केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि देश के बड़े नागरिक सम्मान किसी पहचान, रिश्तेदारी या व्यक्तिगत संपर्क के आधार पर नहीं दिए जाने चाहिए. इन पुरस्कारों का असली मकसद उन लोगों को सामने लाना है, जिन्होंने बिना किसी प्रचार की उम्मीद के समाज और देश के लिए अपना जीवन लगा दिया.
अमित शाह अमरेली जिले के दुधला में ‘गुजरात गौरव सरोवर’ के उद्घाटन कार्यक्रम में बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने समाजसेवी और उद्योगपति सावजीभाई ढोलकिया के काम की जमकर तारीफ की. उन्होंने खास तौर पर गुजरात के जल संकट वाले इलाकों में जल संरक्षण के लिए किए गए काम का जिक्र किया.
शाह ने बताया कि सावजीभाई ढोलकिया को वर्ष 2022 में समाज सेवा के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. दिलचस्प बात यह है कि ढोलकिया ने कहा था कि उन्होंने इस सम्मान के लिए खुद आवेदन तक नहीं किया था. इसी बात का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को 208 झीलों के निर्माण और जल संरक्षण जैसे बड़े काम के बाद भी पुरस्कार के लिए आवेदन करना पड़े, तो यह सरकार की व्यवस्था पर सवाल होगा.
सावजीभाई ढोलकिया का जल संरक्षण से जुड़ा काम लंबे समय से चर्चा में रहा है. गुजरात के सौराष्ट्र जैसे पानी की कमी से जूझने वाले इलाकों में झीलों और जलस्रोतों के विकास के जरिए उन्होंने स्थानीय स्तर पर पानी बचाने की कोशिशों को मजबूती दी. शाह ने कहा कि एक व्यक्ति द्वारा अपने जीवन में 208 झीलों का निर्माण कराना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है.
उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल का फायदा केवल एक गांव या एक परियोजना तक सीमित नहीं रहता. जब लोग किसी काम का असर अपनी आंखों से देखते हैं, तो दूसरे गांव और समुदाय भी उससे प्रेरणा लेते हैं. यही वजह है कि सौराष्ट्र में जल संरक्षण को लेकर एक व्यापक सोच विकसित हुई है.
अमित शाह ने ढोलकिया परिवार के फाउंडेशन की ओर से दक्षिण गुजरात में किए जा रहे सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख किया. उन्होंने राज्यसभा सांसद गोविंद ढोलकिया के साथ हुई बातचीत को याद करते हुए बताया कि फाउंडेशन कई गांवों में शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े काम कर रहा है.
इन पहलों में हनुमान मंदिरों का निर्माण, शनिवार को सुंदरकांड के कार्यक्रम और स्कूलों को सहयोग देना शामिल है. शाह ने कहा कि उन्होंने फाउंडेशन से इन गतिविधियों का दायरा 250 गांवों से बढ़ाकर 1,100 गांवों तक ले जाने का आग्रह किया है.
शाह ने शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे काम की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवारों के बच्चों को संस्कृत के श्लोक और दुर्गा स्तवन का पाठ करते देख उन्हें काफी प्रभावित हुआ. उनके मुताबिक, ऐसे प्रयास बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास भी पैदा करते हैं.
कार्यक्रम में अमित शाह ने ढोलकिया परिवार के समाज सेवा के नजरिए की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि धन और संपत्ति का असली महत्व तभी है, जब उसका लाभ दूसरे लोगों तक पहुंचे.
उन्होंने कहा कि पैसा ईश्वर और मां लक्ष्मी की कृपा है, लेकिन इस संपत्ति का इस्तेमाल अगर जरूरतमंदों और समाज के दूसरे वर्गों के जीवन को बेहतर बनाने में किया जाए, तभी उस धन की सार्थकता है.
शाह ने इसी संदर्भ में कहा कि पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत रत्न जैसे सम्मान किसी परिवार, रिश्तेदारी या जान-पहचान के लिए नहीं हैं. इनका उद्देश्य उन लोगों को सम्मान देना है, जिन्होंने बिना किसी तालियों या तारीफ की उम्मीद के देशवासियों और गरीबों की सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाया.
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-भारत एक्सप्रेस
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