Amravati Hospital Ventilator Blast: अमरावती के सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर फटने से 3 नवजात मासूमों की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर पूरे देश के सामने यह कड़वा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक? कभी झोलाछाप या लापरवाह डॉक्टरों का ओवरडोज, कभी कंपनियों द्वारा बेचा जा रहा जहरीला कफ सिरप, तो कभी सरकारी अस्पतालों के खटारा उपकरणों में ब्लास्ट-हर बार इस लचर और अंधे सिस्टम की बली हमारे मासूम बच्चे ही क्यों चढ़ते हैं?
बता दें कि अमरावती में अ घूआ हादसा तो बस एक ताजा उदाहरण है, वहीं बीते कुछ महीनों की क्राइम रिपोर्ट उठाकर देख लीजिए, अस्पतालों में ‘जीवन बचाने वाले’ ही मासूमों के लिए ‘काल’ बनते नजर आ रहे हैं.
अमरावती हादसे से कुछ ही महीने पहले मध्य प्रदेश (छिंदवाड़ा) और राजस्थान में जो हुआ, उसने हर मां का कलेजा कपा दिया था. बच्चों की सर्दी-खांसी ठीक करने के नाम पर ‘कोल्डरिफ’ नाम का कफ सिरप पिलाया गया. जब लैब टेस्ट हुआ तो पता चला कि उस सिरप में 48.6% ‘डाइएथिलीन ग्लाइकोल’ (DEG) मिला हुआ था-जो कि एक जानलेवा इंडस्ट्रियल केमिकल है! इस जहरीली दवा को पीकर 24 से ज्यादा मासूम बच्चों की किडनियां फेल हो गईं और वे तड़प-तड़पकर मर गए.
हाल ही में बिहार के नवादा से लेकर यूपी के कई इलाकों में झोलाछाप और लापरवाह डॉक्टरों का खौफनाक चेहरा सामने आया. नवादा में एक झोलाछाप डॉक्टर के गलत इंजेक्शन और लापरवाही के चलते एक मासूम बच्चे ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया था.
ज्ञात रहे डॉक्टरों की यह गैर-जिम्मेदाराना हरकत केवल छोटे कस्बों तक सीमित नहीं है; बड़े-बड़े अस्पतालों में भी ड्यूटी से गायब रहने वाले और बिना सीनियर चेक-अप के जूनियरों के भरोसे वॉर्ड छोड़ने वाले डॉक्टरों की वजह से आए दिन मासूमों की जान पर बन आती है.
इसी साल फरवरी में उत्तर प्रदेश के कानपुर (बिठूर) के ‘राजा नर्सिंग होम’ से दिल दहला देने वाली खबर आई. वहां महज 24 घंटे पहले जन्मी एक नवजात बच्ची को इनक्यूबेटर (वॉर्मर मशीन) में रखा गया था. शॉर्ट-सर्किट की वजह से मशीन में भयंकर आग लग गई और मासूम बच्ची जिंदा जल गई! बाद में खुलासा हुआ कि अस्पताल का वह NICU पूरी तरह से अवैध चल रहा था और वहां लगे अग्निशामक सिलेंडर भी 7 महीने पहले ही एक्सपायर हो चुके थे.
वहीं मई 2024 में दिल्ली के विवेक विहार स्थित एक अवैध बेबी केयर सेंटर में आधी रात को ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से 7 नवजात शिशुओं की जलकर मौत हो गई थी. क्षमता से डबल बच्चे ठूंसकर वो अस्पताल चलाया जा रहा था. वहीं, दिसंबर 2025 में लखनऊ में पुलिस की SIT ने नकली और जहरीले कफ सिरप सप्लाई करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया, जिसमें बर्खास्त पुलिस वाले तक शामिल थे, जो पैसों के लालच में मासूमों की नसों में ज़हर घोल रहे थे.
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सोमवार तड़के अमरावती के सरकारी अस्पताल में जिस तरह वेंटिलेटर में भयंकर ब्लास्ट हुआ और 3 नवजात मासूमों की जलकर मौत हो गई, उसने साबित कर दिया है कि कागजों पर चलने वाला सुरक्षा मेंटेनेंस पूरी तरह खोखला है. हर हादसे के बाद ‘जांच कमेटी’ का वही पुराना घिसा-पिटा नाटक दोहराया जाता है. लेकिन सवाल वही है कि जब तक लापरवाह डॉक्टरों, जहरीली दवाएं बनाने वाली कंपनियों और भ्रष्ट अफसरों को जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाएगा, तब तक मासूमों की जान का यह सौदा यूं ही चलता रहेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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