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जलियांवाला बाग नरसंहार की बरसी: गृह मंत्री अमित शाह ने अमर बलिदानियों को दी श्रद्धांजलि

आज 13 अप्रैल यानी भारतीय इतिहास का वो काला दिन, जिसकी याद आते ही आज भी हर हिंदुस्तानी की आंखें नम हो जाती हैं और सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. 107 साल पहले आज ही के दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग में ब्रिटिश हुकूमत ने अपनी क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थीं. इस दुखद और प्रेरणादायी बरसी पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन सैकड़ों निर्दोष देशवासियों को नमन किया है, जिन्होंने मातृभूमि की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी थी.

अंग्रेजी हुकूमत का अमानवीय चेहरा

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी संवेदनाएं और श्रद्धा व्यक्त की. शाह ने अपने पोस्ट में लिखा, “आज ही के दिन पंजाब के जलियांवाला बाग में क्रूर अंग्रेजी हुकूमत का अमानवीय चेहरा बेनकाब हुआ था, जब शांतिपूर्ण सभा कर रहे निहत्थे देशवासियों पर अंधाधुंध गोलियाँ बरसाई गईं. इस जघन्य कृत्य ने पूरे देश को झकझोर दिया और भगत सिंह, ऊधम सिंह जैसे क्रांतिकारियों के मन में स्वतंत्रता की ज्वाला को और प्रज्वलित किया.

अमित शाह ने आगे लिखा कि ये वो ऐतिहासिक मोड़ था, जहां से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांति की भावना को और अधिक बल मिला. जलियांवाला बाग में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले अमर बलिदानियों का वन्दन कर उन्हें नमन करता हूं.”

इतिहास का जख्म जिसने ‘इंकलाब’ को दी नई धार

अमित शाह का यह संदेश उस ऐतिहासिक सत्य को दोहराता है कि जलियांवाला बाग कोई साधारण घटना नहीं थी. बैसाखी का दिन था, लोग शांति से रॉलेट एक्ट का विरोध करने के लिए इकट्ठा हुए थे, लेकिन जनरल डायर की उस एक सनक ने हंसते-खेलते बाग को श्मशान में बदल दिया. गृह मंत्री ने सही कहा कि इस नरसंहार ने देश के युवाओं का खून खौला दिया था.

12 साल के बालक भगत सिंह ने उस मिट्टी को चूमकर कसम खाई थी कि वे अंग्रेजों को देश से निकाल कर ही दम लेंगे. वहीं, सरदार ऊधम सिंह ने 21 साल तक इस प्रतिशोध की आग को अपने सीने में जलाए रखा और अंततः लंदन जाकर इस हत्याकांड के जिम्मेदार माइकल ओ’डायर को धूल चटाई. अमित शाह का ट्वीट इसी ‘क्रांतिकारी भावना’ को नमन करता है.

विरासत का सम्मान और आज का भारत

अमित शाह के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने हमेशा से ही उन ‘अनसंग हीरोज’ को सम्मान देने की कोशिश की है, जिन्हें इतिहास के पन्नों में वो जगह नहीं मिली जिसके वे हकदार थे. जलियांवाला बाग स्मारक का नवीनीकरण और वहां की ‘शहीदी कुएं’ की पवित्रता को बनाए रखना इसी कड़ी का हिस्सा है.

आज का भारत जब ‘आजादी का अमृत काल’ मना रहा है, तब जलियांवाला बाग के बलिदानियों की याद हमें ये अहसास कराती है कि ये आजादी कितनी महंगी कीमत पर मिली है.

ये भी पढ़ें: ‘पंचायत से पार्लियामेंट तक’: आज दिल्ली में ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करेंगे पीएम मोदी

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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