लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा के दौरान माहौल काफी गर्म रहा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बहस का जवाब देते हुए सरकार का रुख साफ किया और विपक्ष की कई आशंकाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया दी.
अमित शाह ने कहा कि कई सांसदों ने सवाल उठाए कि परिसीमन को अभी इस संदर्भ में क्यों जोड़ा जा रहा है. इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में यह पहले से तय है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर जब परिसीमन होगा, तभी महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाएगा. उनका कहना था कि इस प्रक्रिया को लेकर बेवजह भ्रम फैलाया जा रहा है.
गृह मंत्री ने अपने भाषण में 1970 के दशक का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि 1972 में तत्कालीन सरकार ने लोकसभा सीटों की संख्या 525 से बढ़ाकर 545 की थी, लेकिन बाद में इसे फ्रीज कर दिया गया. इसके बाद 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन के जरिए परिसीमन पर रोक लगा दी गई.
शाह ने आरोप लगाया कि उस समय और आज भी कांग्रेस ने परिसीमन की प्रक्रिया को प्रभावित किया है, जिससे जनता का प्रतिनिधित्व प्रभावित हुआ.
उन्होंने यह भी कहा कि 1976 में देश की आबादी लगभग 56.79 करोड़ थी, जो अब बढ़कर करीब 140 करोड़ हो चुकी है. ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी जनसंख्या के बावजूद संसद की सीटों की संख्या लगभग स्थिर क्यों रखी जाए. उनके मुताबिक, यह जनता के प्रतिनिधित्व के साथ न्याय नहीं है.
अमित शाह ने जनगणना में देरी को लेकर भी सफाई दी. उन्होंने कहा कि 2021 में जनगणना होनी थी, लेकिन उसी समय कोविड महामारी आ गई, जिससे पूरी प्रक्रिया रोकनी पड़ी. महामारी के बाद देश को सामान्य स्थिति में आने में समय लगा. इसके बाद जब 2024 में प्रक्रिया आगे बढ़ी, तो कई पक्षों ने जातिगत जनगणना की मांग उठाई.
सरकार ने इस पर विभिन्न राजनीतिक दलों, राज्यों और सामाजिक समूहों से चर्चा की और फिर यह फैसला लिया गया कि अगली जनगणना जातिगत आधार पर भी की जाएगी.
गृह मंत्री ने साफ कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट पहले ही यह निर्णय ले चुकी है कि 2026 की जनगणना जाति आधारित आंकड़ों के साथ होगी. उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार ने पूरा टाइमटेबल पहले ही तय कर दिया है.
अपने संबोधन में शाह ने यह भी कहा कि देश को उत्तर बनाम दक्षिण के विवाद में नहीं उलझाना चाहिए. उन्होंने कहा कि संसद में सभी राज्यों का बराबर अधिकार है, चाहे वे उत्तर से हों या दक्षिण से. ऐसे किसी भी विभाजनकारी नैरेटिव से देश की एकता को नुकसान पहुंच सकता है.
ये भी पढ़ें: ‘राहुल को बचपन का ट्रॉमा…’ कंगना रनौत का राहुल गांधी पर अब तक का सबसे बड़ा हमला
-भारत एक्सप्रेस
दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मणिपुर के सांसद और जेएनयू प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइज्म…
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) पर अबू धाबी T10 लीग में अपने खिलाड़ियों को NOC देने…
Sone Chandi ka Rate: धनतेरस से ठीक पहले सोने और चांदी की चमक और तेज…
8वें वेतन आयोग के गठन को एक साल पूरा हो चुका है. केंद्रीय कर्मचारियों और…
Agniveer Scheme: अग्निवीरों के पहले बैच के लिए केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान, सेवा अवधि…
Supreme Court: जेल से रिहाई के तुरंत बाद ईडी द्वारा गिरफ्तार किए गए आजम खान…