India vs Pakistan Aerial Warfare: दक्षिण एशिया के आसमान में भारतीय वायुसेना (IAF) का वो खौफनाक चक्रव्यूह तैयार हो चुका है, जिसने पाकिस्तानी सेना के चीफ जनरल असीम मुनीर और उनकी पूरी एयरफोर्स की रातों की नींद उड़ा दी है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और मई 2025 के भयंकर सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के बीच हवाई युद्ध (Aerial Warfare) का पूरा भूगोल बदल गया है.
खबर आ रही है कि भारतीय वायुसेना के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के महा-काल से डरकर पाकिस्तान को भारतीय सीमा के करीब तैनात अपने सबसे कीमती और ताकतवर साब-2000 एरीआई (Erieye AEW&C) हवाई निगरानी विमानों को दुम दबाकर पीछे हटाना पड़ रहा है.
‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ (IDRW) की ताजा विस्फोटक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 10 मई को हुए सैन्य टकराव के दौरान भारत के S-400 सिस्टम ने अपनी सबसे घातक और लंबी दूरी की 40N6 मिसाइल दागी थी. इस मिसाइल ने राजस्थान बॉर्डर के पार सीधे पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित ‘भोलारी एयरबेस’ के भीतर घुसकर सटीक प्रीसीजन अटैक किया था.
इस हमले (India vs Pakistan Aerial Warfare) में पाकिस्तान वायुसेना (PAF) के सबसे हाई-वैल्यू मिलिट्री एसेट माने जाने वाले साब-2000 एरीआई विमान का एक पूरा हैंगर तबाह हो गया था और विमान के परखच्चे उड़ गए थे. भारत के इस पराक्रम से सहमी पाकिस्तानी सेना अब अपनी नंबर-53 एयरबोर्न स्क्वाड्रन के बचे-कुचे विमानों को सिंध से निकालकर बलूचिस्तान के क्वेटा स्थित ‘समुंगली एयरबेस’ में छिपाने की तैयारी कर रही है.
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय वायुसेना द्वारा S-400 सिस्टम की 40N6 मिसाइल वेरिएंट के लाइव इस्तेमाल ने पूरे युद्ध की रणनीति को बदल दिया है. इस मिसाइल की मारक क्षमता 300 किलोमीटर से भी अधिक है, जो दुश्मन के विमानों को टेकऑफ करते ही हवा में भस्म करने की ताकत रखती है.
पाकिस्तान का यह विमान लंबी दूरी की रडार निगरानी और लड़ाकू विमानों को रियल-टाइम सूचनाएं देने वाला इकलौता सहारा था. अब जब भारत ने इसके मुख्य ठिकाने को ही टारगेट कर लिया है, तो पाकिस्तान अपनी इस आखिरी ताकत को बचाने के लिए बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाकों की शरण ले रहा है.
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यह डर सिर्फ S-400 का नहीं है. इससे पहले भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के सबसे सुरक्षित और परमाणु हथियारों वाले ठिकाने ‘किराना हिल्स’ पर ब्रह्मोस मिसाइल दागकर उसके होश उड़ा दिए थे. हालांकि पाकिस्तान ने इसकी सुरक्षा के लिए अमेरिकी रडार सिस्टम भी तैनात किया, लेकिन भारतीय मिसाइलों के सामने सब फेल साबित हुआ.
इसको लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि बलूचिस्तान भागने से पाकिस्तानी विमानों को सामरिक सुरक्षा तो मिल जाएगी, लेकिन भारत की पूर्वी सीमा पर निगरानी रखने के लिए उनका फ्लाइट टाइम और फ्यूल खर्च इतना बढ़ जाएगा कि कंगाल पाकिस्तान की वायुसेना पूरी तरह पंगु हो जाएगी.
-भारत एक्सप्रेस
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