आज पूरा देश सिखों के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जन देव के शहीदी दिवस पर उन्हें याद कर रहा है और नमन कर रहा है. भारतीय इतिहास में गुरु अर्जन देव का स्थान एक ऐसे युगपुरुष के रूप में है, जिन्होंने न केवल समाज को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध किया, बल्कि धर्म और मानवता की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी. इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरु साहिब के महान कार्यों और उनके ऐतिहासिक बलिदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गुरु साहिब के चरणों में वंदन करते हुए लिखा, ‘पंचम गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि वंदन. आदि ग्रंथ का संकलन कर मानव समाज को अमूल्य विरासत देने वाले और मानवता का मार्ग दिखाने वाले गुरु साहिब जी ने हरमंदिर साहिब का निर्माण पूर्ण कराया.’
पंचम गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि वंदन।
आदि ग्रंथ का संकलन कर मानव समाज को अमूल्य विरासत देने वाले और मानवता का मार्ग दिखाने वाले गुरु साहिब जी ने हरमंदिर साहिब का निर्माण पूर्ण कराया। मुगल आक्रांताओं का कठोर प्रतिकार करते हुए धर्मांतरण के खिलाफ… pic.twitter.com/IWO29TKMAJ— Amit Shah (@AmitShah) June 18, 2026
अमित शाह ने आगे ये भी लिखा कि मुगल आक्रांताओं का कठोर प्रतिकार करते हुए धर्मांतरण के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले गुरु साहिब जी की बलिदान गाथा देश के बच्चे-बच्चे को स्वसंस्कृति और मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रेरित करती रहेगी.
अगर हम गुरु अर्जन देव जी के जीवन और उनके योगदान को करीब से देखें, तो अमित शाह का यह संदेश उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को सामने लाता है. गुरु साहिब ने ही सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ ‘आदि ग्रंथ’ का संकलन किया था. उन्होंने इसमें न केवल सिख गुरुओं की वाणी को शामिल किया, बल्कि देश के विभिन्न कोनों से आने वाले संत-महात्माओं जैसे कबीर दास, बाबा फरीद और संत रविदास जी के भजनों को भी इसमें जगह दी. ये ग्रंथ आज भी पूरी दुनिया को आपसी भाईचारे और समरसता का पाठ पढ़ाता है.
इसके साथ ही, अमृतसर में स्थित सिखों के सबसे पवित्र स्थल ‘हरमंदिर साहिब’ (स्वर्ण मंदिर) का निर्माण कार्य भी गुरु अर्जन देव जी ने ही पूरा कराया था. उन्होंने इसकी नींव एक सूफी संत मियां मीर से रखवाई थी, जो यह दिखाता है कि उनका विजन कितना समावेशी था.
मुगल बादशाह जहांगीर के शासनकाल में गुरु अर्जन देव की बढ़ती लोकप्रियता और उनके धार्मिक विचारों से बौखलाकर उन पर अत्याचार किए गए. उन्हें जबरन धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन गुरु साहिब अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे.
तपते हुए जेठ के महीने में उन्हें लाहौर में लोहे की गर्म तवा पर बिठाया गया और उनके ऊपर उबलती हुई रेत डाली गई. इस असहनीय पीड़ा को सहते हुए भी उनके मुख पर केवल ईश्वर का नाम था और उन्होंने ‘तेरा कीआ मीठा लागै’ का संदेश दिया. अंत में रावी नदी के पवित्र जल में उनका शरीर विलीन हो गया.
ये भी पढ़ें: फ्रांस की धरती पर गूंजा ‘भारत माता की जय’ का नारा, पेरिस पहुंचे पीएम मोदी ने प्रवासियों को कहा- थैंक यू
-भारत एक्सप्रेस
Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत सरकार ने बुधवार को एक बार फिर…
Election Commission Dispute: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के पूर्व संयुक्त निदेशक मोहम्मद अमीन ने बुधवार…
CJI Surya Kant viral caste remarks fact check: सोशल मीडिया पर जाति और आरक्षण को…
Ujjain Riot: सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत चल रहे चौड़ीकरण कार्य के दौरान हुए उपद्रव…
Flydubai Hijacking: विमान के ओमानी को-पायलट ने मुख्य पायलट स्मित मचार पर चाकू से हमला…
CAQM Pollution Action Plan: दिल्ली-NCR में सर्दी आते ही प्रदूषण का ग्राफ बढ़ जाता है,…