समय में यह विमान बांद्रा के तट से लगभग 3 किलोमीटर दूर अरब सागर में क्रैश हो गया. हादसे में सभी 213 लोगों की मौत हो गई. मुंबई की ये दुर्घटना चरखी दादरी के बाद भारत के इतिहास में सबसे बड़ी प्लेन दुर्घटना थी. इस विमान को कैप्टन मदन लाल कुकर उड़ा रहे थे. वहीं इस फ्लाइट का पहला अधिकारी इंदु विरमानी थी. जो भारतीय वायुसेना की विंग कमांडर रह चुकी थीं.
इस हादसे की जांच करने वाली टीम ने बताया कि यह हादसा शायद पायलटों के दिशा भ्रम होने के कारण हुआ. जांच दल ने ये भी बाताया कि हादसे में उड़ानों के उपकरण विफल हो गए थे. जिसकी वजह से चालक दल ने विमान पर से अपना नियंत्रण खो दिया.
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