देश

जब सेना की वर्दी पहन मेजर बने डॉ. कलाम…! पुण्यतिथि पर जानें पोखरण की वो इनसाइड स्टोरी

27 जुलाई 2015 का वो गमगीन दिन (APJ Abdul Kalam Death Anniversary) देश कभी नहीं भूल सकता, जब शिलांग में आईआईएम के छात्रों को संबोधित करते-करते भारत के सबसे चहेते पूर्व राष्ट्रपति, दूरदर्शी और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने दुनिया को अलविदा कह दिया था. आज डॉ. कलाम की 11वीं पुण्यतिथि (27 जुलाई 2026) पर पूरा देश अपने ‘मिसाइल मैन’ को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजालि अर्पित कर रहा है.

कलाम साहब की सादगी, बच्चों से उनके प्यार और प्रेरणादायक विचारों के किस्से तो आपने कई सुने होंगे, लेकिन भारत को दुनिया के नक्शे पर ‘परमाणु महाशक्ति’ बनाने के पीछे उनकी जो सीक्रेट कूटनीति थी, वो किसी हॉलीवुड या बॉलीवुड की थ्रिलर सस्पेंस फिल्म से कम नहीं है.

जानिए वो इनसाइड स्टोरी(APJ Abdul Kalam Pokhran story )

यह कहानी शुरू होती है साल 1998 के पोखरण-2 परमाणु परीक्षण से. इससे पहले 1995 में जब भारत ने परमाणु परीक्षण करने की कोशिश की थी, तो अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) के अत्याधुनिक सैटेलाइट्स ने पोखरण के रेगिस्तान में भारत की तैयारियों को पकड़ लिया था.

उस वक्त अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण भारत को कदम पीछे खींचने पड़े थे. 1998 में जब देश में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनी, तो डॉ. कलाम (तत्कालीन डीआरडीओ प्रमुख) और परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. आर. चिदंबरम को यह गोपनीय मिशन पूरा करने की कमान सौंपी गई.

अमेरिकी जासूसी को दिया चकमा

1998 में चुनौती और भी ज्यादा भयंकर थी. अमेरिका के पास ‘कीहोल’ (Keyhole) और ‘लैक क्रॉस’ जैसे बेहद शक्तिशाली और जासूस सैटेलाइट्स थे, जो अंतरिक्ष से धरती पर रखी किसी 2 इंच की छोटी चीज की भी हाई-रिज़ॉल्यूशन फोटो खींच सकते थे.

अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के जासूस चौबीसों घंटे पोखरण की हर हलचल पर नजर गड़ाए बैठे थे. जरा सी चूक और भारत का यह सपना हमेशा के लिए टूट सकता था. ऐसे में डॉ. कलाम ने एक ऐसा मास्टरप्लान तैयार किया, जिसने अमेरिकी इंटेलिजेंस के भी पसीने छुड़ा दिए.

जब कलाम साहब ने पहनी सेना की वर्दी

पोखरण के तपते रेगिस्तान में जासूसी कैमरों और उपग्रहों की नजरों से बचने के लिए डॉ. कलाम ने एक बड़ा फैसला (APJ Abdul Kalam Pokhran story ) लिया. वे कभी भी अपने ट्रेडमार्क कुर्ते-पायजामे में पोखरण नहीं गए. सीक्रेट मिशन के तहत कलाम साहब भारतीय सेना की 54वीं इंजीनियर कोर की फौजी वर्दी पहनकर पोखरण में एंट्री लेते थे. किसी को कानों-कान खबर न हो और कोडवर्ड में ही पूरी बातचीत हो, इसके लिए डॉ. कलाम का नाम ‘मेजर पृथ्वीराज’ रखा गया था. वहीं उनके साथी डॉ. आर. चिदंबरम को ‘कैप्टन नटराज’ का कोडनेम दिया गया था.

ये भी पढ़ें- इंफोसिस से Aadhaar तक अब Exam Reform की जिम्मेदारी, कौन हैं नंदन नीलेकणि जो संभालेंगे NEET-JEE का मोर्चा?

सैटेलाइट्स के ‘ब्लाइंड स्पॉट’ का यूं उठाया फायदा

डॉ. कलाम और उनकी टीम ने अमेरिकी सैटेलाइट्स के पोखरण के ऊपर से गुजरने के समय का पूरा टाइम-टेबल और ऑर्बिट चक्र समझ लिया था. जब भी अमेरिकी सैटेलाइट्स पोखरण के ऊपर से गुजरते, सारे वैज्ञानिक और फौजी छिप जाते थे या अपने काम बंद कर देते थे. जैसे ही सैटेलाइट आगे निकल जाता, वैज्ञानिक अपने काम में जुट जाते.

इतना ही नहीं, परीक्षण स्थल पर खोदे गए गड्डों और रेत के टीलों को इस तरह से सेट किया जाता था कि अंतरिक्ष से खींची गई तस्वीरों में सब कुछ एकदम सामान्य लगे. रात के अंधेरे में टॉर्च की रोशनी तक का इस्तेमाल बेहद सावधानी से किया जाता था.

11 मई 1998: जब पोखरण के धमाके से दंग रह गया अमेरिका

कलाम साहब यानी ‘मेजर पृथ्वीराज’ का यह सीक्रेट प्लान (APJ Abdul Kalam Pokhran story ) पूरी तरह कामयाब रहा. 11 मई 1998 को पोखरण में भारत ने एक साथ तीन सफल परमाणु परीक्षण किए और दो दिन बाद 13 मई को दो और परीक्षण कर पूरी दुनिया को चौंका दिया.

जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दुनिया के सामने भारत के ‘परमाणु शक्ति संपन्न देश’ बनने का ऐलान किया, तब जाकर अमेरिका और सीआईए को पता चला कि उनके सैटेलाइट्स के नाक के नीचे क्या खेल हो गया. आज कलाम साहब की पुण्यतिथि पर पूरा देश उनके इस अदम्य साहस और देशभक्ति को नमन कर रहा है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

Recent Posts

दौड़ रहा है गंगा एक्सप्रेसवे! उन्नाव के एक रैंप को छोड़ कहीं जलभराव नहीं, प्रोजेक्ट मैनेजर ने दी जानकारी

देश भर में जारी भारी और असामान्य मानसूनी बारिश के बीच गंगा एक्सप्रेसवे पूरी तरह…

29 minutes ago

India’s First LNG Train Launch: अमित शाह दिखाएंगे हरी झंडी, जानिए क्या है इस डुअल-फ्यूल ट्रेन की खासियत

India First LNG Train: हाइड्रोजन के बाद अब भारतीय रेलवे देश की पहली LNG-डीजल ट्रेन…

1 hour ago

सबक नहीं सीखा क्या… UNGA के मंच से रूस ने जर्मनी को क्यों याद दिलाया दूसरा विश्व युद्ध?

Russia Germany Clash: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में रूस और जर्मनी आमने-सामने आ गए हैं.…

2 hours ago

UP से लेकर छत्तीसगढ़ और बिहार तक…14 राज्यों में मचा हाहाकार, क्या है ये राक्षसी ‘Cyclone Arnab’?

Cyclone Arnab Kya Hai: बंगाल की खाड़ी से उठे मौसमी सिस्टम ‘अर्नब’ के असर से…

2 hours ago

UPSC Recruitment 2026: केंद्र सरकार में अफसर बनने का बड़ा मौका, 13 स्पेशलिस्ट पदों पर निकली भर्ती

UPSC Recruitment 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने केंद्र सरकार और दिल्ली प्रशासन में…

2 hours ago

UN में वीटो पावर दिलाने उतरे पुतिन! रूस ने ठोकी भारत की दावेदारी, क्यों कांप उठा PAk?

India UNSC Permanent Seat: रूस लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और…

3 hours ago